धर्मतारा तालाब खुदाई में महीनों से खेल? प्रधान सुषमा, सचिव देवव्रत पाल समेत पूरे विभाग पर उठे सवाल
दोस्तपुर, सुल्तानपुर : सुल्तानपुर जिले के दोस्तपुर क्षेत्र अंतर्गत गोसाईसिंहपुर स्थित धर्मतारा तालाब की खुदाई को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि तालाब खुदाई के नाम पर कई महीनों से खेल चल रहा है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों और पंचायत स्तर के कारिंदों की ओर से अब तक कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया। मामले में ग्राम प्रधान सुषमा और पंचायत सचिव देवव्रत पाल की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो मनरेगा कार्यों में बड़े स्तर पर अनियमितता और सरकारी धन के दुरुपयोग की परतें खुल सकती हैं।
जानकारी के अनुसार धर्मतारा तालाब की खुदाई कार्य में 30 मजदूरों को लगाए जाने की बात कही जा रही है। साथ ही मास्टर रोल संख्या 2404, 2405 और 2406 के जरिए काम संचालित होने का विवरण सामने आया है। आरोप है कि कागजों में मजदूरों की संख्या बढ़ाकर और कार्य की प्रगति को वास्तविकता से अधिक दिखाकर भुगतान की तैयारी की जा रही है, जबकि मौके पर स्थिति इससे अलग हो सकती है। यही वजह है कि अब ग्रामीण खुलकर सवाल उठा रहे हैं कि आखिर यदि कई महीनों से इतने मजदूर काम कर रहे थे तो कार्यस्थल पर उसकी स्पष्ट तस्वीर क्यों नहीं दिख रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि अगर तालाब खुदाई में वास्तव में 30 मजदूर कई महीनों से कार्यरत रहे हैं, तो उनकी उपस्थिति पंजिका, जॉब कार्ड, मस्टर रोल, कार्यस्थल की फोटो, माप पुस्तिका और भुगतान का रिकॉर्ड सार्वजनिक किया जाना चाहिए। उनका आरोप है कि यदि कागजों में दर्ज मजदूरों की संख्या, कार्य दिवस और भुगतान का ब्योरा मौके की वास्तविक स्थिति से मेल नहीं खाता, तो यह मामला सीधे-सीधे सरकारी धन के दुरुपयोग, फर्जीवाड़े और मनरेगा कार्यों में अनियमितता का माना जाएगा।
इस पूरे मामले में जिम्मेदारी केवल ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव तक सीमित नहीं मानी जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि मनरेगा के तहत होने वाले कार्यों में कई स्तरों पर निगरानी और सत्यापन की व्यवस्था होती है, इसलिए यदि धर्मतारा तालाब खुदाई में कई महीनों से गड़बड़ी चल रही है तो इसकी जवाबदेही पूरे विभागीय तंत्र पर बनती है। पंचायत स्तर पर जहां ग्राम प्रधान सुषमा और पंचायत सचिव देवव्रत पाल कार्य संचालन और अभिलेखों के लिए जिम्मेदार माने जाते हैं, वहीं रोजगार सेवक मजदूरों की उपस्थिति, जॉब कार्ड और कार्यस्थल से जुड़े रिकार्ड का रखरखाव करता है। इसके अलावा तकनीकी सहायक कार्य की माप, प्रगति और गुणवत्ता का सत्यापन करता है।
मामला यहीं तक सीमित नहीं है। ब्लॉक स्तर पर खंड विकास अधिकारी (बीडीओ), एडीओ पंचायत, और मनरेगा विभाग से जुड़े अधिकारी कार्यों की निगरानी, सत्यापन और भुगतान प्रक्रिया पर नजर रखते हैं। ऐसे में यदि कई महीनों से कथित अनियमितता जारी रही और किसी स्तर पर इसे रोका नहीं गया, तो सवाल केवल ग्राम पंचायत तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि ब्लॉक प्रशासन और मनरेगा विभाग की कार्यप्रणाली भी कठघरे में आएगी। ग्रामीणों का कहना है कि यदि कार्य की माप, मजदूरों की उपस्थिति और भुगतान संबंधी दस्तावेज समय पर सत्यापित किए गए होते, तो स्थिति इतनी संदिग्ध नहीं बनती।
ग्रामीणों ने मांग की है कि धर्मतारा तालाब खुदाई कार्य की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और मास्टर रोल संख्या 2404, 2405 और 2406 की बिंदुवार पड़ताल हो। साथ ही यह भी जांच हो कि जिन मजदूरों के नाम पर भुगतान की प्रक्रिया चलाई गई, वे वास्तव में कार्यस्थल पर मौजूद थे या नहीं। ग्रामीण चाहते हैं कि मजदूरों की वास्तविक उपस्थिति, जॉब कार्ड, भुगतान रजिस्टर, बैंक ट्रांजैक्शन, कार्यस्थल की फोटो और तकनीकी माप का मिलान कराया जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके।
ग्रामीणों का साफ कहना है कि यदि जांच में गड़बड़ी मिलती है तो ग्राम प्रधान, पंचायत सचिव, रोजगार सेवक, तकनीकी सहायक, ब्लॉक स्तर के अधिकारी और मनरेगा विभाग के जिम्मेदार कर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उनका आरोप है कि मनरेगा जैसी जनहितकारी योजना का उद्देश्य गांवों में रोजगार उपलब्ध कराना और विकास कार्य कराना है, लेकिन यदि उसी योजना में कागजी खेल और फर्जी भुगतान का आरोप सामने आए, तो यह न केवल सरकारी धन की बर्बादी है बल्कि गरीब मजदूरों के हक पर भी सीधा हमला है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है। यदि समय रहते धर्मतारा तालाब खुदाई की निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो यह मामला केवल एक तालाब तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि मनरेगा कार्यों की पारदर्शिता और सरकारी योजनाओं की विश्वसनीयता पर भी बड़ा सवाल बन सकता है
रिपोर्टर : दिनेश सिंह अग्निवंशी
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