पूर्वांचल एक्सप्रेसवे की सुरक्षा पर सवाल, रॉन्ग साइड से कैसे पहुंची गाड़ी? CM योगी से सख्त कार्रवाई की मांग

दोस्तपुर,सुल्तानपुर : पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर शनिवार दोपहर एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। दोस्तपुर थाना क्षेत्र में बढ़ौली गांव के पास माइलस्टोन 162.7 पर आजमगढ़ से लखनऊ की ओर जा रही अर्टिगा कार की सामने से आ रही स्विफ्ट कार से टक्कर हो गई। आरोप है कि स्विफ्ट कार गलत दिशा से आ रही थी। हादसे में कुल नौ लोग घायल हुए। घायलों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र दोस्तपुर पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने दो लोगों को मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद पूर्वांचल एक्सप्रेसवे की सुरक्षा, कैमरों, कंट्रोल रूम और सुरक्षा कर्मियों की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र दोस्तपुर में घायलों का उपचार, दो की मौत
हादसे की सूचना मिलते ही यूपीडा की टीम, पुलिस और 112 सहित कई एंबुलेंस मौके पर पहुंचीं। घायलों को एंबुलेंस की मदद से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र दोस्तपुर लाया गया। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र दोस्तपुर के अधीक्षक अजीत यादव और चिकित्सक डॉ. आजा राम यादव की देखरेख में घायलों को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई। चिकित्सकों ने घायलों का परीक्षण कर उपचार शुरू किया। गंभीर रूप से घायल अशोक कुमार यादव को बेहतर इलाज के लिए जिला अस्पताल अंबेडकर नगर रेफर कर दिया गया। अन्य घायलों का भी उपचार किया गया।
मृतकों के पूरे नाम और पते
हादसे में मृत घोषित किए गए दोनों व्यक्तियों की पहचान इस प्रकार हुई:

अजय कुमार गुप्ता, पुत्र देवेंद्र प्रसाद गुप्ता, निवासी जीतपुर मटियावा, पोस्ट सेमरा मेद्रोल, थाना सेमरा, बिहार।
श्याम बिहारी सिंह, पुत्र टिकोडी सिंह, निवासी वार्ड नंबर 10, नरायनपुर, जिला पश्चिम चंपारण, बिहार।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र दोस्तपुर में चिकित्सकों ने दोनों को मृत घोषित किया। इसके बाद पुलिस ने आवश्यक कानूनी कार्रवाई शुरू की और दोनों मृतकों के शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिए।
घायलों के पूरे नाम और उपलब्ध पते
हादसे में घायल लोगों के नाम और उपलब्ध विवरण निम्नलिखित हैं:

अशोक कुमार यादव, निवासी नरायनपुर, बगहा, जिला बेतिया, बिहार। गंभीर रूप से घायल होने के कारण जिला अस्पताल अंबेडकर नगर रेफर किया गया।
संदीप कुमार यादव, पुत्र सुरेश यादव, निवासी कलंदरपुर, आजमगढ़। इनके हाथ में चोट आई। परिजन उन्हें निजी वाहन से ले गए।
रीता, पत्नी राजेश, निवासी हाइडिल कॉलोनी, सिधारी, आजमगढ़।
दीक्षा, पुत्री रीता।
दीपिक्षा, पुत्री रीता।
गरिमा, पुत्री विनोद, निवासी उमरी, आजमगढ़। वह रीता की बहन की बेटी बताई गई हैं।
कन्हैया, पुत्र ध्यान सिंह, निवासी बिहार। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में उपचार कराया गया।
उपलब्ध जानकारी में सभी घायलों के पूरे पते और कुछ परिजनों के पूरे नाम नहीं दिए गए हैं। इसलिए जिनका पूरा नाम या पता उपलब्ध नहीं है, उनके संबंध में अतिरिक्त जानकारी जोड़ना उचित नहीं होगा।
क्षेत्राधिकारी विनय गौतम पहुंचे, मृतकों के शव पोस्टमार्टम के लिए भेजे गए
दुर्घटना की सूचना मिलने पर क्षेत्राधिकारी कादीपुर विनय गौतम मौके पर पहुंचे और हादसे से संबंधित जानकारी ली। क्षेत्राधिकारी विनय गौतम ने बताया कि दुर्घटना में दो लोगों की मौत हुई है और मृतकों के शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिए गए हैं।
वहीं, दोस्तपुर थाना प्रभारी नारद मुनि सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस टीम ने दुर्घटना के संबंध में जानकारी जुटाई और आवश्यक कानूनी कार्रवाई शुरू की। पुलिस दुर्घटना के वास्तविक कारणों का पता लगाने में जुटी है।
पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर कैमरे और कंट्रोल रूम फिर सवालों के घेरे में इस हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर कैमरे लगाए गए हैं, कंट्रोल रूम से निगरानी की व्यवस्था है और सुरक्षा कर्मियों की तैनाती भी की जाती है, तो कथित तौर पर गलत दिशा से आ रही गाड़ी को समय रहते क्यों नहीं रोका जा सका? यदि स्विफ्ट कार वास्तव में रॉन्ग साइड से आ रही थी, तो क्या इसकी जानकारी निगरानी व्यवस्था तक पहुंची थी? क्या संबंधित कैमरों में वाहन की गतिविधियां रिकॉर्ड हुई थीं? यदि फुटेज उपलब्ध है, तो उसकी जांच कर दुर्घटना से पहले की स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं की जाती?
एक्सप्रेसवे पर तेज रफ्तार वाहनों की निगरानी की जाती है और नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों के चालान भी किए जाते हैं। ऐसे में यह सवाल उठता है कि गलत दिशा में वाहन चलाने जैसी गंभीर स्थिति का पता लगाने और उसे रोकने के लिए क्या व्यवस्था है। आखिर कंट्रोल रूम में निगरानी करने वाले कर्मचारियों और एक्सप्रेसवे पर तैनात सुरक्षा कर्मियों की जिम्मेदारी क्या है? क्या उनकी निगरानी व्यवस्था केवल चालान करने तक सीमित है या दुर्घटनाओं को रोकने के लिए भी प्रभावी कदम उठाए जाते हैं?
यह घटना एक्सप्रेसवे की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जरूरत को सामने लाती है। हालांकि, जांच पूरी होने से पहले किसी अधिकारी, कर्मचारी या सुरक्षा एजेंसी की लापरवाही को निश्चित रूप से जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा। यह स्पष्ट होना चाहिए कि दुर्घटना किन परिस्थितियों में हुई, वाहन गलत दिशा में कैसे पहुंचा और क्या समय रहते कोई कार्रवाई संभव थी।
लखनऊ कंट्रोल रूम और टोल प्लाजा के रिकॉर्ड की जांच जरूरी
दुर्घटना के संबंध में लखनऊ कंट्रोल रूम से भी जानकारी जुटाए जाने की बात सामने आई है। संबंधित टोल प्लाजा के रिकॉर्ड, उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज और निगरानी संबंधी जानकारी की जांच की जानी चाहिए, ताकि पता चल सके कि दोनों वाहन एक्सप्रेसवे पर कहां से दाखिल हुए और दुर्घटना से पहले उनकी आवाजाही किस प्रकार हुई।
यदि किसी वाहन ने गलत दिशा से प्रवेश किया था, तो यह भी जांच का विषय है कि प्रवेश के समय उसे रोकने की कोई व्यवस्था थी या नहीं। संबंधित अधिकारियों को उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर पता लगाना चाहिए कि निगरानी व्यवस्था में कोई कमी तो नहीं रही। यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है, तो जिम्मेदारी तय कर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग
पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर हुए इस दर्दनाक हादसे के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मांग की जा रही है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। एक्सप्रेसवे पर सुरक्षा व्यवस्था, कैमरों की निगरानी, कंट्रोल रूम की कार्यप्रणाली और सुरक्षा कर्मियों की भूमिका की समीक्षा होनी चाहिए। यदि किसी स्तर पर लापरवाही या नियमों की अनदेखी सामने आती है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
इसके साथ ही गलत दिशा में वाहन चलाने जैसी घटनाओं को रोकने के लिए निगरानी व्यवस्था को और प्रभावी बनाने की जरूरत है। उपलब्ध कैमरों और अन्य तकनीकी संसाधनों की कार्यक्षमता की जांच की जाए तथा जहां आवश्यक हो, वहां सुधार किए जाएं, ताकि संभावित दुर्घटनाओं की जानकारी समय रहते मिल सके और लोगों की जान बचाई जा सके।
जनता का सवाल—जब कैमरे लगे हैं तो रॉन्ग साइड वाहन कैसे पहुंचा?
दो लोगों की मौत और कई लोगों के घायल होने की इस घटना ने पूर्वांचल एक्सप्रेसवे की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोग जानना चाहते हैं कि जब एक्सप्रेसवे पर कैमरे, कंट्रोल रूम और सुरक्षा कर्मियों की व्यवस्था मौजूद है, तो कथित रॉन्ग साइड वाहन को समय रहते क्यों नहीं रोका जा सका। क्या निगरानी व्यवस्था में कोई कमी थी? क्या संबंधित कैमरों में वाहन की गतिविधियां रिकॉर्ड हुईं? क्या समय रहते कार्रवाई संभव थी? इन सभी सवालों का जवाब जांच के बाद ही मिल सकेगा।

संवाददाता : दिनेश सिंह अग्निवंशी

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