गोसाईसिंगपुर में ‘कागजी मजदूरों’ का खेल उजागर: मनरेगा में मशीनों से काम, जिम्मेदारों पर उठे बड़े सवाल

दोस्तपुर (सुल्तानपुर) : उत्तर प्रदेश सरकार भले ही भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की बात करती हो, लेकिन जमीनी हकीकत कई जगह इसके विपरीत नजर आती है। सुल्तानपुर जिले के दोस्तपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत गोसाईसिंगपुर में मनरेगा योजना के तहत एक बड़े घोटाले के आरोप सामने आए हैं, जहाँ कागजों में मजदूरों की भारी संख्या दिखाई जा रही है, लेकिन मौके पर काम मशीनों से कराया जा रहा है।

 मस्टररोल में मजदूरों की भीड़, जमीन पर सन्नाटा
ग्राम सभा के सेहुआ तालाब से व्रजराज के चक तक नाला खुदाई और सफाई कार्य के लिए सरकारी रिकॉर्ड में प्रतिदिन करीब 150 मजदूरों की तैनाती दर्ज की गई है। इसके लिए लगभग 15 मस्टररोल जारी किए गए हैं।
लेकिन जब मौके पर स्थिति देखी गई, तो एक भी मजदूर काम करता नहीं मिला। केवल JCB मशीन के निशान मौजूद थे, जिससे साफ संकेत मिलता है कि कार्य मशीनों से कराया गया।
ग्रामीणों का आरोप है कि मजदूरों के नाम पर फर्जी उपस्थिति दर्ज कराकर सरकारी धन का दुरुपयोग किया जा रहा है।

 रिकॉर्ड में 79 मजदूर, हकीकत में शून्य
ताजा रिकॉर्ड के अनुसार वर्तमान में भी 79 मजदूर कार्यरत दिखाए गए हैं, जबकि धरातल पर एक भी व्यक्ति मौजूद नहीं मिला।
इससे यह सवाल उठता है कि जब काम पर कोई मजदूर नहीं है, तो उनके नाम पर निकाला जा रहा भुगतान आखिर किसकी जेब में जा रहा है।

 प्रधान-सचिव पर मिलीभगत के आरोप
मामले में प्रधान प्रतिनिधि अंकुर यादव से पूछताछ की गई, लेकिन उन्होंने कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया।
वहीं ग्राम सचिव देवव्रत पाल की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद मामले की निष्पक्ष जांच नहीं कराई जा रही, बल्कि साक्ष्यों को दबाने की कोशिश हो रही है।

 विकासखंड अधिकारियों की जिम्मेदारी पर सवाल
ग्राम पंचायत स्तर पर होने वाले सभी विकास कार्यों की निगरानी की जिम्मेदारी खंड विकास अधिकारी (BDO) की होती है।
BDO के ऊपर मुख्य विकास अधिकारी (CDO) और अंततः जिलाधिकारी (DM) पूरे जिले की जिम्मेदारी संभालते हैं।
ऐसे में सवाल उठता है कि:
क्या BDO को इस पूरे मामले की जानकारी नहीं है?
अगर है, तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
क्या उच्च अधिकारी (CDO/DM) इस मामले में जांच कराएंगे?

 मनरेगा नियमों की खुली अनदेखी
मनरेगा के तहत मशीनों का उपयोग प्रतिबंधित है ताकि स्थानीय लोगों को रोजगार मिल सके।
लेकिन गोसाईसिंगपुर में—
✔ मशीनों से कार्य कराया गया
✔ फर्जी मस्टररोल भरे गए
✔ मजदूरों के नाम पर भुगतान निकाला गया
यह सब नियमों की सीधी अवहेलना है।

 मुख्य सवाल
मजदूरों की अनुपस्थिति में भुगतान किसे मिल रहा है?
क्या मस्टररोल की जांच होगी?
क्या दोषियों से रिकवरी और कार्रवाई होगी?

 ग्रामीणों की मांग
गांव के लोगों ने जिलाधिकारी से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो मनरेगा जैसी योजनाओं का उद्देश्य पूरी तरह खत्म हो जाएगा।

 निष्कर्ष
गोसाईसिंगपुर का यह मामला सिर्फ एक ग्राम पंचायत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे सिस्टम की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करता है। अब निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इस ‘कागजी मजदूर घोटाले’ पर क्या कदम उठाता है—सख्त कार्रवाई या फिर चुप्पी

रिपोर्टर :  दिनेश सिंह अग्निवंशी

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