दोस्तपुर में बसपा के पिछड़ा वर्ग सम्मेलन से पहले बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम
सुलतानपुर - लम्भुआ दोस्तपुर सुलतानपुर जनपद की कादीपुर विधानसभा क्षेत्र के दोस्तपुर में रविवार को आयोजित बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के पिछड़ा वर्ग सम्मेलन से पहले बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया। सम्मेलन में बसपा के प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल सहित प्रदेश एवं जिला स्तर के कई वरिष्ठ पदाधिकारियों और बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं के शामिल होने का कार्यक्रम निर्धारित था। कार्यक्रम से पहले ही बसपा के वरिष्ठ नेता एवं अमेठी से पूर्व लोकसभा प्रत्याशी नन्हे सिंह चौहान को लम्भुआ पुलिस ने उनके पैतृक आवास ग्राम अर्जुनपुर पर रोक दिया और उन्हें बाहर निकलने की अनुमति नहीं दी।
इस कार्रवाई की जानकारी मिलते ही बसपा कार्यकर्ताओं में नाराजगी फैल गई। पार्टी नेताओं का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी भी राजनीतिक दल को शांतिपूर्ण तरीके से कार्यक्रम आयोजित करने और उसमें शामिल होने का अधिकार है। ऐसे में कार्यक्रम से पहले एक वरिष्ठ नेता को उनके घर पर ही रोकना लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है। बसपा नेता नन्हे सिंह चौहान ने प्रशासन की कार्रवाई पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए आरोप लगाया कि प्रदेश में बसपा का जनाधार लगातार बढ़ रहा है और विशेष रूप से पिछड़ा वर्ग, दलित, किसान, युवा तथा अन्य वर्गों का पार्टी के प्रति विश्वास मजबूत हो रहा है। उन्होंने कहा कि इसी बढ़ते जनसमर्थन से सत्ता पक्ष घबराया हुआ है और पुलिस-प्रशासन का इस्तेमाल कर बसपा के कार्यक्रमों को प्रभावित करने तथा कार्यकर्ताओं का मनोबल तोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में प्रत्येक राजनीतिक दल को अपनी बात जनता तक पहुंचाने का अधिकार है,लेकिन यदि नेताओं को घर से बाहर निकलने तक की अनुमति न दी जाए तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंताजनक स्थिति है। उन्होंने इस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच कराने तथा प्रशासन से स्पष्ट जवाब देने की मांग की। उधर,पुलिस अधिकारियों का कहना है कि क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखने तथा किसी भी संभावित अप्रिय स्थिति से बचने के लिए एहतियातन आवश्यक कदम उठाए गए हैं। पुलिस का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए कार्रवाई की गई है।
घटना के बाद दोस्तपुर और आसपास के क्षेत्रों में राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। बसपा कार्यकर्ताओं ने इस कार्रवाई पर नाराजगी व्यक्त करते हुए इसे राजनीतिक दबाव में उठाया गया कदम बताया है। वहीं,स्थानीय लोगों के बीच भी इस घटनाक्रम को लेकर विभिन्न प्रकार की चर्चाएं हो रही हैं। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन इस मामले पर आगे क्या रुख अपनाता है और बसपा नेतृत्व इस मुद्दे को किस प्रकार आगे बढ़ाता है।
संवाददाता - दिनेश सिंह अग्निवंशी
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