मीडिया ने खोली 3 करोड़ के अधूरे कस्तूरबा गांधी बालिका छात्रावास की पोल

सुल्तानपुर - दोस्तपुर नगर पंचायत दोस्तपुर स्थित श्री पीएम कंपोजिट विद्यालय, अस्पताल रोड परिसर में निर्माणाधीन कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय छात्रावास की जमीनी पड़ताल में कई गंभीर सवाल सामने आए हैं। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा वर्ष 2016 में लगभग 3 करोड़ रुपये की लागत से छात्रावास का निर्माण कार्य शुरू कराया गया था,ताकि दूरदराज की छात्राओं को सुरक्षित आवास,बेहतर शिक्षा और आधुनिक सुविधाएं मिल सकें। लेकिन लगभग 10 वर्ष बीत जाने के बाद भी यह परियोजना पूरी नहीं हो सकी है। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद छात्रावास आज तक छात्राओं के उपयोग के लिए तैयार नहीं हो पाया।

मीडिया की पड़ताल में सामने आई अधूरे निर्माण की तस्वीर

मौके पर पहुंची मीडिया टीम ने छात्रावास का निरीक्षण किया तो कई स्थानों पर निर्माण कार्य अधूरा मिला। स्थानीय लोगों के अनुसार भवन को बाहर से रंगाई-पुताई कर तैयार जैसा दिखाया गया है, लेकिन अंदर कई कमरे अधूरे हैं। फिनिशिंग का कार्य पूरा नहीं हुआ है, कई स्थानों पर निर्माण सामग्री बिखरी पड़ी है तथा आवश्यक सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यह भवन वर्षों से केवल शोपीस बनकर रह गया है।

रात करीब 8 बजे पहुंचे बीएसए, सवालों पर नहीं दिया जवाब

ग्रामीणों के अनुसार बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) देर शाम करीब 8 बजे निर्माणाधीन छात्रावास का निरीक्षण करने पहुंचे। स्थानीय लोगों का कहना है कि निरीक्षण उस समय किया गया,जब अंधेरा हो चुका था। मीडिया ने निर्माण कार्य में देरी, खर्च हुई धनराशि, गुणवत्ता और जिम्मेदार अधिकारियों को लेकर सवाल पूछे,लेकिन प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार बीएसए ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी और बिना जवाब दिए वहां से चले गए।

कई बार फोन किया,लेकिन नहीं मिला पक्ष समाचार प्रकाशित करने से पहले बीएसए का पक्ष जानने के लिए उनके मोबाइल फोन पर कई बार संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका फोन रिसीव नहीं हुआ। समाचार लिखे जाने तक उनकी ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हो सकी। उनका पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

ग्रामीणों ने लगाए गंभीर आरोप,जांच की मांग

ग्रामीणों का आरोप है कि लगभग 3 करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद छात्रावास आज तक छात्राओं के रहने योग्य नहीं बन सका है। उनका कहना है कि कई कमरों में फिनिशिंग का कार्य अधूरा है, दरवाजे-खिड़कियां ठीक से नहीं लगी हैं तथा अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं भी पूरी नहीं हैं। कुछ ग्रामीणों ने निर्माण सामग्री की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए हैं। हालांकि इन आरोपों की अभी तक किसी सक्षम तकनीकी या प्रशासनिक जांच से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से उच्चस्तरीय जांच की मांग

ग्रामीणों का कहना है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और बालिकाओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की बात करते हैं। ऐसे में दोस्तपुर में करोड़ों रुपये की यह परियोजना वर्षों तक अधूरी रहना गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने मुख्यमंत्री से पूरे मामले की उच्चस्तरीय तकनीकी, वित्तीय एवं प्रशासनिक जांच कराने की मांग की है।

शिक्षा मंत्री,डीएम और एसडीएम से भी कार्रवाई की मांग

ग्रामीणों ने बेसिक शिक्षा (स्वतंत्र प्रभार) मंत्री संदीप सिंह, जिलाधिकारी (डीएम) सुल्तानपुर, उपजिलाधिकारी (एसडीएम), बेसिक शिक्षा विभाग तथा संबंधित अधिकारियों से तत्काल मौके का निरीक्षण कर निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जांच में किसी प्रकार की लापरवाही, निर्माण गुणवत्ता में कमी या वित्तीय अनियमितता की पुष्टि होती है, तो संबंधित कार्यदायी संस्था, ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए जनप्रतिनिधियों से भी उठाई आवाज ग्रामीणों ने क्षेत्र के सांसद,विधायक,नगर पंचायत प्रतिनिधियों तथा अन्य जनप्रतिनिधियों से भी इस मामले को गंभीरता से उठाने की अपील की है। उनका कहना है कि यह मामला केवल एक अधूरे भवन का नहीं,बल्कि गरीब एवं जरूरतमंद छात्राओं की शिक्षा,सुरक्षा और भविष्य से जुड़ा हुआ है।

जनता का सवाल—10 साल में 3 करोड़ खर्च हुए,फिर छात्रावास अधूरा क्यों?

क्षेत्रीय नागरिकों का कहना है कि यदि छात्रावास समय पर बनकर तैयार हो गया होता तो वर्षों पहले सैकड़ों छात्राओं कोइसका लाभ मिल चुका होता। अब जनता की मांग है कि पूरे मामले की पारदर्शी जांच कर दोषियों की जवाबदेही तय की जाए और अधूरे छात्रावास का निर्माण शीघ्र पूरा कर छात्राओं को समर्पित किया जाए

संवाददाता : दिनेश सिंह अग्निवंशी

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