दोस्तपुर बाजार में रंगीन आलू बेचने का आरोप, खाद्य विभाग पर सवाल
सुल्तानपुर : दोस्तपुर बाजार में इन दिनों रंगीन आलू की बिक्री को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि कुछ आलू विक्रेता सस्ते दामों पर आलू खरीदकर उसे लाल रंग और गेरू से रंगते हैं। इसके बाद आलू को आकर्षक तरीके से सजाकर ग्राहकों को बेच रहे हैं। बाजार में इस तरह आलू की बिक्री को लेकर लोगों के स्वास्थ्य पर खतरा मंडराने की आशंका जताई जा रही है। वहीं, खाद्य सुरक्षा विभाग और स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं।
आलू आम आदमी की रसोई का अहम हिस्सा है। गरीब से लेकर मध्यमवर्गीय परिवार तक रोजाना आलू का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में यदि आलू को किसी अनुचित रंग या रासायनिक पदार्थ से रंगकर बेचा जा रहा है, तो यह आम जनता के स्वास्थ्य के साथ गंभीर खिलवाड़ हो सकता है। बाजार में आकर्षक दिखने वाले आलू को ग्राहक अच्छी गुणवत्ता का समझकर खरीद लेते हैं, लेकिन उन्हें यह जानकारी नहीं होती कि आलू को किस तरह तैयार किया गया है और उसे रंगने में किन पदार्थों का इस्तेमाल किया गया है।
सस्ते आलू को रंगकर आकर्षक बनाने का कथित खेल
स्थानीय बाजार में चर्चा है कि कुछ दुकानदार सस्ते आलू को लाल रंग और गेरू से रंगकर उसे बेहतर दिखाने का प्रयास कर रहे हैं। सवाल यह है कि आखिर आलू को रंगने की जरूरत क्यों पड़ रही है? क्या यह ग्राहकों को गुमराह करने का तरीका है? यदि आलू प्राकृतिक रूप से अच्छी गुणवत्ता का है, तो उसे कृत्रिम तरीके से आकर्षक बनाने की आवश्यकता क्यों है?
आलू पर इस्तेमाल किए जा रहे रंग की गुणवत्ता और उसकी सुरक्षा की जांच होना बेहद जरूरी है। बिना जांच के किसी भी रंगीन खाद्य पदार्थ को सुरक्षित मानना उचित नहीं है। यदि आलू पर इस्तेमाल किया जा रहा रंग खाद्य उपयोग के लिए स्वीकृत नहीं है, तो यह खाद्य सुरक्षा नियमों का गंभीर उल्लंघन हो सकता है।
खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्यशैली पर सवाल
दोस्तपुर बाजार में कथित रूप से रंगीन आलू की बिक्री के बावजूद खाद्य सुरक्षा विभाग की सक्रियता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। बाजार में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की जांच करना, मिलावट पर रोक लगाना और नियमों का उल्लंघन करने वाले विक्रेताओं के खिलाफ कार्रवाई करना विभाग की जिम्मेदारी है।
ऐसे में सवाल उठता है कि क्या खाद्य सुरक्षा विभाग को इस मामले की जानकारी नहीं है? यदि जानकारी है, तो अब तक जांच क्यों नहीं की गई? क्या बाजार में बिकने वाले आलू के नमूने लिए गए हैं? क्या आलू की आपूर्ति करने वाले थोक विक्रेताओं की पहचान की गई है?
स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी भी है कि लोगों को मिलावटी और असुरक्षित खाद्य पदार्थों से होने वाले संभावित नुकसान के प्रति जागरूक किया जाए। आम जनता की सेहत को नजरअंदाज कर कारोबार करने वालों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
जिलाधिकारी से तत्काल जांच और कार्रवाई की मांग
दोस्तपुर बाजार में रंगीन आलू की बिक्री को लेकर जिलाधिकारी सुल्तानपुर से मांग है कि इस मामले को गंभीरता से लेते हुए खाद्य सुरक्षा विभाग की विशेष टीम गठित कर तत्काल जांच कराई जाए।
जांच के दौरान निम्न बिंदुओं पर विशेष ध्यान दिया जाए—
बाजार में बिक रहे रंगीन आलू के नमूने लेकर प्रयोगशाला में जांच कराई जाए।
आलू को रंगने में इस्तेमाल किए जा रहे रंग और गेरू की गुणवत्ता की जांच हो।
आलू की आपूर्ति करने वाले थोक विक्रेताओं और संबंधित दुकानदारों की पहचान की जाए।
खाद्य सुरक्षा मानकों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित विक्रेताओं के खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए।
बाजार में नियमित निरीक्षण कर यह सुनिश्चित किया जाए कि भविष्य में भी इस प्रकार की कथित गतिविधियां न हों।
आम जनता को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराने के लिए प्रभावी निगरानी व्यवस्था लागू की जाए।
जनता की सेहत से खिलवाड़ करने वालों पर हो कार्रवाई
सरकार लगातार मिलावटखोरी रोकने और लोगों को शुद्ध खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराने की बात करती है। लेकिन यदि बाजार में रंगीन आलू के नाम पर ग्राहकों को गुमराह किया जा रहा है, तो यह प्रशासन के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
आम जनता मेहनत की कमाई से अपने परिवार के लिए खाद्य सामग्री खरीदती है। ऐसे में किसी भी व्यापारी को यह अधिकार नहीं है कि वह खाद्य सुरक्षा मानकों की अनदेखी कर लोगों के स्वास्थ्य को खतरे में डाले।
अब सवाल सीधे जिलाधिकारी और खाद्य सुरक्षा विभाग से है—दोस्तपुर बाजार में रंगीन आलू की बिक्री पर कब लगेगी रोक? रंगीन आलू आखिर कहां से आ रहा है? और ग्राहकों को गुमराह कर ऐसे आलू बेचने वाले दुकानदारों के खिलाफ कब होगी कार्रवाई?
प्रशासन को चाहिए कि मामले की निष्पक्ष जांच कराकर सच्चाई सामने लाए और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए, ताकि दोस्तपुर की जनता को सुरक्षित खाद्य पदार्थ मिल सकें।
जनता की मांग है कि रंगीन आलू की जांच हो, मिलावटखोरी पर रोक लगे और खाद्य सुरक्षा विभाग अपनी जिम्मेदारी निभाए
संवाददाता : दिनेश सिंह अग्निवंशी

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