सुल्तानपुर दोस्तपुर में अतिक्रमण और अव्यवस्थित बाजार बना जाम का कारण, सड़क तक फैली दुकानें बढ़ा रहीं परेशानी
दोस्तपुर : नगर पंचायत दोस्तपुर में वर्षों से चली आ रही जाम की समस्या अब गंभीर रूप ले चुकी है। मुख्य बाजार, घंटाघर से शाही पुल तक का मार्ग अतिक्रमण, सड़क तक फैली दुकानों और अव्यवस्थित बाजार व्यवस्था के कारण दिनभर जाम की चपेट में रहता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई व्यापारियों ने अपनी दुकानों का सामान नालियों के ऊपर और सड़क तक फैला रखा है, जिससे सड़क की चौड़ाई लगातार कम होती जा रही है और आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
बाजार क्षेत्र में कई स्थानों पर स्थायी दुकानों के सामने अस्थायी जूस की दुकानें, चाऊमीन के ठेले और अन्य फास्ट फूड की दुकानें लग जाती हैं। इससे सड़क का बड़ा हिस्सा घिर जाता है। ग्राहकों की भीड़ और सड़क किनारे खड़े वाहनों के कारण हालात और भी बदतर हो जाते हैं। कई जगहों पर नालियां पूरी तरह अतिक्रमण की चपेट में हैं और उन पर तक दुकानें संचालित हो रही हैं। नतीजा यह है कि सड़क पर वाहनों के आवागमन के लिए पर्याप्त जगह नहीं बचती और थोड़े से दबाव में ही लंबा जाम लग जाता है।
जाम की समस्या का सबसे अधिक खामियाजा मरीजों, स्कूली बच्चों और आम नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है। कई बार मरीजों को लेकर जा रही एम्बुलेंस घंटों जाम में फंस जाती हैं, जिससे समय पर उपचार मिलने में देरी हो जाती है। स्कूल वैन, दोपहिया और चारपहिया वाहन चालक भी रोजाना इस समस्या से जूझने को मजबूर हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि किसी दिन बड़ी आपातकालीन स्थिति उत्पन्न हो जाए तो हालात और भी गंभीर हो सकते हैं।
नगरवासियों का आरोप है कि घंटाघर से शाही पुल तक सड़क के दोनों किनारों पर लगातार बढ़ते अतिक्रमण के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है। समय-समय पर अभियान चलने की बातें तो होती हैं, लेकिन कुछ दिनों बाद फिर वही स्थिति बन जाती है। लोगों का कहना है कि सड़क जनता के आवागमन के लिए होती है, लेकिन कुछ व्यापारियों द्वारा सड़क तक दुकानें फैलाने से आम लोगों का चलना तक मुश्किल हो गया है।
स्थानीय नागरिकों ने नगर पंचायत, प्रशासन और पुलिस विभाग से मांग की है कि पूरे बाजार क्षेत्र का सर्वे कर सड़क और नालियों पर किए गए अतिक्रमण को हटाया जाए। साथ ही अस्थायी ठेलों और दुकानों के लिए अलग स्थान निर्धारित किया जाए तथा बाजार क्षेत्र में नियमित निगरानी की व्यवस्था बनाई जाए, ताकि दोबारा अतिक्रमण न हो सके।
अब जनता का सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर नगर पंचायत प्रशासन और संबंधित विभाग इस गंभीर समस्या पर कब ठोस कार्रवाई करेंगे? क्या घंटाघर से शाही पुल तक अतिक्रमण हटाकर सड़क को आम जनता के लिए मुक्त कराया जाएगा, या फिर दोस्तपुर के लोग आने वाले वर्षों में भी इसी जाम, अव्यवस्था और परेशानी का सामना करते रहेंगे? जनता को अब आश्वासन नहीं, बल्कि जमीन पर दिखाई देने वाली कार्रवाई का इंतजार है।
संवाददाता : दिनेश सिंह अग्निवंशी
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