बेलवारे बैंक में सीबीआई का शिकंजा! किसान से रिश्वत के आरोप में मैनेजर पकड़े गए
सुलतानपुर : दोस्तपुर थाना क्षेत्र के बेलवारे स्थित ग्रामीण बैंक में मंगलवार को सीबीआई टीम की कार्रवाई से पूरे इलाके में हलचल मच गई। भरथुआ गांव निवासी गौरव सिंह की शिकायत पर पहुंची सीबीआई टीम ने दोपहर करीब 12 बजे से रात 10 बजे तक लगभग 10 घंटे बैंक परिसर में जांच-पड़ताल की। मामला मत्स्य पालन के लिए 1 लाख 15 हजार रुपये के ऋण की फाइल पास कराने के नाम पर कथित रिश्वत मांगने से जुड़ा बताया जा रहा है।
कार्रवाई के दौरान बैंक मैनेजर प्रवीण कुमार को कथित तौर पर 5 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए पकड़े जाने की जानकारी सामने आई है। इसके बाद सीबीआई टीम ने बैंक के दस्तावेजों, ऋण फाइल और संबंधित रिकॉर्ड की पड़ताल की। कार्रवाई के दौरान फील्ड ऑफिसर अनुराग सिंह और चपरासी रशीद को भी टीम अपने साथ ले गई। हालांकि, इन सभी की भूमिका और मामले में उनकी वास्तविक स्थिति जांच पूरी होने तथा आधिकारिक कार्रवाई के बाद ही स्पष्ट होगी।
25 हजार से शुरू हुई बात, 5 हजार पर पहुंचा मामला
शिकायत के अनुसार मत्स्य पालन से संबंधित ऋण फाइल को आगे बढ़ाने और स्वीकृति की प्रक्रिया के नाम पर पहले 25 हजार रुपये मांगे जाने का आरोप लगाया गया था। बाद में अतिरिक्त 5 हजार रुपये की मांग किए जाने की बात सामने आई। शिकायत के आधार पर जांच एजेंसी ने कार्रवाई की और बैंक पहुंचकर मामले की पड़ताल शुरू की।
सीबीआई की कार्रवाई के दौरान बैंक मैनेजर को कथित तौर पर 5 हजार रुपये लेते हुए पकड़े जाने की जानकारी सामने आई। इसके बाद टीम ने बैंक में लंबे समय तक दस्तावेजों और संबंधित रिकॉर्ड की जांच की।
10 घंटे तक बैंक में चली जांच
सीबीआई टीम ने बैंक में करीब 10 घंटे तक जांच की। इस दौरान ऋण फाइल, आवेदन से संबंधित दस्तावेज और मामले से जुड़े अन्य रिकॉर्ड खंगाले जाने की जानकारी सामने आई है।
लंबे समय तक चली कार्रवाई के कारण बैंक कर्मचारियों के साथ-साथ आसपास के लोगों में भी पूरे मामले को लेकर चर्चा बनी रही। हालांकि जांच के दौरान सीबीआई को वास्तव में क्या-क्या तथ्य मिले और किन दस्तावेजों को अपने कब्जे में लिया गया, इसकी विस्तृत आधिकारिक जानकारी अभी सामने आना बाकी है।
फील्ड ऑफिसर और चपरासी को भी साथ ले गई टीम
कार्रवाई के दौरान बैंक मैनेजर प्रवीण कुमार के अलावा फील्ड ऑफिसर अनुराग सिंह और चपरासी रशीद को भी सीबीआई टीम अपने साथ लेकर गई। इससे मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चाएं और तेज हो गईं।
हालांकि, किसी कर्मचारी की भूमिका को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने से पहले निकालना उचित नहीं होगा। जांच एजेंसी की पूछताछ और रिकॉर्ड की पड़ताल के बाद ही स्पष्ट होगा कि मामले में किसकी क्या भूमिका रही।
सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचे थाना प्रभारी
सीबीआई की कार्रवाई की जानकारी मिलने पर दोस्तपुर थाना प्रभारी नारद मुनि सिंह भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने मौके पर मौजूद टीम का सत्यापन किया। सत्यापन के बाद टीम सही पाए जाने की जानकारी सामने आई, जिसके बाद सीबीआई ने अपनी कार्रवाई जारी रखी।
स्थानीय पुलिस की मौजूदगी के बीच सीबीआई टीम ने बैंक परिसर में अपनी जांच पूरी की।
दूसरे बैंकों को लेकर भी उठे सवाल
बेलवारे ग्रामीण बैंक में हुई सीबीआई कार्रवाई के बाद दोस्तपुर क्षेत्र में बैंकिंग व्यवस्था और ऋण प्रक्रिया को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। क्षेत्र में कई बैंक संचालित हैं और किसान, मत्स्य पालक, छोटे व्यापारी तथा अन्य जरूरतमंद लोग ऋण योजनाओं के माध्यम से आर्थिक सहायता लेते हैं।
कुछ स्थानीय लोगों की ओर से ऋण प्रक्रिया में अनावश्यक देरी या अतिरिक्त रकम मांगे जाने जैसी शिकायतों की चर्चा जरूर सामने आ रही है, लेकिन इन व्यापक आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए किसी अन्य बैंक या कर्मचारी के खिलाफ बिना आधिकारिक जांच और प्रमाण के आरोप लगाना उचित नहीं होगा।
यदि भविष्य में किसी बैंक से संबंधित कोई ठोस शिकायत सामने आती है और जांच एजेंसी को उसके समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं, तभी आगे की कार्रवाई या जांच का दायरा बढ़ने की स्थिति बन सकती है।
क्या सिर्फ एक ऋण फाइल तक सीमित रहेगा मामला?
अब बड़ा सवाल यह है कि सीबीआई की कार्रवाई केवल 1 लाख 15 हजार रुपये के मत्स्य पालन ऋण से संबंधित शिकायत तक सीमित रहेगी या जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर इसका दायरा आगे बढ़ेगा।
यदि बैंक के रिकॉर्ड की जांच में अन्य मामलों से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य सामने आते हैं तो नियमानुसार उनकी भी पड़ताल हो सकती है। वहीं, यदि जांच केवल शिकायतकर्ता की ऋण फाइल तक सीमित पाई जाती है तो कार्रवाई उसी प्रकरण के अनुसार आगे बढ़ेगी।
फिलहाल इसका उत्तर जांच पूरी होने और आधिकारिक रिपोर्ट सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा।
किसानों के लिए भी उठे पारदर्शिता के सवाल
इस कार्रवाई के बाद ग्रामीण क्षेत्र में बैंक से ऋण लेने वाले किसानों के बीच ऋण प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। किसान जब किसी योजना के तहत ऋण के लिए बैंक पहुंचता है तो उसे आवेदन से लेकर स्वीकृति तक निर्धारित प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है।
ऐसे में यदि किसी स्तर पर रिश्वत मांगने की शिकायत सामने आती है तो उसकी निष्पक्ष जांच और दोष सिद्ध होने पर नियमानुसार कार्रवाई महत्वपूर्ण हो जाती है। स्थानीय स्तर पर लोगों की मांग है कि पात्र लाभार्थियों की ऋण फाइलों का निस्तारण निर्धारित नियमों के अनुसार हो और किसी भी अवैध मांग की शिकायत मिलने पर उसका परीक्षण किया जाए।
कार्रवाई के बाद पूरे क्षेत्र में चर्चा
मंगलवार को दोपहर करीब 12 बजे से रात 10 बजे तक चली सीबीआई की कार्रवाई ने बेलवारे के साथ आसपास के इलाके में भी चर्चा का माहौल बना दिया। बैंक परिसर में लंबे समय तक जांच और तीन कर्मचारियों को टीम द्वारा साथ ले जाने की जानकारी के बाद लोग मामले के अगले चरण को लेकर जानकारी जुटाते रहे।
हालांकि, जांच से जुड़े आधिकारिक तथ्यों के सामने आने तक अफवाहों और अपुष्ट चर्चाओं पर भरोसा करना उचित नहीं होगा।
अब जांच के नतीजे पर टिकी निगाह
बेलवारे ग्रामीण बैंक का पूरा मामला गौरव सिंह की शिकायत, 1 लाख 15 हजार रुपये के मत्स्य पालन ऋण और कथित 5 हजार रुपये की रिश्वत से जुड़ा बताया जा रहा है। कार्रवाई में बैंक मैनेजर प्रवीण कुमार के साथ फील्ड ऑफिसर अनुराग सिंह और चपरासी रशीद को भी सीबीआई टीम अपने साथ लेकर गई।
मौके पर पहुंचे दोस्तपुर थाना प्रभारी नारद मुनि सिंह ने सीबीआई टीम का सत्यापन किया, जिसके बाद टीम ने अपनी कार्रवाई जारी रखी।
अब पूरे मामले में निगाहें जांच के निष्कर्ष पर टिकी हैं। जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि आरोपों में किन लोगों की क्या भूमिका रही, कौन-कौन से दस्तावेज और साक्ष्य सामने आए तथा आगे किस प्रकार की कानूनी कार्रवाई की जाती है।
फिलहाल बेलवारे ग्रामीण बैंक में हुई करीब 10 घंटे की सीबीआई कार्रवाई ने क्षेत्र में ऋण प्रक्रिया, बैंकिंग व्यवस्था और किसानों की शिकायतों को लेकर चर्चा जरूर तेज कर दी है।
रिपोर्टर : दिनेश सिंह अग्निवंशी
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