क्या हो रहा है सरकारी पैसे का गलत प्रयोग? 3 करोड़ की लागत से बन रहा कस्तूरबा बालिका विद्यालय छात्रावास 10 साल बाद भी अधूरा

सुल्तानपुर - दोस्तपुर सरकार द्वारा बालिकाओं को बेहतर शिक्षा और सुरक्षित आवासीय सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लगभग 3 करोड़ रुपये की लागत से शुरू किया गया कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय छात्रावास निर्माण कार्य करीब 10 वर्षों बाद भी पूरा नहीं हो सका है। वर्ष 2016 में शुरू हुई यह परियोजना आज भी अधूरी पड़ी हुई है,जिससे क्षेत्रीय लोगों में नाराजगी के साथ-साथ सरकारी धन के उपयोग को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद छात्रावास भवन आज तक उपयोग के लिए तैयार नहीं हो सका। जिस परियोजना का लाभ छात्राओं को वर्षों पहले मिल जाना चाहिए था, वह अब केवल एक अधूरा ढांचा बनकर खड़ी है। लोगों का आरोप है कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता संबंधी मानकों की अनदेखी की गई है तथा भवन निर्माण में पीली ईंट, पुरानी ईंट और अधिक मात्रा में बालू का उपयोग किया गया है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य निर्धारित समय सीमा में पूरा नहीं हुआ और गुणवत्ता को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं, तो यह जांच का विषय है कि कहीं सरकारी धन का दुरुपयोग तो नहीं हुआ। क्षेत्रीय लोगों का मानना है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद धरातल पर अपेक्षित परिणाम दिखाई नहीं दे रहे हैं। स्थानीय नागरिकों ने शिक्षा विभाग के संबंधित अधिकारियों, कार्यदायी संस्था और निर्माण कार्य से जुड़े ठेकेदार की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि पूरे प्रकरण की तकनीकी और वित्तीय जांच कराई जाए तथा यह पता लगाया जाए कि निर्माण कार्य में देरी और गुणवत्ता संबंधी शिकायतों के पीछे क्या कारण हैं। हालांकि सरकारी धन के गलत प्रयोग, अनियमितता या किसी प्रकार की मिलीभगत के आरोपों की अभी तक किसी सक्षम जांच एजेंसी या प्रशासनिक अधिकारी द्वारा आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन क्षेत्रीय जनता का कहना है कि इतने वर्षों तक परियोजना का अधूरा रहना कई सवालों को जन्म देता है, जिनका जवाब मिलना जरूरी है। लगभग 3 करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद छात्रावास अब तक अधूरा क्यों है? निर्माण कार्य की निगरानी करने वाले अधिकारी क्या कर रहे थे? गुणवत्ता संबंधी शिकायतों की जांच क्यों नहीं हुई? क्या सरकारी धन का सही उपयोग हुआ या इसकी निष्पक्ष जांच की आवश्यकता है? क्षेत्रीय लोगों ने जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी और बेसिक शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से मांग की है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, दोषियों की जवाबदेही तय की जाए और छात्राओं के हित में अधूरे निर्माण कार्य को जल्द से जल्द पूरा कराया जाए

संवाददाता - दिनेश सिंह अग्निवंशी

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