10 लाख की आंगनबाड़ी योजना बनी भ्रष्टाचार का स्मारक, 10 साल बाद भी अधूरा भवन — आखिर जिम्मेदार कौन?
सुल्तानपुर : विकासखंड मोतिगरपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत भदिला खानीपुर में वर्ष 2016-17 में शुरू हुई आंगनबाड़ी केंद्र निर्माण योजना अब सरकारी लापरवाही, भ्रष्टाचार और जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यशैली पर बड़ा सवाल बन चुकी है। करीब 10 लाख रुपये की लागत से बनने वाला यह भवन आज तक पूरा नहीं हो पाया और अब इसकी हालत इतनी खराब हो चुकी है कि यह किसी भी समय हादसे का कारण बन सकता है। अधूरी दीवारें, टूटी छत और जर्जर ढांचा यह साबित करने के लिए काफी है कि सरकारी धन का सही उपयोग नहीं हुआ।
ग्रामीणों के अनुसार, निर्माण कार्य शुरू होने के कुछ समय बाद ही काम अचानक बंद कर दिया गया। धीरे-धीरे मजदूर और ठेकेदार दोनों गायब हो गए, लेकिन विभागीय अधिकारियों ने कभी मौके पर पहुंचकर निरीक्षण तक नहीं किया। गांव वालों का आरोप है कि निर्माण के नाम पर सरकारी धन निकाल लिया गया और फाइलों में कार्य पूर्ण दिखाने की तैयारी कर ली गई, जबकि हकीकत में भवन आज भी अधूरा पड़ा है।
ग्रामीणों का कहना है कि आखिर बिना निर्माण पूरा हुए भुगतान कैसे हो गया? किस अधिकारी ने कार्य की गुणवत्ता जांची? किसकी संस्तुति पर धन जारी हुआ? यदि कार्य अधूरा था तो संबंधित अधिकारियों ने कार्रवाई क्यों नहीं की? इन तमाम सवालों का जवाब आज तक किसी जिम्मेदार व्यक्ति ने नहीं दिया। गांव के लोगों का आरोप है कि उस समय के ग्राम प्रधान, विकासखंड अधिकारी, ब्लॉक प्रमुख, बाल विकास विभाग और विकासखंड स्तर के अधिकारियों ने मिलकर मामले को दबाए रखा।
यह पूरा मामला विधानसभा 189 जयसिंहपुर क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। वर्ष 2016-17 में क्षेत्र से समाजवादी पार्टी के विधायक अरुण वर्मा थे। ग्रामीणों का कहना है कि उस समय निर्माण कार्य शुरू तो हुआ लेकिन निगरानी के अभाव में अधूरा रह गया। इसके बाद क्षेत्र में भारतीय जनता पार्टी के विधायक सीताराम वर्मा बने, लेकिन उनके कार्यकाल में भी इस अधूरे भवन की ओर कोई गंभीर ध्यान नहीं दिया गया। अब वर्तमान में क्षेत्र का प्रतिनिधित्व भारतीय जनता पार्टी के विधायक राज प्रसाद उपाध्याय कर रहे हैं, लेकिन आज भी गांव का यह अधूरा आंगनबाड़ी केंद्र जनता के बीच बड़ा मुद्दा बना हुआ है।
ग्रामीणों का कहना है कि वर्तमान विधायक राज प्रसाद उपाध्याय को इस मामले को गंभीरता से लेते हुए मौके का निरीक्षण करना चाहिए और संबंधित विभागीय अधिकारियों से जवाब मांगना चाहिए। लोगों का कहना है कि यदि विधायक चाहें तो वर्षों से अधूरा पड़ा यह निर्माण कार्य दोबारा शुरू कराया जा सकता है। ग्रामीणों ने मांग की है कि विधायक स्वयं गांव पहुंचकर जमीनी स्थिति देखें और यह पता लगाएं कि आखिर लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद भवन अधूरा क्यों पड़ा है।
ग्रामीणों का कहना है कि इस पूरे मामले में विकासखंड अधिकारी और उस समय के ब्लॉक प्रमुख की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। आखिर इतने वर्षों तक अधूरा भवन खड़ा रहा और किसी अधिकारी ने इसकी सुध क्यों नहीं ली? यदि समय-समय पर निरीक्षण होता तो आज यह भवन जर्जर हालत में नहीं होता। लोगों का आरोप है कि अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की अनदेखी के कारण ही सरकारी योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई।
गांव के बुजुर्गों का कहना है कि यह भवन बच्चों और महिलाओं की सुविधा के लिए बनाया जा रहा था, लेकिन आज यह सरकारी भ्रष्टाचार की निशानी बनकर खड़ा है। आंगनबाड़ी केंद्र न बनने से गांव की महिलाओं और छोटे बच्चों को योजनाओं का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है। पोषण कार्यक्रम, टीकाकरण, गर्भवती महिलाओं की देखभाल और बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा जैसी योजनाएं प्रभावित हो रही हैं।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि सरकारें बदलती रहीं, विधायक बदलते रहे, अधिकारी बदलते रहे, लेकिन किसी ने भी इस अधूरे भवन की सुध नहीं ली। अब गांव के लोगों में भारी नाराजगी है। उनका कहना है कि यदि लाखों और करोड़ों की योजनाओं का यही हाल रहेगा तो ग्रामीण क्षेत्रों का विकास केवल कागजों तक सीमित रह जाएगा।
ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश, जिलाधिकारी सुलतानपुर और संबंधित विभाग से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। साथ ही उस समय के जिम्मेदार अधिकारियों, कर्मचारियों, विकासखंड अधिकारी, ब्लॉक प्रमुख और निर्माण कार्य से जुड़े लोगों की भूमिका की जांच कर कठोर कार्रवाई की मांग उठाई है। गांव वालों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द निर्माण कार्य शुरू नहीं कराया गया तो ग्रामीण आंदोलन करने को मजबूर होंगे
रिपोर्टर : दिनेश सिंह अग्निवंशी


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