अखंड नगर की हरपुर गौशाला में कथित घोर लापरवाही: सरकार के आदेशों पर सवाल
अखंड नगर : हरपुर ग्राम सभा स्थित गौशाला की स्थिति को लेकर अब ग्रामीणों का आक्रोश खुलकर सामने आ गया है। जहां एक ओर प्रदेश सरकार गौशालाओं को सुव्यवस्थित, सुरक्षित और संरक्षित रखने के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं जमीनी स्तर पर हरपुर गौशाला की हालत उन दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
ग्रामीणों का आरोप है कि गौशाला में बीमार और निराश्रित गायें तड़प रही हैं। कई पशु उठने की स्थिति में नहीं हैं, फिर भी उन्हें समय पर उपचार या सहारा नहीं मिल रहा। एक गाय की पूंछ के पास गंभीर घाव और रक्तस्राव की बात सामने आई है। ग्रामीण पूछ रहे हैं — जब सरकार गौसेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताती है, तो हरपुर गौशाला में यह दुर्दशा क्यों?
पशु चिकित्सक डॉ. सिकंदर अब्बास पर नियमित निरीक्षण न करने का आरोप लगाया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि चिकित्सकीय निगरानी समय पर होती, तो पशुओं की हालत इतनी खराब न होती।
इसके बाद ग्राम प्रधान हरिनाथ कनौजिया, पंचायत सचिव शिवम मिश्रा और सचिन की भूमिका पर भी तीखे सवाल उठाए जा रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि गौशाला संचालन, पशुओं की गिनती, ईयर टैग व्यवस्था और खर्च के रिकॉर्ड में पारदर्शिता नहीं है। कुछ ग्रामीणों ने यहां तक आरोप लगाया है कि जिम्मेदार लोगों की आपसी मिलीभगत के कारण व्यवस्थाएं केवल कागजों तक सीमित हैं।
सबसे ज्यादा आक्रोश मृत गौवंश के निस्तारण को लेकर है। ग्रामीणों के अनुसार एक मृत गाय को जेसीबी से गड्ढा खुदवाकर दफनाने की प्रक्रिया की गई, लेकिन उसे पूरी तरह मिट्टी से नहीं ढंका गया। परिणामस्वरूप शव खुले में पड़ा रहा और आवारा कुत्ते उसे नोचते रहे। ग्रामीणों का कहना है कि यह न केवल अमानवीय कृत्य है, बल्कि गौमाता के सम्मान के विपरीत भी है।
ग्रामीणों का कहना है कि प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बार-बार गौशालाओं को सुव्यवस्थित रखने, निराश्रित गौवंश की सुरक्षा और सम्मानजनक निस्तारण के निर्देश देते रहे हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि हरपुर गौशाला में इन निर्देशों का पालन क्यों नहीं हो रहा?
ग्रामीण खुलकर पूछ रहे हैं —
क्या जिम्मेदार अधिकारियों को स्थिति की जानकारी नहीं है?
यदि जानकारी है, तो कार्रवाई क्यों नहीं?
सचिन की वास्तविक भूमिका क्या है?
और आखिर गौशाला की बदहाल स्थिति का जवाबदेह कौन?
ग्रामीणों ने खंड विकास अधिकारी (वीडीओ), उपजिलाधिकारी (एसडीएम) और जिला अधिकारी से तत्काल उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। चेतावनी दी गई है कि यदि शीघ्र ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन किया जाएगा।
हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित पक्ष की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है
संवाददाता : दिनेश सिंह अग्निवंशी


No Previous Comments found.