3 करोड़ का कस्तूरबा गांधी बालिका छात्रावास 10 वर्ष बाद भी अधूरा

सुल्तानपुर : नगर पंचायत दोस्तपुर स्थित श्री पीएम कंपोजिट विद्यालय, अस्पताल रोड परिसर में निर्माणाधीन कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय छात्रावास लगभग 10 वर्ष बाद भी अधूरा पड़ा हुआ है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा वर्ष 2016 में बालिकाओं को सुरक्षित आवासीय सुविधा एवं बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लगभग 3 करोड़ रुपये की लागत से छात्रावास के निर्माण कार्य की शुरुआत कराई गई थी। उद्देश्य यह था कि दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों की छात्राओं को सुरक्षित आवास, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर शैक्षिक वातावरण उपलब्ध कराया जा सके। लेकिन एक दशक बीत जाने के बाद भी छात्रावास का निर्माण कार्य पूर्ण नहीं हो सका है, जिससे क्षेत्र के लोगों में भारी नाराजगी है।

ग्रामीणों के अनुसार बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) देर शाम करीब 8 बजे निर्माणाधीन छात्रावास का निरीक्षण करने पहुंचे। स्थानीय लोगों का कहना है कि निरीक्षण उस समय किया गया, जब अंधेरा हो चुका था। उनका सवाल है कि ऐसे समय निर्माण कार्य की गुणवत्ता और वास्तविक स्थिति का सही आकलन कैसे किया गया।
निरीक्षण के दौरान मौजूद मीडिया कर्मियों ने बीएसए से निर्माण कार्य में देरी, अब तक खर्च हुई धनराशि, निर्माण की गुणवत्ता, कार्यदायी संस्था की जिम्मेदारी तथा परियोजना के अधूरे रहने के कारणों को लेकर सवाल पूछे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार बीएसए ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी और बिना कोई जवाब दिए अपने वाहन से वहां से रवाना हो गए।
समाचार प्रकाशित करने से पहले बीएसए का पक्ष जानने के लिए उनके मोबाइल फोन पर कई बार संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका फोन रिसीव नहीं हुआ। समाचार लिखे जाने तक उनकी ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हो सकी। यदि भविष्य में उनका पक्ष प्राप्त होता है तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
ग्रामीणों का आरोप है कि लगभग 3 करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद छात्रावास आज तक छात्राओं के रहने योग्य नहीं बन सका है। उनका कहना है कि भवन को बाहर से रंगाई-पुताई कर तैयार जैसा दिखाया गया है, जबकि अंदर कई आवश्यक कार्य अब भी अधूरे हैं। कई कमरों में फिनिशिंग का कार्य पूरा नहीं हुआ है, दरवाजे-खिड़कियां ठीक से नहीं लगी हैं तथा विद्युत और अन्य मूलभूत सुविधाएं भी अधूरी हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यह भवन वर्षों से केवल शोपीस बनकर रह गया है और छात्राओं को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है।
कुछ ग्रामीणों ने निर्माण सामग्री की गुणवत्ता पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि निर्माण में निम्न गुणवत्ता की सामग्री का उपयोग किया गया। हालांकि इन आरोपों की अभी तक किसी सक्षम तकनीकी अथवा प्रशासनिक जांच से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ग्रामीणों ने पूरे निर्माण कार्य की स्वतंत्र तकनीकी एवं वित्तीय जांच कराने की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने, सरकारी विद्यालयों का कायाकल्प करने तथा बालिकाओं की शिक्षा को प्राथमिकता देने की बात करते हैं। ऐसे में श्री पीएम कंपोजिट विद्यालय, अस्पताल रोड, दोस्तपुर परिसर में करोड़ों रुपये की लागत से बन रहा छात्रावास वर्षों तक अधूरा रहना गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने मुख्यमंत्री से पूरे मामले की उच्चस्तरीय तकनीकी, वित्तीय एवं प्रशासनिक जांच कराने की मांग की है।
ग्रामीणों ने प्रदेश के बेसिक शिक्षा (स्वतंत्र प्रभार) मंत्री संदीप सिंह से भी इस मामले का तत्काल संज्ञान लेने की मांग की है। उनका कहना है कि शिक्षा विभाग यह स्पष्ट करे कि आखिर दस वर्षों में निर्माण कार्य पूरा क्यों नहीं हुआ, अब तक कितनी धनराशि खर्च हुई, कार्यदायी संस्था की क्या जिम्मेदारी रही और निर्माण कार्य में देरी के लिए कौन जिम्मेदार है।
इसके साथ ही ग्रामीणों ने जिलाधिकारी (डीएम) सुल्तानपुर, उपजिलाधिकारी (एसडीएम), बेसिक शिक्षा विभाग तथा संबंधित अधिकारियों से भी मौके का निरीक्षण कर निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जांच में किसी प्रकार की लापरवाही, निर्माण गुणवत्ता में कमी, वित्तीय अनियमितता अथवा नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो कार्यदायी संस्था, ठेकेदार तथा संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए।
ग्रामीणों ने क्षेत्र के सांसद, विधायक, नगर पंचायत प्रतिनिधियों एवं अन्य जनप्रतिनिधियों से भी इस गंभीर विषय पर आगे आकर छात्राओं के हित में प्रभावी पहल करने की अपील की है। उनका कहना है कि यह मामला केवल एक अधूरे भवन का नहीं, बल्कि गरीब एवं जरूरतमंद छात्राओं की शिक्षा, सुरक्षा और भविष्य से जुड़ा हुआ है। यदि छात्रावास समय पर बनकर तैयार हो गया होता तो वर्षों पहले सैकड़ों छात्राओं को इसका लाभ मिल चुका होता।
क्षेत्रीय नागरिकों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह, जिलाधिकारी सुल्तानपुर, उपजिलाधिकारी, बेसिक शिक्षा विभाग, कार्यदायी संस्था तथा संबंधित अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष तकनीकी, वित्तीय एवं प्रशासनिक जांच कराने, दोषियों की जवाबदेही तय करने तथा अधूरे छात्रावास का निर्माण शीघ्र पूरा कर छात्राओं को समर्पित करने की मांग की है।

रिपोर्टर :  दिनेश सिंह अग्निवंशी

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