“सरकारी जमीन पर सत्ता का कब्जा?” सुल्तानपुर में चारागाह की भूमि पर प्रधान ने खड़ा किया आलीशान महल, प्रशासन मौन
सुल्तानपुर : सुल्तानपुर जनपद की कादीपुर तहसील अंतर्गत ग्राम भेलारा में ग्राम सभा की चारागाह भूमि पर कथित अवैध कब्जे का मामला अब पूरे इलाके में राजनीतिक और प्रशासनिक बहस का बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। गांव के प्रधान बलिराम राजभर पर ग्रामीणों ने बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। आरोप है कि ग्राम सभा की सरकारी चारागाह भूमि पर कब्जा कर लगभग 50 लाख रुपये की लागत से भव्य पक्का मकान खड़ा कर लिया गया, जबकि प्रशासन और जिम्मेदार अधिकारी सब कुछ जानते हुए भी चुप्पी साधे बैठे रहे।
ग्रामीणों के मुताबिक गाटा संख्या 1772/0.025 हेक्टेयर भूमि राजस्व अभिलेखों में स्पष्ट रूप से ग्राम सभा की चारागाह भूमि के रूप में दर्ज है। यह जमीन गांव की सार्वजनिक संपत्ति मानी जाती है, जिसका उपयोग वर्षों से पशुओं के चरने और ग्रामीण हितों के लिए होता रहा है। लेकिन आरोप है कि सत्ता, रसूख और राजनीतिक प्रभाव के दम पर इस सरकारी जमीन पर कब्जा कर धीरे-धीरे पक्का निर्माण कराया गया और अब वहां आलीशान मकान पूरी तरह तैयार हो चुका है।
गांव में सबसे ज्यादा चर्चा इस बात को लेकर हो रही है कि आखिर इतने बड़े निर्माण कार्य के दौरान राजस्व विभाग, लेखपाल, कानूनगो, तहसील प्रशासन और स्थानीय अधिकारी आखिर क्या कर रहे थे? ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी जमीन पर एक ईंट रखने तक की जानकारी प्रशासन को होती है, फिर करोड़ों की जमीन पर लाखों का निर्माण कैसे होता रहा और किसी अधिकारी की नजर तक नहीं पड़ी?
मामले को और गंभीर इसलिए माना जा रहा है क्योंकि तहसीलदार न्यायालय पहले ही कब्जे को अवैध मान चुका है। वाद संख्या 5036/2023 में 22 जुलाई 2024 को पारित आदेश में न्यायालय ने संबंधित भूमि को ग्राम सभा की संपत्ति घोषित करते हुए कब्जा हटाने के स्पष्ट निर्देश दिए थे। न्यायालय ने कब्जाधारी को बेदखल करने, ₹2400 क्षतिपूर्ति और ₹5 निष्पादन व्यय जमा करने का आदेश भी दिया था। लेकिन हैरानी की बात यह है कि महीनों बाद भी न कब्जा हटाया गया और न ही आदेश का पालन कराया गया। उल्टा, विवादित जमीन पर अब भव्य पक्का मकान पूरी तरह खड़ा दिखाई दे रहा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि यदि यही निर्माण किसी गरीब किसान, मजदूर या आम ग्रामीण ने किया होता, तो प्रशासन अब तक बुलडोजर चलाकर पूरी कार्रवाई कर चुका होता। लेकिन प्रधान होने के कारण मामला दबाया जा रहा है। गांव में खुलकर चर्चा है कि आखिर किसके संरक्षण में सरकारी जमीन पर इतना बड़ा निर्माण संभव हुआ? क्या स्थानीय प्रशासन पर राजनीतिक दबाव था या फिर अधिकारियों की मिलीभगत से यह पूरा खेल खेला गया?
अब ग्रामीण सीधे तौर पर उप जिलाधिकारी कादीपुर की भूमिका पर भी सवाल उठा रहे हैं। लोगों का कहना है कि न्यायालय का आदेश आने के बाद भी कार्रवाई न होना प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि गंभीर सवाल पैदा करता है। ग्रामीण पूछ रहे हैं कि आखिर यूपी जिला अधिकारी कार्यालय ने आदेश का पालन कराने में इतनी ढिलाई क्यों बरती? क्या सरकारी जमीन पर कब्जा करने वालों को संरक्षण दिया जा रहा है?
इतना ही नहीं, अब जिलाधिकारी कार्यालय की कार्यशैली पर भी ग्रामीणों ने नाराजगी जताई है। लोगों का कहना है कि जिला प्रशासन चाहे तो कुछ घंटों में सरकारी जमीन खाली हो सकती है, लेकिन यहां महीनों तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। इससे लोगों के बीच यह संदेश जा रहा है कि रसूखदार लोगों के खिलाफ प्रशासन कार्रवाई करने से डरता है।
ग्रामीणों में इस घटना को लेकर भारी आक्रोश है। गांव के लोगों का कहना है कि “जब गांव का प्रधान ही सरकारी जमीन पर कब्जा करेगा, तो आम जनता कानून का सम्मान क्यों करेगी?” लोगों ने आरोप लगाया कि ग्राम सभा की संपत्तियों को बचाने की जिम्मेदारी जिन लोगों पर है, वही लोग सरकारी जमीन पर कब्जे को संरक्षण देते दिखाई दे रहे हैं। इससे गांव में कानून व्यवस्था और प्रशासन की साख दोनों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो तहसील मुख्यालय से लेकर जिला मुख्यालय तक बड़ा आंदोलन किया जाएगा। लोगों का कहना है कि अब यह लड़ाई केवल एक जमीन की नहीं, बल्कि सरकारी संपत्तियों को बचाने और भ्रष्ट व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाने की बन चुकी है।
मामले को लेकर ग्रामीणों ने उत्तर प्रदेश सरकार, जिलाधिकारी सुल्तानपुर, उप जिलाधिकारी कादीपुर और पंचायती राज विभाग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। लोगों ने पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर से भी पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने की मांग उठाई है।
अब पूरे क्षेत्र की निगाह प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है। सवाल यही है कि क्या सरकारी जमीन पर हुए कथित कब्जे के खिलाफ वास्तव में कार्रवाई होगी, या फिर मामला सत्ता, रसूख और राजनीतिक दबाव के आगे दबा दिया जाएगा।
रिपोर्टर : दिनेश सिंह अग्निवंशी


No Previous Comments found.