मनरेगा में महाघोटाला! कागजों में मजदूर,जमीन पर मशीनों का राज
दोस्तपुर - केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा), जिसका उद्देश्य ग्रामीण गरीबों को रोजगार उपलब्ध कराना है,अब सुलतानपुर जिले के दोस्तपुर विकासखंड में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। सरकार जहां इस योजना के जरिए हर हाथ को काम देने का दावा कर रही है,वहीं जमीनी हकीकत इन दावों की सच्चाई बयां कर रही है।
कागजों में ‘रोजगार’, जमीन पर ‘मशीनराज’
दोस्तपुर ब्लॉक में मस्टर रोल के जरिए बड़े पैमाने पर घोटाले का मामला सामने आया है। मस्टर रोल संख्या 243, 464, 311 और 315 सहित कुल 34 मस्टर रोल में गंभीर गड़बड़ियां पाई गई हैं। रिकॉर्ड के अनुसार 9 से 15 अप्रैल के बीच प्रतिदिन 250 से अधिक मजदूरों की उपस्थिति दर्ज की गई, जबकि 16 अप्रैल को 75 मजदूर दिखाए गए। लेकिन जब मौके पर जाकर जांच की गई, तो वहां न कोई मजदूर मिला और न ही काम करते हुए लोग—बल्कि मशीनों से खुदाई के ताजा निशान और JCB के उपयोग के स्पष्ट प्रमाण मिले। इससे यह साफ होता है कि मजदूरों के नाम पर फर्जी हाजिरी लगाकर सरकारी धन का दुरुपयोग किया जा रहा है।
इन परियोजनाओं में खुला खेल घोटाले का यह खेल मुख्य रूप से निम्न परियोजनाओं में सामने आया है: कैथावा नाला खुदाई (दोस्तपुर-बिरसिंहपुर रोड, करेथा गोसरपुर) काली मां चौरा तक नाला सफाई (दोस्तपुर-मोतिगरपुर मार्ग) सुनावा तालाब खुदाई इन सभी जगहों पर मजदूरों की जगह मशीनों से कार्य कराए जाने के आरोप हैं, जो मनरेगा के नियमों का खुला उल्लंघन है।
नियमों की धज्जियां,जिम्मेदार बेखौफ
मनरेगा के स्पष्ट दिशा-निर्देशों के अनुसार किसी भी कार्य में मशीनों का उपयोग प्रतिबंधित है, ताकि स्थानीय मजदूरों को रोजगार मिल सके। लेकिन दोस्तपुर में इन नियमों को नजरअंदाज करते हुए मशीनों से काम कराया जा रहा है।
आरोप है कि ग्राम प्रधान चंद्रावती देवी और उनके प्रतिनिधि छोटू उपाध्याय द्वारा प्रभाव का इस्तेमाल कर यह पूरा खेल संचालित किया जा रहा है। कम लागत में मशीनों से काम कराकर मजदूरों के नाम पर फर्जी भुगतान निकालना इस घोटाले की जड़ बताया जा रहा है।
प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल
इतने बड़े स्तर पर हो रहे इस फर्जीवाड़े के बावजूद प्रशासन की चुप्पी कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है। खंड विकास अधिकारी (BDO) और तकनीकी सहायकों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। ग्रामीणों का कहना है कि बिना अधिकारियों की मिलीभगत के इतने बड़े पैमाने पर गड़बड़ी संभव नहीं है। ग्रामीणों में आक्रोश,कार्रवाई की मांग तेज स्थानीय ग्रामीणों में भारी रोष है। उनका कहना है: “यह सीधे-सीधे गरीब मजदूरों के हक पर डाका है। सरकार रोजगार देने के लिए योजना चला रही है,और यहां मशीनों से काम कराकर पैसा हड़पा जा रहा है। दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।” ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
क्या होगी कार्रवाई या दब जाएगा मामला?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या जिला प्रशासन इस गंभीर मामले का संज्ञान लेकर ठोस कार्रवाई करेगा? क्या दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होगी, या फिर यह मामला भी जांच के नाम पर ठंडे बस्ते में चला जाएगा? यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो यह न सिर्फ सरकारी धन की बर्बादी होगी, बल्कि उन गरीब मजदूरों के साथ अन्याय भी होगा, जिनके लिए यह योजना शुरू की गई थी। मनरेगा जैसी जनकल्याणकारी योजना में इस तरह की अनियमितताएं न केवल व्यवस्था पर सवाल खड़े करती हैं, बल्कि शासन-प्रशासन की पारदर्शिता और जवाबदेही पर भी गहरा आघात करती हैं। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में कितनी तत्परता दिखाता है और क्या सच में गरीबों को उनका हक मिल पाता है या नहीं
संवाददाता - दिनेश सिंह अग्निवंशी


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