विरोधियों को मिला करारा जवाब, क्षत्रिय समाज के गौरव महाराणा प्रताप की प्रतिमा पर आखिर झुकना पड़ा शासन

सुल्तानपुर :  कादीपुर में महाराणा प्रताप की प्रतिमा स्थापना को लेकर चले लंबे विवाद, विरोध और राजनीतिक बयानबाजी के बीच आखिरकार उत्तर प्रदेश शासन को मंजूरी देनी ही पड़ी। शासन के आदेश के बाद अब विरोध करने वाले खेमे में सन्नाटा पसरा हुआ है, जबकि क्षत्रिय समाज और समर्थकों में भारी उत्साह देखा जा रहा है। पूरे क्षेत्र में इसे क्षत्रिय समाज के सम्मान, स्वाभिमान और एकजुटता की बड़ी जीत माना जा रहा है। वहीं भारतीय जनता पार्टी के कादीपुर विधायक राजेश गौतम की राजनीतिक ताकत और प्रभाव की चर्चा तेज हो गई है।
संस्कृति अनुभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार ग्राम मालापुर जगदीशपुर, तहसील कादीपुर स्थित गाटा संख्या 507ख/0.0340 हेक्टेयर भूमि पर वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की प्रतिमा स्थापित की जाएगी। नगर पंचायत कादीपुर द्वारा शासन को भेजे गए प्रस्ताव और विधायक राजेश गौतम के हस्तक्षेप के बाद मामला तेजी से आगे बढ़ा। जिलाधिकारी की सकारात्मक आख्या और अखिल भारतीय क्षत्रिय कल्याण परिषद द्वारा पूरा खर्च उठाने की सहमति के आधार पर शासन ने मंजूरी जारी कर दी।
महाराणा प्रताप केवल एक नाम नहीं बल्कि शौर्य, त्याग, राष्ट्रभक्ति और स्वाभिमान की पहचान हैं। ऐसे महान योद्धा की प्रतिमा स्थापना का विरोध होने पर समाज में लगातार नाराजगी देखी जा रही थी। समर्थकों का कहना है कि विरोध करने वाले लोग समाज की भावनाओं को समझने में पूरी तरह असफल रहे। लेकिन अब शासन के फैसले ने साफ कर दिया कि जनता की आवाज और समाज की एकता के आगे विरोध की राजनीति टिक नहीं सकी।
अखिल भारतीय क्षत्रिय कल्याण परिषद के विधि प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष अरविंद सिंह राजा ने कहा कि यह केवल प्रतिमा स्थापना की अनुमति नहीं बल्कि क्षत्रिय समाज के सम्मान की ऐतिहासिक जीत है। उन्होंने विधायक राजेश गौतम का आभार जताते हुए कहा कि उनके मजबूत प्रयासों और लगातार पैरवी के कारण ही शासन स्तर पर इतनी जल्दी मंजूरी मिल सकी। उन्होंने बिना नाम लिए विरोध करने वालों पर निशाना साधते हुए कहा कि अब समाज सब देख चुका है कि कौन महाराणा प्रताप के सम्मान के साथ खड़ा था और कौन राजनीति के कारण विरोध कर रहा था।
राजनीतिक जानकारों की मानें तो इस पूरे घटनाक्रम ने कादीपुर की राजनीति में बड़ा संदेश दिया है। शासन का फैसला आने के बाद भाजपा समर्थकों और क्षत्रिय समाज में खुशी की लहर दौड़ गई। कई स्थानों पर मिठाइयां बांटी गईं और इसे समाज के सम्मान की जीत बताया गया। समर्थकों का कहना है कि विरोधियों को आखिरकार करारा जवाब मिल ही गया और अब यह साफ हो गया कि समाज के सम्मान से जुड़े मुद्दों पर जनता किसी भी तरह की राजनीति बर्दाश्त नहीं करेगी।
शासन ने आदेश की प्रति निदेशक संस्कृति निदेशालय, अधिशासी अधिकारी नगर पंचायत कादीपुर और अखिल भारतीय क्षत्रिय कल्याण परिषद लखनऊ को भी भेज दी है। जिलाधिकारी सुल्तानपुर को अग्रेतर कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। अब जल्द ही प्रतिमा स्थापना की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना जताई जा रही है, जिसका इंतजार पूरे क्षेत्र के लोग लंबे समय से कर रहे थे

रिपोर्टर : दिनेश सिंह अग्निवंशी

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