10 लाख की आंगनबाड़ी योजना बनी भ्रष्टाचार की मिसाल!
सुल्तानपुर : विकासखंड मोतिगरपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत भदिला खानीपुर में वर्ष 2016-17 में शुरू हुई आंगनबाड़ी केंद्र निर्माण योजना आज लगभग दस वर्ष बाद भी अधूरी पड़ी है। करीब 10 लाख रुपये की लागत से बनने वाला यह भवन छोटे बच्चों की शिक्षा, पोषण और देखभाल के उद्देश्य से बनाया जाना था, लेकिन आज इसकी स्थिति बेहद दयनीय है। अधूरी दीवारें, जर्जर छत, उखड़ा प्लास्टर और टूटा हुआ ढांचा सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत बयां कर रहा है। सबसे हैरानी की बात यह है कि जिस भवन में बच्चों की पढ़ाई और आंगनबाड़ी की गतिविधियां संचालित होनी थीं, वहां आज भूसा और ऊपरी कंडी (उपले) रखे जा रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल एक अधूरा भवन नहीं, बल्कि सरकारी व्यवस्था की लापरवाही, विभागीय उदासीनता और वर्षों से चली आ रही अनदेखी का उदाहरण बन चुका है। यदि समय रहते निर्माण कार्य पूरा कराया जाता तो आज गांव के बच्चों को बेहतर सुविधाएं मिल रही होतीं।
ग्रामीणों के अनुसार निर्माण कार्य शुरू होने के कुछ समय बाद ही अचानक बंद कर दिया गया। इसके बाद न तो ठेकेदार वापस आया और न ही विभागीय अधिकारियों ने निर्माण पूरा कराने की कोई गंभीर पहल की। धीरे-धीरे भवन जर्जर होता गया और आज किसी भी समय हादसे का कारण बन सकता है।
ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य के नाम पर सरकारी धन खर्च कर दिया गया, लेकिन धरातल पर भवन आज तक पूरा नहीं हुआ। लोगों का सवाल है कि यदि निर्माण अधूरा था तो भुगतान किस आधार पर किया गया? किस अधिकारी ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच की? किसकी संस्तुति पर सरकारी धन जारी हुआ? यदि कार्य अधूरा था तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की गई? आखिर इतने वर्षों तक इस पूरे मामले को नजरअंदाज क्यों किया गया?
ग्रामीणों का आरोप है कि उस समय के ग्राम प्रधान, विकासखंड अधिकारी, ब्लॉक प्रमुख, बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग तथा अन्य संबंधित अधिकारियों ने अपनी जिम्मेदारी का सही ढंग से निर्वहन नहीं किया। यदि समय-समय पर निरीक्षण होता और जवाबदेही तय की जाती तो आज यह भवन इस जर्जर हालत में नहीं होता।
ग्रामीणों ने बताया कि इस मुद्दे को स्थानीय मीडिया ने कई बार प्रमुखता से उठाया। समाचार प्रकाशित हुए, वीडियो रिपोर्टें प्रसारित की गईं और संबंधित अधिकारियों का ध्यान इस ओर आकर्षित करने का प्रयास किया गया। इसके बावजूद न तो निर्माण कार्य दोबारा शुरू हुआ और न ही किसी जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की गई। ग्रामीणों का कहना है कि हर बार केवल आश्वासन मिले, लेकिन धरातल पर कोई बदलाव नहीं हुआ।
कुछ ग्रामीणों का कहना है कि जब उन्होंने इस मामले को उठाया और मीडिया के माध्यम से आवाज बुलंद की, तब उन्हें कथित रूप से दबाव और धमकियों का सामना करना पड़ा। ग्रामीणों का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति को इस मामले में धमकी दी गई है तो उसकी निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही, भ्रष्टाचार से जुड़े आरोपों की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
यह पूरा मामला विधानसभा क्षेत्र 189 जयसिंहपुर का है। वर्ष 2016-17 में क्षेत्र से समाजवादी पार्टी के विधायक अरुण वर्मा थे। निर्माण कार्य उसी दौरान शुरू हुआ, लेकिन पूरा नहीं हो सका। इसके बाद भारतीय जनता पार्टी के विधायक सीताराम वर्मा के कार्यकाल में भी यह अधूरा भवन पूरा नहीं कराया गया। वर्तमान में क्षेत्र का प्रतिनिधित्व भाजपा विधायक राज प्रसाद उपाध्याय कर रहे हैं। ग्रामीणों की मांग है कि वह स्वयं गांव पहुंचकर वास्तविक स्थिति का निरीक्षण करें, संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगें और अधूरे निर्माण कार्य को शीघ्र पूरा कराएं।
ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से पूरे मामले का संज्ञान लेने की मांग की है। उनका कहना है कि प्रदेश सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति की बात करती है, इसलिए भदिला खानीपुर के इस अधूरे आंगनबाड़ी केंद्र की उच्चस्तरीय जांच कराई जानी चाहिए। ग्रामीणों ने मांग की है कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर संबंधित विभागों से जवाब तलब किया जाए और यह पता लगाया जाए कि सरकारी धन खर्च होने के बावजूद भवन आज तक अधूरा क्यों पड़ा है।
इसके साथ ही ग्रामीणों ने महिला कल्याण एवं बाल विकास मंत्री, जिलाधिकारी (डीएम) सुल्तानपुर, मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ), उप जिलाधिकारी (एसडीएम), खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) मोतिगरपुर, जिला कार्यक्रम अधिकारी (डीपीओ) बाल विकास एवं पुष्टाहार, तथा अन्य संबंधित अधिकारियों से भी पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यह जांच की जाए कि निर्माण कार्य किस एजेंसी को दिया गया था, कितना भुगतान हुआ, किस स्तर पर कार्य का सत्यापन किया गया और किन परिस्थितियों में निर्माण कार्य अधूरा छोड़ दिया गया।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ है तो दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों, कर्मचारियों, ठेकेदारों और अन्य जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए। साथ ही वर्षों से अधूरे पड़े आंगनबाड़ी केंद्र का निर्माण तत्काल पूरा कराया जाए ताकि गांव के बच्चों को सुरक्षित भवन और सरकार की योजनाओं का वास्तविक लाभ मिल सके।
अब गांव के लोगों का कहना है कि उन्हें केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई चाहिए। उनका कहना है कि यदि सरकार, जिला प्रशासन और संबंधित विभाग ईमानदारी से जांच कर कार्रवाई करें तो वर्षों से अधूरी पड़ी इस योजना की सच्चाई सामने आएगी और बच्चों के लिए बना आंगनबाड़ी केंद्र अपने वास्तविक उद्देश्य के अनुरूप उपयोग में आ सकेगा।
रिपोर्टर : दिनेश सिंह अग्निवंशी
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