बिजेथुआ महावीरन धाम में सफाई व्यवस्था पर उठे सवाल, जिम्मेदारों से जवाब की मांग

सूरापुर,सुल्तानपुर : सुल्तानपुर जनपद के सूरापुर स्थित प्रसिद्ध धार्मिक स्थल बिजेथुआ महावीरन धाम में मंगलवार और शनिवार को हजारों की संख्या में श्रद्धालु भगवान हनुमान के दर्शन-पूजन के लिए पहुंचते हैं। भक्त दूर-दराज के क्षेत्रों से आकर बजरंगबली के चरणों में शीश झुकाते हैं और जय श्रीराम, जय हनुमान के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठता है। लेकिन इतने महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल पर मकड़ी कुंड और आसपास की साफ-सफाई को लेकर उठ रही शिकायतें धाम प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रही हैं।
धाम के अध्यक्ष की जिम्मेदारी है कि श्रद्धालुओं की सुविधाओं और परिसर की स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया जाए। जब किसी धार्मिक स्थल पर हजारों लोग नियमित रूप से पहुंचते हैं, तो वहां साफ-सफाई, कचरा निस्तारण और मूलभूत सुविधाओं की निगरानी को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। श्रद्धालुओं की शिकायतों का समाधान करना और व्यवस्था में सुधार लाना धाम प्रबंधन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
अध्यक्ष जी, जब मंगलवार और शनिवार को उमड़ती है भीड़, तो पहले से क्यों नहीं होती सफाई?
बिजेथुआ महावीरन धाम में मंगलवार और शनिवार को श्रद्धालुओं की भारी भीड़ लगना कोई नई बात नहीं है। इन दोनों दिनों में भक्तों का आवागमन काफी बढ़ जाता है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब भीड़ का अनुमान पहले से रहता है, तो सोमवार और शुक्रवार को ही विशेष सफाई अभियान चलाकर परिसर को स्वच्छ क्यों नहीं बनाया जाता?
मकड़ी कुंड, स्नान स्थल, मंदिर परिसर, श्रद्धालुओं के आवागमन वाले रास्तों और दुकानों के आसपास नियमित सफाई होना जरूरी है। यदि सफाई व्यवस्था में कमी है, तो उसे दूर करने के लिए अध्यक्ष और संबंधित जिम्मेदारों को पहल करनी चाहिए। केवल श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने और पूजा-अर्चना होने से किसी धार्मिक स्थल की व्यवस्था पूरी नहीं मानी जा सकती; भक्तों को स्वच्छ वातावरण उपलब्ध कराना भी उतना ही आवश्यक है।
मकड़ी कुंड की सफाई को लेकर सवाल, हजारों भक्तों की आस्था से जुड़ा मामला
मकड़ी कुंड में मंगलवार और शनिवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु स्नान करने पहुंचते हैं। इसके बाद वे हनुमान जी के दर्शन कर पूजा-अर्चना करते हैं। धार्मिक आस्था से जुड़े इस स्थान पर सफाई और रखरखाव की विशेष व्यवस्था होनी चाहिए।
स्थानीय स्तर पर सफाई को लेकर उठ रही शिकायतों के बीच सवाल है कि मकड़ी कुंड की नियमित सफाई कौन सुनिश्चित कर रहा है? वहां कचरा जमा होने से रोकने की क्या व्यवस्था है? स्नान स्थल और उसके आसपास स्वच्छता बनाए रखने के लिए जिम्मेदार कर्मचारियों की नियमित निगरानी होती है या नहीं?
धाम के अध्यक्ष और प्रबंधन को इन सवालों पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। यदि व्यवस्था में कमी है, तो उसे स्वीकार कर सुधार की दिशा में कदम उठाना चाहिए। हजारों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े स्थान पर स्वच्छता को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
प्रधानमंत्री के स्वच्छ भारत अभियान और मुख्यमंत्री के स्वच्छता संदेश की भावना पर अमल जरूरी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत अभियान ने देशभर में स्वच्छता को जनभागीदारी का महत्वपूर्ण विषय बनाया है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी सार्वजनिक स्थलों की स्वच्छता और बेहतर व्यवस्था पर जोर देते रहे हैं। ऐसे में धार्मिक स्थलों पर भी स्वच्छता बनाए रखने के लिए स्थानीय स्तर पर प्रभावी प्रयास होना आवश्यक है।
बिजेथुआ महावीरन धाम में सफाई व्यवस्था को लेकर उठ रहे सवालों का समाधान करना संबंधित प्रबंधन और जिम्मेदार विभागों की प्राथमिकता होनी चाहिए। स्वच्छता अभियान का उद्देश्य तभी सार्थक होगा, जब धार्मिक स्थलों, सार्वजनिक स्थानों और श्रद्धालुओं के आवागमन वाले क्षेत्रों में भी नियमित सफाई दिखाई देगी।
धाम के अध्यक्ष से अपेक्षा है कि वे इस विषय को गंभीरता से लें और सफाई व्यवस्था की नियमित निगरानी सुनिश्चित करें। यदि सफाई का दायित्व किसी अन्य विभाग या ठेकेदार के पास है, तो उसके साथ समन्वय बनाकर आवश्यक सुधार कराए जाएं।
फूल-माला और मिठाई की दुकानों पर रौनक, लेकिन कचरा प्रबंधन पर भी ध्यान देना जरूरी
धाम में मंगलवार और शनिवार को फूल-माला, मिठाई, प्रसाद और पूजा सामग्री की दुकानों पर श्रद्धालुओं की अच्छी-खासी भीड़ रहती है। भक्त बजरंगबली के लिए फूल-माला खरीदते हैं, मिठाइयां और प्रसाद लेते हैं तथा विधि-विधान से पूजा करते हैं। इससे स्थानीय दुकानदारों को कारोबार का अवसर मिलता है और पूरे क्षेत्र में धार्मिक गतिविधियों की रौनक बनी रहती है।
लेकिन दुकानों के आसपास स्वच्छता बनाए रखना भी जरूरी है। फूलों के अवशेष, प्रसाद के पैकेट और अन्य कचरे को निर्धारित स्थान पर डलवाने तथा समय से उठवाने की व्यवस्था होनी चाहिए। धाम प्रबंधन को दुकानदारों के साथ समन्वय बनाकर कचरा निस्तारण की प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए।
पुलिस प्रशासन संभाल रहा है भीड़, अब धाम प्रबंधन की जिम्मेदारी पर भी हो ध्यान
मंगलवार और शनिवार को भारी भीड़ के बीच पुलिस प्रशासन श्रद्धालुओं की सुरक्षा, भीड़ नियंत्रण और आवागमन व्यवस्थित रखने का प्रयास करता है। चौकी इंचार्ज के नेतृत्व में पुलिसकर्मी व्यवस्था संभालते हैं और सुरक्षा के लिए पुलिस बल तैनात रहता है। कैमरों के माध्यम से निगरानी भी की जाती है।
पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था के साथ धाम प्रबंधन को भी अपनी जिम्मेदारी प्रभावी ढंग से निभानी चाहिए। पुलिसकर्मी भीड़ को नियंत्रित कर सकते हैं, लेकिन परिसर की नियमित सफाई, मकड़ी कुंड की देखरेख और कचरा निस्तारण के लिए संबंधित प्रबंधन तथा सफाई व्यवस्था से जुड़े कर्मचारियों की सक्रिय भूमिका जरूरी है।
पुलिस चौकी के आसपास और श्रद्धालुओं के आवागमन वाले रास्तों की स्वच्छता पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। सुरक्षा और सफाई, दोनों व्यवस्थाएं बेहतर होंगी तभी भक्तों को सुविधाजनक वातावरण मिल सकेगा।
अध्यक्ष से सीधे सवाल—कब सुधरेगी सफाई व्यवस्था?
धाम के अध्यक्ष से श्रद्धालुओं की सुविधाओं और साफ-सफाई को लेकर कुछ महत्वपूर्ण सवालों के जवाब अपेक्षित हैं।
क्या मकड़ी कुंड और पूरे धाम परिसर की नियमित सफाई की निगरानी की जाती है?
मंगलवार और शनिवार की भारी भीड़ से पहले सोमवार और शुक्रवार को विशेष सफाई अभियान क्यों नहीं चलाया जाता?
परिसर, दुकानों के आसपास और पुलिस चौकी के निकट सफाई सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी किसकी है?
सफाई व्यवस्था में शिकायत मिलने पर उसे दूर करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं?
क्या श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए नियमित निरीक्षण और सफाई का निश्चित कार्यक्रम बनाया जा सकता है?
इन सवालों का उद्देश्य धार्मिक स्थल की व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता को सामने लाना है। अध्यक्ष और संबंधित जिम्मेदारों का पक्ष भी सामने आना चाहिए, ताकि सफाई व्यवस्था की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।
श्रद्धालुओं को दर्शन के साथ स्वच्छ वातावरण भी मिलना चाहिए
बिजेथुआ महावीरन धाम हजारों लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र है। यहां आने वाले श्रद्धालु विश्वास और श्रद्धा के साथ बजरंगबली के दर्शन करते हैं। ऐसे में परिसर की स्वच्छता और सुविधाओं की अनदेखी नहीं होनी चाहिए।
अध्यक्ष और धाम प्रबंधन को चाहिए कि वे सफाई व्यवस्था का निरीक्षण कर कमियों को दूर करें। मकड़ी कुंड की नियमित सफाई, कचरे का उचित निस्तारण, रास्तों की सफाई और भीड़ वाले दिनों से पहले विशेष अभियान चलाने की व्यवस्था बनाई जाए। संबंधित विभागों से समन्वय कर यह भी सुनिश्चित किया जाए कि सफाई व्यवस्था केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि परिसर में दिखाई भी दे।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब मंगलवार और शनिवार को हजारों श्रद्धालु हनुमान जी के दर्शन करने पहुंचते हैं, तो उनकी सुविधा और स्वच्छता सुनिश्चित करने के लिए पहले से ठोस तैयारी क्यों नहीं की जाती?
अब जरूरत है कि धाम प्रबंधन इस मामले को गंभीरता से ले, श्रद्धालुओं की शिकायतों को सुने और सफाई व्यवस्था में सुधार के लिए ठोस कदम उठाए। बजरंगबली के दरबार में आने वाले भक्तों को स्वच्छ, सुरक्षित और व्यवस्थित वातावरण मिलना चाहिए। यही श्रद्धालुओं की अपेक्षा है और धार्मिक स्थल की गरिमा बनाए रखने के लिए भी आवश्यक है 

संवाददाता : दिनेश सिंह राजपूत

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