मनरेगा में ‘कागजी’ विकास का बड़ा खेल! 5 साल पूरे होते ही पुराने कार्यों पर नई हाजिरी, लाखों के गबन की आशंका

सुल्तानपुर : जनपद के विकासखंड करौंदी कला अंतर्गत ग्राम पंचायत बांगर खुर्द में मनरेगा कार्यों को लेकर एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। आरोप है कि जो कार्य लगभग एक वर्ष पहले ही पूरे हो चुके हैं, उन्हें वर्तमान में चलता हुआ दिखाकर मजदूरों की फर्जी हाजिरी भरकर सरकारी धन का दुरुपयोग किया जा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि पंचायतों का 5 वर्ष का कार्यकाल समाप्ति की ओर बढ़ते ही विकास कार्यों के नाम पर तेजी से धन खर्च किया जा रहा है, जिससे अनियमितताओं और “कागजी विकास” की आशंका और गहरी हो गई है।
मामला 1: पुराने खरंजे पर नई हाजिरी का खेल
ग्रामीणों और मौके से मिली जानकारी के अनुसार जयराम के घर से मिश्रा बस्ती तक खरंजा एवं मिट्टी का कार्य करीब एक साल पहले ही पूरा हो चुका है।
मस्टर रोल संख्या: 114 और 115
दावा: 6 से 13 तारीख के बीच 102 मजदूरों ने कार्य किया
हकीकत: मौके पर कोई नया कार्य होता नहीं दिखा
मामला 2: बंधा निर्माण में भी ‘अदृश्य’ मजदूर
इसी तरह अवनीश के चक के पास बंधा निर्माण कार्य को लेकर भी गंभीर सवाल उठे हैं।
मस्टर रोल संख्या: 116, 119, 120, 122 और 123
दावा: एक सप्ताह में 204 मजदूरों ने कार्य किया

हकीकत: ग्रामीणों के अनुसार कार्य पहले ही पूरा हो चुका है
5 साल पूरे होते ही फंड खर्च पर उठे सवाल
ग्रामीणों का आरोप है कि जैसे-जैसे पंचायतों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, वैसे-वैसे विकास कार्यों में अचानक तेजी आ गई है—
पुराने कार्यों को दोबारा दिखाकर भुगतान निकाला जा रहा है
कागजों में योजनाएं पूरी दिखाकर धन खर्च किया जा रहा है
गुणवत्ता और वास्तविकता की जांच नजरअंदाज की जा रही है
जिम्मेदारों के ‘गोल-मटोल’ जवाब
जब इस पूरे मामले पर जिम्मेदारों से बात की गई, तो उनके बयान भी संदेह को और गहरा करते हैं—
प्रधान प्रतिनिधि: “कार्य हुआ है, चाहे अब हुआ हो या पहले।”
सचिव (अरविंद कुमार): पहले अनभिज्ञता, फिर आंशिक कार्य की बात
BDO (शिव प्रकाश सिंह यादव): जांच कराने की बात कहकर टालते नजर आए

DC मनरेगा: अवकाश का हवाला देकर जवाब देने से बचते दिखे
तकनीकी मिलीभगत पर भी सवाल
मनरेगा में हाजिरी अब ऑनलाइन और फोटो (NMMS ऐप) के माध्यम से दर्ज होती है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि—

 जब मौके पर कार्य नहीं हो रहा, तो मजदूरों की फोटो और उपस्थिति किस आधार पर अपलोड की जा रही है?

क्या यह सब बिना मिलीभगत के संभव है?
ग्रामीणों की मांग: जांच और वसूली
बांगर खुर्द के ग्रामीणों ने उच्चाधिकारियों से मांग की है कि—
पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए
दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो
फर्जी भुगतान की रिकवरी सुनिश्चित की जाए
बड़ा सवाल
क्या प्रशासन इस “कागजी विकास” के खेल का पर्दाफाश करेगा या फिर यह मामला भी रसूख और सांठगांठ के चलते फाइलों में दब जाएगा?
फिलहाल, ग्रामीणों की निगाहें जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं।

संवाददाता : दिनेश सिंह अग्निवंशी

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