कोर्ट के आदेश के बावजूद खड़ा 50 लाख का अवैध मकान! प्रधान बलिराम राजभर पर गंभीर आरोप

 सुल्तानपुर : सुल्तानपुर जनपद के कादीपुर तहसील अंतर्गत ग्राम भेलारा में ग्राम सभा की भूमि पर अवैध कब्जे का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। इस पूरे प्रकरण में गांव के प्रधान बलिराम राजभर पर गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। ग्रामीणों का दावा है कि चारागाह की जमीन पर कब्जा कर लगभग 50 लाख रुपये की लागत से भव्य पक्का मकान खड़ा कर लिया गया है।

 क्या है पूरा मामला?
ग्राम भेलारा में स्थित गाटा संख्या 1772/0.025 हेक्टेयर भूमि, जो राजस्व अभिलेखों में ग्राम सभा की चारागाह के रूप में दर्ज है, उस पर अवैध कब्जे की शिकायत लंबे समय से की जा रही थी। ग्रामीणों का आरोप है कि इस जमीन पर कब्जा कर निर्माण कार्य कराया गया और अब वहां एक आलीशान पक्का मकान तैयार हो चुका है।
सबसे गंभीर बात यह है कि ग्रामीण सीधे तौर पर इस निर्माण को प्रधान बलिराम राजभर से जोड़ रहे हैं और खुले तौर पर उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
 न्यायालय का आदेश, फिर भी कार्रवाई नहीं
इस मामले में तहसीलदार न्यायालय ने 22 जुलाई 2024 को वाद संख्या 5036/2023 में स्पष्ट आदेश पारित किया था। न्यायालय ने:
संबंधित भूमि को ग्राम सभा की संपत्ति घोषित किया
कब्जा अवैध माना
आरोपी को बेदखल करने का आदेश दिया
₹2400 क्षतिपूर्ति और ₹5 निष्पादन व्यय जमा करने का निर्देश दिया
इसके बावजूद, कई महीने बीत जाने के बाद भी न तो कब्जा हटाया गया और न ही आदेश का पालन कराया गया। उल्टा, उसी भूमि पर अब पक्का मकान पूरी तरह तैयार खड़ा है।

 प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल
इस पूरे मामले में प्रशासन की निष्क्रियता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि:
अगर कोई आम व्यक्ति होता, तो अब तक बुलडोजर कार्रवाई हो चुकी होती
प्रधान होने के कारण मामले को दबाया जा रहा है
अधिकारियों पर दबाव या मिलीभगत की आशंका है
ग्रामीणों के अनुसार, यह मामला केवल अवैध कब्जे का नहीं बल्कि प्रशासनिक निष्पक्षता की परीक्षा बन गया है।

 गांव में आक्रोश, खुलकर हो रहा विरोध
गांव के लोगों में इस घटना को लेकर भारी नाराजगी है। ग्रामीणों का कहना है:
“जब गांव का प्रधान ही कानून की अनदेखी करेगा, तो आम जनता को क्या संदेश जाएगा?”
लोगों ने यह भी कहा कि अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करने को मजबूर होंगे।

 क्या कहता है कानून?
कानूनी प्रावधानों के अनुसार, यदि कोई जनप्रतिनिधि अवैध कब्जे में दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ:
कब्जा हटाने की कार्रवाई
पद से हटाने की प्रक्रिया
आपराधिक मुकदमा दर्ज
जैसे कड़े कदम उठाए जा सकते हैं। लेकिन इस मामले में अब तक ऐसी कोई कार्रवाई न होना पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर रहा है।
ग्रामीणों की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि:
पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जाए
तत्काल अवैध कब्जा हटाया जाए
दोषी पाए जाने पर प्रधान के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए

 बड़ा सवाल: यहां क्यों नहीं चला बुलडोजर?
जहां प्रदेश में अवैध निर्माणों पर तेजी से बुलडोजर कार्रवाई देखने को मिलती है, वहीं इस मामले में अब तक चुप्पी क्यों?
क्या प्रभाव और पद के चलते कार्रवाई रोकी जा रही है, या फिर यह प्रशासनिक लापरवाही का मामला है

रिपोर्टर : दिनेश सिंह अग्निवंशी

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