हिंदी केवल भाषा नहीं, राष्ट्रीय एकता का सशक्त सेतु : विश्वनाथ पीजी कॉलेज में हिंदी दिवस समारोह

सुल्तानपुर - हिंदी के साथ सभी भारतीय भाषाओं के सम्मान पर जोर, विद्यार्थियों को हिंदी के अध्ययन और प्रयोग के लिए किया प्रेरित। भारत अपनी विविध भाषाओं, बोलियों, संस्कृतियों और परंपराओं के लिए पूरी दुनिया में अलग पहचान रखता है। देश के अलग-अलग क्षेत्रों में भाषा और बोलने का तरीका बदल जाता है, लेकिन यही विविधता भारत की सबसे बड़ी सांस्कृतिक ताकत है। इस विविधता के बीच हिंदी देश के अलग-अलग हिस्सों के लोगों को आपस में जोड़ने और संवाद स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

इसी उद्देश्य के साथ श्री विश्वनाथ पीजी कॉलेज के सभागार में हिंदी विभाग के तत्वावधान में हिंदी दिवस समारोह का आयोजन गरिमापूर्ण एवं उत्साहपूर्ण वातावरण में किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि शशि प्रकाश सिंह रहे, जबकि अध्यक्षता डॉ. अतुल कुमार सिंह ने की। कॉलेज के प्राचार्य डॉ. मनोज कुमार सिंह ने प्रमुख वक्ता के रूप में हिंदी के महत्व और राष्ट्रीय एकता में उसकी भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। हिंदी बनी देश को जोड़ने वाली कड़ी कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि हिंदी को किसी दूसरी भारतीय भाषा के विरोध में नहीं, बल्कि देश की अलग-अलग भाषाओं और बोलियों के बीच संवाद स्थापित करने वाली महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में देखा जाना चाहिए। भारत की अनेक भाषाएं और बोलियां देश की सांस्कृतिक विरासत को समृद्ध बनाती हैं।

वक्ताओं ने कहा कि हिंदी का उद्देश्य किसी भाषा को पीछे करना नहीं, बल्कि आपसी संवाद और संपर्क को आसान बनाना है। हिंदी साहित्य ने देश की सामाजिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रीय चेतना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। डॉ. विवेक कुमार सिंह एवं डॉ. हरि प्रताप सिंह ने हिंदी की साहित्यिक समृद्धि, व्यापकता और वर्तमान समय में उसकी उपयोगिता पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि हिंदी को आगे बढ़ाने के साथ-साथ देश की सभी भारतीय भाषाओं के सम्मान और संरक्षण की भावना भी मजबूत होनी चाहिए। कार्यक्रम में डॉ. अनुरुद्ध यादव, डॉ. राजेश दुबे, डॉ. बंदना सिंह, डॉ. संतोष कुमार यादव तथा डॉ. रीना त्रिपाठी सहित अन्य शिक्षक एवं विद्वान मौजूद रहे। सभी ने हिंदी के महत्व पर अपने विचार रखते हुए विद्यार्थियों को हिंदी के अध्ययन, लेखन और प्रयोग के लिए प्रेरित किया। मातृभाषा में शिक्षा से मजबूत होगी नींव कार्यक्रम में नई शिक्षा नीति में मातृभाषा के माध्यम से प्रारंभिक शिक्षा पर दिए गए जोर को भी महत्वपूर्ण बताया गया। वक्ताओं ने कहा कि बच्चा अपनी मातृभाषा में किसी विषय को अधिक सहजता से समझ सकता है। जब उसकी शिक्षा की प्रारंभिक नींव मजबूत होती है, तो आगे चलकर वह हिंदी सहित दूसरी भाषाओं को भी आसानी से सीख सकता है।
शिक्षण संस्थानों की इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका है। विद्यार्थियों में अपनी मातृभाषा के प्रति सम्मान के साथ हिंदी और देश की अन्य भाषाओं के प्रति भी सम्मान की भावना विकसित की जानी चाहिए। इससे आपसी समझ, संवाद और सामाजिक एकता को मजबूती मिलेगी। कार्यक्रम के संयोजक डॉ. सतीश कुमार सिंह ने आयोजन को व्यवस्थित रूप से संपन्न कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वहीं डॉ. कृष्ण प्रकाश सिंह ने मंच संचालन करते हुए कार्यक्रम को प्रभावी और रोचक बनाए रखा। डिजिटल युग में हिंदी की बढ़ती पहुंच आज का समय इंटरनेट और डिजिटल तकनीक का है। मोबाइल फोन, सोशल मीडिया, वेबसाइटों और अन्य डिजिटल माध्यमों पर हिंदी का प्रयोग लगातार बढ़ रहा है। शिक्षा, समाचार, मनोरंजन और जनसंचार के क्षेत्र में हिंदी की पहुंच पहले की अपेक्षा काफी व्यापक हुई है।
वक्ताओं ने कहा कि हिंदी को केवल साहित्य और भावनाओं की भाषा तक सीमित नहीं रखना चाहिए। इसे आधुनिक ज्ञान-विज्ञान, तकनीक, रोजगार और डिजिटल दुनिया से भी जोड़ना आवश्यक है। युवा पीढ़ी यदि हिंदी का अधिक से अधिक प्रयोग करे तो हिंदी को नई पीढ़ी के बीच और मजबूत स्थान मिल सकता है। हिंदी दिवस ने दिया एकता और सम्मान का संदेश श्री विश्वनाथ पीजी कॉलेज में आयोजित हिंदी दिवस समारोह केवल एक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहा, बल्कि विद्यार्थियों और शिक्षकों के बीच हिंदी के प्रति जागरूकता और भारतीय भाषाओं के सम्मान का संदेश भी लेकर आया। कार्यक्रम में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि भारत की अलग-अलग भाषाएं देश की सांस्कृतिक पहचान हैं और हिंदी उनके बीच संवाद की महत्वपूर्ण कड़ी बन सकती है। सभी भाषाओं का सम्मान करते हुए हिंदी को आगे बढ़ाना ही देश की समृद्ध संस्कृति और एकता को मजबूत करने का मार्ग है। समारोह के माध्यम से विद्यार्थियों को यह संदेश दिया गया कि हिंदी का प्रयोग केवल हिंदी दिवस तक सीमित न रहे,बल्कि पढ़ाई, लेखन, संवाद और दैनिक जीवन में भी हिंदी का अधिक से अधिक प्रयोग किया जाए।
अंत में कहा गया कि भारत की ताकत उसकी विविधता में है और भाषाओं के प्रति सम्मान उस विविधता को और मजबूत करता है। हिंदी देश के अलग-अलग क्षेत्रों के लोगों को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण भाषा के रूप में अपनी भूमिका निभाती रहेगी

संवाददाता — दिनेश सिंह अग्निवंशी

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