बरसावां में तीसरे दिन श्रीमद्भागवत कथा: भक्त प्रहलाद, ध्रुव चरित्र और समुद्र मंथन प्रसंग से भावविभोर हुए श्रद्धालु

सुल्तानपुर : बल्दीराय तहसील क्षेत्र के बरसावां गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में कथा व्यास अयोध्या धाम से पधारे श्याम सारथी जी महाराज ने भक्त प्रहलाद चरित्र, ध्रुव चरित्र, भगवान के चौबीस अवतारों तथा समुद्र मंथन की कथा सुनाकर श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

कथा के दौरान महाराज ने कहा कि यदि ध्रुव मात्र पांच वर्ष की आयु में भगवान को प्राप्त कर सकते हैं, तो मनुष्य सच्चे मन से भक्ति कर कुछ भी प्राप्त कर सकता है। उन्होंने कहा कि सच्ची श्रद्धा और भक्ति से भगवान स्वयं भक्तों के पास चले आते हैं।
विदुर प्रसंग का वर्णन करते हुए उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण की प्रेम भावना को विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने दुर्योधन के महल के छप्पन भोग को त्यागकर विदुर जी की कुटिया में प्रेमपूर्वक केले के छिलकों का भोग स्वीकार किया। इससे स्पष्ट होता है कि भगवान को वैभव नहीं, बल्कि सच्चा प्रेम प्रिय होता है।
इसके साथ ही महाराज ने सृष्टि वर्णन का प्रसंग भी विस्तार से सुनाया, जिसे सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।
कथा के समापन पर भागवत भगवान एवं व्यास पीठ की विधिवत आरती उतारी गई तथा श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरित किया गया।
इस अवसर पर प्रियंका पांडेय, नीशा शुक्ला, माया पांडे, नीलम पांडे, कुलदीप शुक्ल, दरोगा तिवारी, शिवाकांत शुक्ल, उमाकांत, प्रदीप कुमार, आशुतोष, इशांत, दिव्यांश, निशांत, अंश सहित सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे।
अंत में संतोष शुक्ल ने सभी श्रद्धालुओं का स्वागत करते हुए आभार व्यक्त किया।
रिपोर्टर : जगन्नाथ मिश्र

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