प्रशासनिक जांच में सच आया सामने: गाटा संख्या 1183 पर फर्जीवाड़े के आरोप खारिज, सरकारी रिकॉर्ड सुरक्षित
सुल्तानपुर : प्राणनाथपुर बछेड़िया स्थित गाटा संख्या 1183 को लेकर पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर फैलाए जा रहे फर्जीवाड़े, अवैध पट्टे और सरकारी जमीन पर कब्जे के आरोपों पर प्रशासनिक जांच के बाद बड़ा खुलासा हुआ है। राजस्व विभाग की उच्च स्तरीय जांच और मूल अभिलेखों के सत्यापन में यह साफ हो गया है कि सरकारी रिकॉर्ड पूरी तरह सुरक्षित हैं तथा हेरफेर के लगाए गए आरोप निराधार पाए गए हैं।
दरअसल, कुछ लोगों द्वारा यह प्रचारित किया जा रहा था कि पीडब्ल्यूडी सड़क के रूप में दर्ज भूमि पर फर्जी पट्टे के माध्यम से निजी स्वामित्व स्थापित करने का प्रयास किया गया है। इस दौरान रामपाल वर्मा के जन्म वर्ष 1948 और कथित पट्टे के वर्ष 1946 का हवाला देते हुए “जन्म से पहले पट्टा” जैसी बातें सोशल मीडिया पर वायरल की गईं। हालांकि प्रशासनिक अधिकारियों ने जांच के बाद स्पष्ट किया कि यह मामला तकनीकी तथ्यों की अधूरी जानकारी के कारण विवाद का रूप ले बैठा।
राजस्व अधिकारियों के अनुसार संबंधित भूमि पूर्वजों के समय से वैध कानूनी प्रक्रिया के तहत हस्तांतरित होती चली आ रही है। पुराने अभिलेखों, खतौनी और अन्य रिकॉर्ड के मिलान में किसी प्रकार की कूटरचना या फर्जी प्रविष्टि नहीं मिली। जिसे फर्जी पट्टा बताया जा रहा था, वह वास्तव में पैतृक अधिकारों से जुड़ी वैधानिक प्रक्रिया का हिस्सा निकला।
उत्तर प्रदेश चकबंदी अधिनियम 1953 की धारा 49 को लेकर उठ रहे सवालों पर भी विभाग ने स्थिति स्पष्ट की। अधिकारियों के मुताबिक चकबंदी प्रक्रिया के दौरान भूमि का वर्गीकरण और सीमांकन नियमानुसार किया गया था। पीडब्ल्यूडी सड़क और निजी स्वामित्व वाली भूमि की सीमाएं पहले से स्पष्ट हैं तथा कहीं भी अतिक्रमण या ओवरलैपिंग की स्थिति नहीं पाई गई। सार्वजनिक मार्ग पूरी तरह सुरक्षित और आम लोगों के आवागमन के लिए खुला है।
प्रशासन ने यह भी कहा कि राजस्व अभिलेखों के डिजिटलाइजेशन के बाद अब किसी भी रिकॉर्ड में मनमाने तरीके से बदलाव करना संभव नहीं है। खतौनी और आकार पत्र की सभी ऑनलाइन प्रविष्टियां डिजिटल सत्यापन और उच्च अधिकारियों की मंजूरी के बाद ही अपडेट होती हैं। ऐसे में विभागीय मिलीभगत या रिकॉर्ड बदलने के आरोप तकनीकी रूप से भी असंभव बताए गए हैं।
हालांकि जांच के दौरान एक नया विवाद परिवार रजिस्टर की प्रविष्टियों को लेकर सामने आया है। बताया जा रहा है कि रामपाल वर्मा के पुत्र रविंद्र वर्मा की उम्र परिवार रजिस्टर और पहचान पत्रों में लगभग 11 वर्ष अलग-अलग दर्ज है। इसके अतिरिक्त परिवार रजिस्टर में दो बेटियों के नाम दर्ज होने को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि परिवार रजिस्टर को आधार माना जाए तो उसमें दर्ज जानकारियों और अन्य सरकारी दस्तावेजों के बीच विरोधाभास की अलग से जांच होनी चाहिए।
फिलहाल प्रशासनिक जांच में यह स्पष्ट हो चुका है कि गाटा संख्या 1183 और पीडब्ल्यूडी भूमि को लेकर सरकारी रिकॉर्ड में किसी प्रकार की हेराफेरी नहीं हुई है। अब लोगों की निगाहें परिवार रजिस्टर से जुड़ी तकनीकी विसंगतियों की संभावित जांच पर टिकी हुई हैं
रिपोर्टर : दिनेश सिंह अग्निवंशी

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