करौंदीकलां ब्लॉक में सरकारी अभिलेख फाड़ने और रंगदारी मांगने का आरोप
सुल्तानपुर : विकास खंड कार्यालय करौंदीकलां में सरकारी कार्य में बाधा डालने, सरकारी अभिलेख फाड़ने, कर्मचारियों से गाली-गलौज एवं जान से मारने की धमकी देने का मामला सामने आया है। मामले में सहायक विकास अधिकारी (सहकारिता) आलोक मिश्रा की तहरीर पर दो नामजद लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। वहीं, घटना के बाद ब्लॉक कर्मचारियों में भारी आक्रोश की बात सामने आ रही है।
तहरीर के मुताबिक, 11 अगस्त 2026 को करीब 2:45 बजे सहायक विकास अधिकारी आलोक मिश्रा विकास खंड कार्यालय में बैठकर शासकीय कार्य कर रहे थे। इसी दौरान अशोक निषाद पुत्र इन्द्रपति निषाद निवासी ग्राम भटौतातुलसी पट्टी तथा अशोक कुमार मिश्र पुत्र देवेन्द्र मिश्र निवासी ग्राम पहाड़पुरकलां कार्यालय पहुंचे।
आरोप है कि दोनों ने सरकारी काम में बाधा डालते हुए कार्यालय में रखे अभिलेखों में हस्तक्षेप किया। तहरीर के अनुसार अशोक कुमार मिश्र ने मेज पर रखे प्लास्टिक के थैले में हाथ डालकर अभिलेख निकाले और अशोक निषाद को पकड़ा दिए। इसके बाद दोनों ने मिलकर सरकारी अभिलेख फाड़ना शुरू कर दिया।
अभिलेख फाड़ने के संबंध में पूछने पर आरोपियों द्वारा कथित रूप से रुपयों की मांग करते हुए जान से मारने की धमकी दी गई। तहरीर में ₹5 लाख की मांग का उल्लेख है, जबकि घटना से जुड़े अन्य विवरण में ₹50 हजार की रंगदारी मांगने की बात भी सामने आई है। रंगदारी की वास्तविक राशि पुलिस जांच और मुकदमे के अभिलेखों से स्पष्ट होगी।
बताया गया कि जब दोनों आरोपी कार्यालय से बाहर जाने लगे तो सहकर्मी जितेन्द्र, सहायक बोरिंग टेक्नीशियन, तथा रमेशचन्द्र सिंहानियां, वरिष्ठ सहायक, ने उन्हें रोककर अभिलेख लेने का प्रयास किया। आरोप है कि तब तक काफी अभिलेख फाड़े जा चुके थे। छीना-झपटी के दौरान कर्मचारियों के साथ गाली-गलौज करने और जान से मारने की धमकी देने का भी आरोप लगाया गया है।
तहरीर में यह भी आरोप लगाया गया है कि दोनों ने कर्मचारियों से कहा कि “हमारे ब्लॉक में नौकरी करने आए हो तो हमारे हिसाब से काम करना पड़ेगा।” आरोप है कि उनकी बात के अनुसार काम नहीं करने पर रास्ते में समझाने की धमकी भी दी गई। घटना के समय वरिष्ठ सहायक कल्लूराम के मौजूद रहने की बात भी तहरीर में दर्ज है।
सफाईकर्मी से भी ऑनलाइन रुपये ट्रांसफर कराने का आरोप
मामले से जुड़े अन्य आरोपों में भटौतातुलसी पट्टी के सफाईकर्मी अर्जुन को रोककर गाली-गलौज और धमकी देने तथा कथित रूप से उसके मोबाइल से ऑनलाइन रुपये ट्रांसफर कराने की बात भी सामने आई है। इस आरोप की भी पुलिस द्वारा जांच की जानी है।
ब्लॉक कर्मचारियों में भारी आक्रोश, धरने की चेतावनी
घटना के बाद विकास खंड कार्यालय के कर्मचारियों में नाराजगी बताई जा रही है। कर्मचारियों का कहना है कि यदि सरकारी कार्यालय में ही कर्मचारियों के साथ इस तरह का व्यवहार होगा तो शासकीय कार्य प्रभावित होगा। कार्रवाई में देरी होने पर कर्मचारियों द्वारा सामूहिक रूप से धरने पर बैठने की चेतावनी दिए जाने की भी बात सामने आई है।
11 अगस्त की घटना, 12 अगस्त को मुकदमा—एफआईआर में देरी पर सवाल
मामले में एक अहम सवाल यह भी उठ रहा है कि घटना 11 अगस्त की दोपहर करीब 2:45 बजे की बताई गई है, जबकि मुकदमा 12 अगस्त को दर्ज किया गया। यदि पुलिस को घटना की सूचना या तहरीर 11 अगस्त को ही मिल गई थी, तो मुकदमा उसी दिन क्यों दर्ज नहीं हुआ—यह सवाल भी चर्चा में है।
हालांकि, उपलब्ध तहरीर में पुलिस को शिकायत दिए जाने का सटीक समय स्पष्ट नहीं है। ऐसे में एफआईआर दर्ज होने में देरी का वास्तविक कारण पुलिस रिकॉर्ड से ही स्पष्ट हो सकेगा।
एसपी चारू निगम के निर्देश पर मुकदमा दर्ज
बताया जा रहा है कि सुलतानपुर पुलिस अधीक्षक चारू निगम के निर्देश के बाद करौंदीकलां पुलिस ने दोनों नामजद आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। अब पुलिस सरकारी अभिलेखों को नुकसान पहुंचाने, सरकारी कार्य में बाधा डालने, धमकी देने, गाली-गलौज और रुपये मांगने सहित लगाए गए आरोपों की जांच करेगी।
वहीं, थानाध्यक्ष अश्वनी सिंह के संबंध में बताया गया कि वह हाईकोर्ट के कार्य से बाहर थे और लौटने के बाद मामले की जानकारी लेकर कार्रवाई की बात कही गई थी।
फिलहाल पुलिस जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि घटना में कितने सरकारी अभिलेख क्षतिग्रस्त हुए, रुपये की मांग कितनी थी और सफाईकर्मी से ऑनलाइन रकम ट्रांसफर कराने के आरोपों में कितनी सच्चाई है। मुकदमा दर्ज होना आरोपों की पुष्टि नहीं है; अंतिम स्थिति पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
रिपोर्टर : दिनेश सिंह अग्निवंशी
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