कागज़ों में जिंदा, ज़मीन पर मृत — बल्दीराय के तालाबों में दफन है भ्रष्टाचार की सच्चाई
सुल्तानपुर - बल्दीराय विकास खंड अंतर्गत ग्राम सभा निशासिन, कस्बा माफियात समेत कई ग्राम सभाओं में बने सरकारी तालाब अब जलस्रोत नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार के खुले सबूत बन चुके हैं। लाखों रुपये खर्च होने के बाद भी तालाब सूखे पड़े हैं—न पानी, न सफाई, सिर्फ बदहाली और दिखावटी काम। आरोप है कि ग्राम प्रधान और सचिव मनरेगा के नाम पर बार-बार “ऊपरी छीलाई” कराकर कागज़ों में काम पूरा दिखाते हैं और सरकारी धन की बंदरबांट कर लेते हैं। हकीकत यह है कि भीषण गर्मी में जहां लोग अपने घरों के बाहर पशु-पक्षियों के लिए पानी रख रहे हैं, वहीं सरकारी तालाब पूरी तरह सूखकर रेत के मैदान बन गए हैं। सरकार का उद्देश्य था कि इन तालाबों में सालभर पानी रहे ताकि गर्मी में किसी भी जीव-जंतु को प्यास से न मरना पड़े, लेकिन ज़मीनी सच्चाई इसके बिल्कुल उलट है। योजनाएं कागज़ों में बह रही हैं और तालाब जमीन पर मर चुके हैं। अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो ये तालाब जल संरक्षण का साधन नहीं,बल्कि भ्रष्ट सिस्टम की स्थायी पहचान बन जाएंगे—जहां पानी नहीं, सिर्फ घोटालों की गूंज सुनाई देती है।
रिपोर्टर - जगन्नाथ मिश्र

No Previous Comments found.