नाग पंचमी पर दोस्तपुर के पोखरे में उमड़ी महिलाओं और बच्चों की भीड़, पूजा-अर्चना के साथ निभाई लोक परंपरा
दोस्तपुर,सुल्तानपुर : नाग पंचमी के पावन पर्व पर दोस्तपुर के पोखरे पर श्रद्धा, आस्था और लोक संस्कृति का सुंदर संगम देखने को मिला। सुबह से ही बड़ी संख्या में महिलाएं, बच्चे और श्रद्धालु पोखरे पर पहुंचने लगे। महिलाओं ने नाग देवता की पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और बच्चों के मंगलमय जीवन की कामना की।
नाग पंचमी के अवसर पर महिलाओं ने स्नान आदि के बाद पूजा की तैयारी की और नाग देवता को दूध, पुष्प, अक्षत, रोली, मिठाई तथा अन्य पूजन सामग्री अर्पित की। महिलाओं ने श्रद्धा के साथ पूजा-अर्चना करते हुए परिवार की खुशहाली और सुरक्षा की प्रार्थना की। कई महिलाओं ने नाग पंचमी की धार्मिक कथा का श्रवण भी किया और पर्व की परंपराओं का पालन किया।
महिलाओं में दिखी विशेष आस्था
नाग पंचमी को लेकर महिलाओं में खास उत्साह देखने को मिला। महिलाएं समूह में पोखरे पर पहुंचीं और पूजा-अर्चना की। पूजा के दौरान महिलाओं ने अपने परिवार, पति, बच्चों और घर की सुख-समृद्धि के लिए मंगलकामना की। सावन का पवित्र महीना होने के कारण भगवान शिव और नाग देवता के प्रति श्रद्धालुओं में विशेष आस्था दिखाई दी।
बच्चों ने निभाई गुड़िया की परंपरा
नाग पंचमी के पर्व पर बच्चों में भी खास उत्साह देखने को मिला। स्थानीय लोक परंपरा के अनुसार बच्चों ने गुड़िया के साथ खेलते हुए पोखरे पर पहुंचकर गुड़िया का विसर्जन किया। बच्चों की टोली पोखरे के आसपास उत्साह के साथ नजर आई। परिजनों ने बच्चों को इस पारंपरिक आयोजन में शामिल कराया।
बच्चों के लिए नाग पंचमी केवल धार्मिक पर्व ही नहीं, बल्कि अपनी लोक परंपराओं और बचपन की खुशियों से जुड़ा अवसर भी रहा। बच्चे एक-दूसरे के साथ गुड़िया लेकर पहुंचे और परंपरा के अनुसार कार्यक्रम में शामिल हुए। इससे पोखरे के आसपास काफी देर तक चहल-पहल बनी रही।
रिमझिम बारिश के बीच भी नहीं कम हुआ उत्साह
नाग पंचमी की पूजा-अर्चना और बच्चों के पारंपरिक आयोजन के दौरान बाद में रिमझिम बारिश भी होती रही। बारिश के बावजूद महिलाओं और बच्चों का उत्साह कम नहीं हुआ। श्रद्धालु बारिश के बीच भी अपनी पूजा और परंपराओं में जुटे रहे। मौसम सुहावना होने से पोखरे के आसपास का वातावरण और भी मनमोहक नजर आया।
पोखरे पर महिलाओं की पूजा-अर्चना, बच्चों की चहल-पहल और रिमझिम बारिश ने पूरे माहौल को भक्तिमय और उत्सव जैसा बना दिया। स्थानीय लोगों ने कहा कि नाग पंचमी जैसे पर्व हमारी धार्मिक आस्था के साथ-साथ ग्रामीण लोक संस्कृति और पुरानी परंपराओं को भी जीवित रखते हैं
संवाददाता : दिनेश सिंह अग्निवंशी
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