गौ माता की मौत से खलिशपुर डेंगुर में मचा हड़कंप
दोस्तपुर, सुल्तानपुर : खलिशपुर डेंगुर गांव के पास एक गौ माता की मौत का मामला सामने आने के बाद क्षेत्र में चर्चा तेज हो गई है। गौ माता की मौत किन परिस्थितियों में हुई, इसका वास्तविक कारण अभी तक स्पष्ट नहीं हो सका है। मौके पर सर्पदंश की चर्चा जरूर रही, लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में मौत की सही वजह जानने के लिए जांच की जरूरत महसूस की जा रही है।
घटना के बाद गौ माता को बैटरी गाड़ी पर ले जाते हुए लोग नजर आए। गौ माता को इस तरह ले जाते देख आसपास के ग्रामीणों में भी चर्चा शुरू हो गई। लोगों का कहना है कि जब मौत का कारण स्पष्ट नहीं था, तो मामले की चिकित्सकीय जांच कराकर वास्तविक स्थिति सामने लाई जानी चाहिए थी।
गौ माता की मौत की जानकारी मिलने के बाद गौ सेवक दोस्तपुर दल के अध्यक्ष शुभम मिश्रा, उप सचिव रुद्र पण्डित समेत अन्य गौ सेवक मौके पर पहुंचे। गौ सेवकों ने मामले की जानकारी ली और गौ माता के प्रति संवेदना व्यक्त की। गांव के प्रधान एवं स्थानीय ग्रामीणों की मौजूदगी में गौ माता को फूल-माला अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गई। इसके बाद गौ माता का सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार किया गया।
गौ माता की मौत का कारण क्या?
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल गौ माता की मौत के कारण को लेकर है। स्थानीय स्तर पर सर्पदंश की चर्चा जरूर सामने आई, लेकिन अभी तक किसी पशु चिकित्सक की ओर से इसकी पुष्टि नहीं की गई है। इसलिए यह स्पष्ट तौर पर कहना संभव नहीं है कि गौ माता की मौत सांप के काटने से ही हुई।
यदि मौत संदिग्ध परिस्थितियों में हुई है, तो पशु चिकित्सा विभाग द्वारा मौके पर जांच की जानी चाहिए थी। जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय परीक्षण या पोस्टमार्टम के माध्यम से मौत की वास्तविक वजह सामने लाई जा सकती है। इससे किसी भी तरह की अफवाह या गलत जानकारी पर भी रोक लग सकती है।
प्रधान और सचिव की भूमिका पर उठे सवाल
घटना के बाद ग्राम प्रधान और ग्राम सचिव की भूमिका को लेकर भी ग्रामीणों में सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम पंचायत में किसी गौ माता की मौत होने पर पंचायत स्तर से संबंधित विभाग को सूचना देने और आवश्यक कार्रवाई कराने की जिम्मेदारी पर स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए।
लोग यह जानना चाहते हैं कि घटना की जानकारी ग्राम प्रधान और ग्राम सचिव को कब मिली, जानकारी मिलने के बाद उनके स्तर से क्या कदम उठाए गए और क्या पशु चिकित्सा विभाग को सूचना दी गई। यदि सूचना दी गई थी तो मौके पर पशु चिकित्सक पहुंचे या नहीं, यह भी जांच का विषय है।
हालांकि अभी तक ग्राम प्रधान या ग्राम सचिव की ओर से इस मामले में कोई स्पष्ट सार्वजनिक बयान सामने नहीं आया है। इसलिए उनकी भूमिका को लेकर उठ रहे सवालों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
गौ संरक्षण अभियान के बीच उठे सवाल
प्रदेश में योगी सरकार द्वारा गौ संरक्षण और गौ सेवा को लेकर लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं। गौशालाओं की व्यवस्था, निराश्रित गौवंश की देखरेख और गौ संरक्षण को लेकर प्रशासनिक स्तर पर भी विभिन्न प्रयास किए जाते हैं।
ऐसे में किसी गौ माता की मौत होने पर यह जरूरी हो जाता है कि उसकी मौत का कारण स्पष्ट हो और यह भी देखा जाए कि संबंधित स्तर पर निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई हुई या नहीं। खलिशपुर डेंगुर की घटना ने इसी व्यवस्था को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चा को जन्म दिया है।
ग्रामीणों का कहना है कि गौ माता केवल पशु नहीं, बल्कि भारतीय समाज में आस्था और श्रद्धा का विषय भी है। इसलिए गौ माता की मौत के बाद उसके सम्मानजनक अंतिम संस्कार के साथ-साथ मौत की वास्तविक वजह सामने आना भी जरूरी है।
गौ सेवकों ने दी सम्मानपूर्वक अंतिम विदाई
गौ माता की मौत की सूचना मिलने के बाद गौ सेवकों का मौके पर पहुंचना और फूल-माला अर्पित कर श्रद्धांजलि देना लोगों के बीच चर्चा का विषय रहा। गौ सेवक दोस्तपुर दल के अध्यक्ष शुभम मिश्रा और उप सचिव रुद्र पण्डित समेत अन्य गौ सेवकों ने गौ माता को सम्मानपूर्वक अंतिम विदाई देने में सहयोग किया।
स्थानीय ग्रामीणों की मौजूदगी में गौ माता का अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान लोगों ने गौ माता के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की और भविष्य में ऐसी घटनाओं में समय रहते संबंधित विभाग को सूचना देने की आवश्यकता पर जोर दिया।
निष्पक्ष जांच की मांग
फिलहाल गौ माता की मौत का वास्तविक कारण सामने नहीं आया है। सर्पदंश की चर्चा की भी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में स्थानीय लोगों की मांग है कि प्रशासन और पशु चिकित्सा विभाग मामले की निष्पक्ष जांच कराएं और यह स्पष्ट करें कि गौ माता की मौत किस कारण से हुई।
साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाए कि घटना की जानकारी मिलने के बाद ग्राम प्रधान और ग्राम सचिव द्वारा क्या कार्रवाई की गई तथा संबंधित विभाग को सूचना दी गई थी या नहीं।
यदि जांच में किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए, वहीं यदि किसी प्रकार की लापरवाही नहीं हुई है तो प्रशासन की जांच से स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।
फिलहाल खलिशपुर डेंगुर में गौ माता की मौत का मामला कई सवाल छोड़ गया है। गौ माता को बैटरी गाड़ी पर ले जाते दिखाई देने से लेकर मौत के कारण की पुष्टि न होने तक पूरे मामले को लेकर ग्रामीणों में चर्चा बनी हुई है। अब निगाह प्रशासन और पशु चिकित्सा विभाग की जांच पर है कि गौ माता की मौत की वास्तविक वजह कब तक सामने आती है
रिपोर्टर : दिनेश सिंह अग्निवंशी
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