दोस्तपुर सीएचसी में ‘प्राइवेट राज’ का खुलासा: डॉक्टर गायब

सुल्तानपुर (दोस्तपुर) : सुल्तानपुर जिले का समुदाय स्वास्थ्य केंद्र दोस्तपुर एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में है। सरकार जहां सुबह 8 बजे से अस्पताल संचालन और मरीजों को समय पर इलाज देने के सख्त निर्देश जारी कर रही है, वहीं जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोलती नजर आ रही है।

 सुबह 8 बजे का नियम फेल—डॉक्टर गायब, कुर्सियां खाली
मीडिया की पड़ताल में सामने आया कि सुबह 8 बजे ड्यूटी का समय होने के बावजूद अस्पताल में डॉक्टर नदारद रहते हैं। कई कमरों में ताले लटके मिले, जबकि मरीज घंटों लाइन में इंतजार करते दिखे।
अस्पताल अधीक्षक अजीत यादव खुद मीडिया के फोन के बाद करीब 9:17 बजे अस्पताल पहुंचे, जबकि आम मरीजों को 9:30 से 10 बजे तक डॉक्टरों का इंतजार करना पड़ता है।

 बड़ा सवाल—आदेश कागजों में, जिम्मेदार कौन?
जब सरकार का स्पष्ट निर्देश है, तो दोस्तपुर सीएचसी में उसका पालन क्यों नहीं हो रहा?
क्या CMO की निगरानी कमजोर है या स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह लापरवाह हो चुका है?
 सरकारी अस्पताल में ‘बाहर की दवा’—कमीशन का खेल?
मरीजों ने आरोप लगाया कि डॉक्टर अस्पताल में इलाज करने के बजाय बाहर की दवाइयां लिखते हैं और दोपहर बाद खुलेआम प्राइवेट प्रैक्टिस करते हैं।
इससे गरीब मरीजों की जेब पर सीधा असर पड़ रहा है। सवाल उठता है—क्या सरकारी अस्पताल अब सिर्फ रेफर सेंटर बनकर रह गया है?

डिलीवरी के बाद नाश्ता—दावा बनाम हकीकत
डॉक्टरों ने दावा किया कि डिलीवरी के बाद महिलाओं को नाश्ता दिया जाता है, लेकिन कई मरीजों और परिजनों ने इस दावे को झूठा बताया।
जमीनी स्तर पर सुविधाओं की कमी साफ दिखाई दे रही है।

 कैंटीन ठेकेदारी में बड़ा खेल—सामने आया ‘संरक्षण’ का मामला
अस्पताल की कैंटीन व्यवस्था को लेकर बड़ा खुलासा हुआ।
पहले दावा किया गया कि ठेका आनंद तिवारी के पास है, लेकिन उन्होंने साफ कहा—
“मेरा दोस्तपुर में पिछले 2 साल से कोई टेंडर नहीं है।”
इसके बाद अधीक्षक अजीत यादव का चौंकाने वाला बयान सामने आया। उन्होंने खुले शब्दों में कहा—

 “कैंटीन का ठेका विधायक के आदमी के पास है।”

“कोई कुछ नहीं कर पाएगा।”
यह बयान पूरे मामले को और गंभीर बना देता है और संरक्षण के आरोपों को मजबूत करता है।

 मीडिया के सवालों पर भड़के डॉक्टर
जब मीडिया ने सवाल उठाए, तो जवाब देने के बजाय कई डॉक्टर आक्रामक हो गए। टालमटोल और नाराजगी ने संदेह को और गहरा कर दिया।

CMO और स्वास्थ्य मंत्री से सख्त कार्रवाई की मांग
अब इस पूरे मामले में CMO और प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री से कार्रवाई की मांग तेज हो गई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर जल्द जांच और कार्रवाई नहीं हुई, तो स्वास्थ्य व्यवस्था से जनता का भरोसा पूरी तरह उठ जाएगा।

 जवाब मांगते बड़े सवाल
क्या दोस्तपुर सीएचसी में डॉक्टरों की मनमानी चल रही है?
क्या स्वास्थ्य विभाग की निगरानी पूरी तरह फेल हो चुकी है?
कैंटीन का असली ठेकेदार कौन है?
क्या गरीब मरीजों को मिलने वाली सुविधाएं सिर्फ कागजों में हैं?
CMO और स्वास्थ्य मंत्री आखिर कब जागेंगे?

 निष्कर्ष: सिस्टम पर सवाल, जनता बेहाल
सुल्तानपुर का यह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अब इलाज का केंद्र नहीं, बल्कि अव्यवस्था और भ्रष्टाचार का प्रतीक बनता जा रहा है।
अगर जल्द सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो यह लापरवाही किसी बड़े हादसे को जन्म दे सकती है

रिपोर्टर  : दिनेश सिंह अग्निवंशी

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