राम का चरित्र अथाह सागर के समान : श्री हरि प्रपन्नाचार्य
सुल्तानपुर : वल्दीराय सुल्तानपुर तहसील क्षेत्र बल्दीराय के पूरे सुगौटी मजरे बिसांवा में रवि श्याम तिवारी के यहां चल रही रामकथा के चौथे दिन प्रयागराज से पधारे कथा व्यास श्री हरि प्रपन्नाचार्य जी महाराज ने भगवान श्रीराम के आदर्श चरित्र का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान राम का चरित्र अथाह सागर के समान है, जिसमें जीवन जीने की अनगिनत प्रेरणाएं समाहित हैं। आज के समाज को भगवान राम के आदर्शों और उनके बताए मार्ग पर चलने की आवश्यकता है।
महाराज श्री ने कहा कि भगवान राम का जीवन पितृभक्ति, मातृभक्ति, गुरु भक्ति, ब्राह्मणों के प्रति सम्मान, स्त्री के प्रति आदर, भ्रातृप्रेम, देशप्रेम और प्रजाप्रेम का अनुपम उदाहरण है। इन आदर्शों का अनुसरण करके ही समाज में प्रेम, सद्भाव और नैतिक मूल्यों की स्थापना की जा सकती है।
उन्होंने माता कैकेयी के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि रामकथा के प्रत्येक पात्र के चरित्र में गहरी सीख छिपी है। भगवान श्रीराम ने वनवास के दौरान भी अपने कर्तव्यों और लोककल्याण को सर्वोपरि रखा। उनका संपूर्ण जीवन त्याग, मर्यादा, कर्तव्यनिष्ठा और जनकल्याण की प्रेरणा देता है। रामभक्ति का वास्तविक अर्थ केवल पूजा-पाठ तक सीमित रहना नहीं, बल्कि उनके आदर्शों को अपने आचरण में उतारना है।
कथा के समापन पर आयोजक द्वारा व्यासपीठ की आरती की गई तथा श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। कथा आयोजक ने उपस्थित श्रोताओं के प्रति आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर डॉ. डीएस मिश्रा, कमलेश तिवारी, अखिलेश तिवारी, नीरज तिवारी, वीरेंद्र तिवारी, शशिकांत मिश्रा, कालिका प्रसाद तिवारी राधेश्याम उपाध्याय सहित सैकड़ो लोग मौजूद रहे
रिपोर्टर : द्वारका

No Previous Comments found.