कच्ची दीवार गिरने से किसान की मौत, गरीब परिवार को आखिर क्यों नहीं मिला सरकार की आवास योजना का लाभ?
सुल्तानपुर : दोस्तपुर थाना क्षेत्र के खालिसपुर डींगुर गांव में श्री कृष्ण जन्माष्टमी के दिन शुक्रवार रात करीब 9:32 बजे तेज बारिश के दौरान कई साल पुराने मकान की दीवार अचानक गिर गई। दीवार के मलबे में दबकर 67 वर्षीय किसान हरीश नारायण मिश्रा पुत्र स्व. दिलचेन मिश्रा की दर्दनाक मौत हो गई। घटना के बाद गांव में शोक का माहौल है।
तेज बारिश के बीच दीवार गिरने की सूचना मिलते ही ग्रामीण मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों ने मलबा हटाकर हरीश नारायण मिश्रा को बाहर निकाला और तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र दोस्तपुर, सुल्तानपुर पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
आवास मिलने के इंतजार में चली गई किसान की जान
बताया जा रहा है कि हरीश नारायण मिश्रा का मकान कई वर्षों पुराना था। गरीब परिवार की ओर से प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्का मकान दिलाने के लिए कई बार आवेदन किए जाने की बात सामने आई है। परिवार को आवास मिलने की उम्मीद थी और आश्वासन भी मिलता रहा, लेकिन पक्का आवास नहीं मिल सका।
अब तेज बारिश के बीच दीवार गिरने से हुई किसान की मौत के बाद सबसे बड़ा सवाल सरकारी आवास योजना के लाभ को लेकर उठ रहा है।
गरीब परिवार को आखिर क्यों नहीं मिला सरकार का लाभ?
जब सरकार गरीब और जरूरतमंद परिवारों को पक्का मकान उपलब्ध कराने के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना चला रही है, तो सवाल उठता है कि कई बार आवेदन करने के बावजूद इस गरीब परिवार को आवास का लाभ क्यों नहीं मिला?
क्या परिवार का सर्वे हुआ था?
क्या संबंधित लेखपाल ने मौके का निरीक्षण कर रिपोर्ट लगाई थी?
क्या परिवार पात्रता की श्रेणी में था?
क्या ग्राम पंचायत स्तर से आवेदन आगे भेजा गया था?
यदि आवेदन और रिपोर्ट मौजूद थी तो ब्लॉक स्तर पर उस पर क्या कार्रवाई हुई?
इन सभी सवालों का जवाब प्रशासनिक जांच के बाद ही सामने आ सकेगा।
प्रधान से मिलता रहा आश्वासन, लेकिन आवास नहीं आया?
परिजनों की ओर से यदि ग्राम प्रधान को कई बार आवास के लिए आवेदन दिया गया था और लगातार आश्वासन मिलता रहा, तो अब यह भी जांच का विषय है कि आवेदन की प्रक्रिया आखिर कहां जाकर रुकी।
गरीब परिवार सरकारी आवास मिलने की उम्मीद में पुराने मकान में रहता रहा और इसी बीच तेज बारिश के दौरान दीवार गिरने से किसान की जान चली गई। ऐसे में ग्राम पंचायत से लेकर ब्लॉक स्तर तक आवास प्रक्रिया की जांच किए जाने की मांग उठ रही है।
ब्लॉक के संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल
घटना के बाद ग्रामीणों का कहना है कि मामले की जांच केवल दीवार गिरने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। प्रधानमंत्री आवास के लिए किए गए आवेदनों, सर्वे, सत्यापन, लेखपाल की रिपोर्ट और ब्लॉक स्तर पर हुई कार्रवाई की भी जांच होनी चाहिए।
यदि जांच में परिवार पात्र पाया जाता है और किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो संबंधित की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। हालांकि, जांच पूरी होने से पहले किसी अधिकारी या कर्मचारी को सीधे दोषी ठहराना उचित नहीं होगा।
थाना प्रभारी पुलिस बल के साथ पहुंचे
घटना की सूचना मिलते ही दोस्तपुर थाना प्रभारी नारद मुनि सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने घटनास्थल की जानकारी ली तथा परिजनों और ग्रामीणों से घटना के संबंध में पूछताछ की। आवश्यक जांच-पड़ताल और पंचनामा की कार्रवाई के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया।
मृतक की एक बेटी थी, जिसकी शादी हो चुकी है। उनके दो भाई परमानंद मिश्रा और चचिदानंद मिश्रा बताए गए हैं।
एक किसान की मौत ने सरकार की योजना पर खड़े किए सवाल
कच्ची दीवार गिरने से एक गरीब किसान की जान चली गई। हादसे ने यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि सरकारी योजनाओं का लाभ जरूरतमंद गरीब परिवारों तक समय पर क्यों नहीं पहुंच पाया।
यदि परिवार ने प्रधानमंत्री आवास के लिए कई बार आवेदन किया था, तो प्रशासन को आवेदन से लेकर सर्वे, पात्रता, रिपोर्ट और स्वीकृति तक की पूरी प्रक्रिया की जांच करनी चाहिए।
आखिर गरीब परिवार को सरकार की आवास योजना का लाभ क्यों नहीं मिला? आवास के इंतजार में किसान की जान चली गई—अब प्रशासनिक जांच से ही सामने आएगा कि इस मामले में देरी या रुकावट की वास्तविक वजह क्या थी
संवाददाता : दिनेश सिंह अग्निवंशी
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