गौ सेवा में ग्रामीणों का रहा योगदान

दोस्तपुर, सुल्तानपुर :  ग्राम उदयपुर सकरवारी की निषाद बस्ती में बरसात के मौसम को देखते हुए गौवंश की सुरक्षा के लिए वर्षों पुरानी सामूहिक श्रमदान की परंपरा एक बार फिर देखने को मिली। गांव के लगभग 15 से 20 ग्रामीण एकजुट होकर पारंपरिक तरीके से छप्पर छाने के कार्य में जुटे। सभी ने मिलकर गौ माता के लिए सुरक्षित आश्रय तैयार किया, ताकि बारिश और खराब मौसम से उन्हें बचाया जा सके।

ग्रामीणों ने बताया कि पहले गांवों में जब किसी के घर छप्पर छाना होता था या पशुओं के लिए छाया बनानी होती थी, तो लोग बिना किसी स्वार्थ के एक-दूसरे की मदद के लिए पहुंच जाते थे। यही परंपरा आज भी निषाद बस्ती में कायम है। आधुनिक संसाधनों के दौर में भी ग्रामीण अपने पूर्वजों की इस सामाजिक विरासत को संजोए हुए हैं।

छप्पर तैयार करने के दौरान ग्रामीणों ने बांस, बल्ली, फूस और अन्य पारंपरिक सामग्री का उपयोग किया। सभी ने मिलकर श्रमदान किया और कुछ ही समय में गौवंश के लिए मजबूत एवं सुरक्षित छप्पर तैयार कर दिया। कार्य के दौरान गांव में सहयोग, भाईचारे और उत्साह का माहौल देखने को मिला।

बुजुर्गों का कहना है कि ऐसी परंपराएं केवल निर्माण कार्य तक सीमित नहीं हैं, बल्कि गांव की सामाजिक एकता, आपसी प्रेम और सहयोग की भावना को भी मजबूत करती हैं। उनका मानना है कि नई पीढ़ी को भी इन परंपराओं से सीख लेकर समाज और संस्कृति से जुड़े रहना चाहिए।

ग्रामीणों ने कहा कि गौसेवा भारतीय संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा है और बरसात के दिनों में गौवंश को सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराना सभी का दायित्व है

रिपोर्टर : दिनेश सिंह अग्निवंशी

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