नई रॉयल एनफील्ड बुलेट में खरीदने के पहले दिन से ब्रेक की खराबी का आरोप
दोस्तपुर/सुलतानपुर : लाखों रुपये खर्च कर नई मोटरसाइकिल खरीदने के बाद यदि उपभोक्ता को पहले दिन से ही ब्रेक जैसी महत्वपूर्ण सुरक्षा प्रणाली में खराबी का सामना करना पड़े और बार-बार शिकायत करने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान न मिले, तो संबंधित कंपनी और डीलरशिप की जवाबदेही पर सवाल उठना स्वाभाविक है। ऐसा ही मामला दोस्तपुर निवासी दिनेश कुमार सिंह का सामने आया है। उन्होंने रॉयल एनफील्ड कंपनी और सौरभ ऑटोमोबाइल्स, अकबरपुर के खिलाफ अपनी शिकायत को लेकर मोर्चा खोल दिया है।
दिनेश कुमार सिंह ने 6 मार्च 2025 को सौरभ ऑटोमोबाइल्स, अकबरपुर से रॉयल एनफील्ड बुलेट मिलिट्री ब्लैक 350 खरीदी थी। उनका आरोप है कि नई मोटरसाइकिल खरीदने के तुरंत बाद से ही ब्रेक लगाने पर तेज चिल्लाने जैसी आवाज आने लगी। शुरुआत से ही इस समस्या की शिकायत संबंधित डीलरशिप और कंपनी से की जाती रही, लेकिन बार-बार सर्विस सेंटर जाने और ब्रेक से जुड़े कई पार्ट बदलवाने के बाद भी समस्या समाप्त नहीं हुई।
शिकायतकर्ता का कहना है कि उन्होंने कंपनी के टोल-फ्री नंबर पर कुल 29 बार शिकायत दर्ज कराई। इसके बावजूद उन्हें कोई स्थायी समाधान नहीं मिला। मामला इतना गंभीर हो गया कि ब्रेक जाम होने के कारण उनकी मोटरसाइकिल अनियंत्रित होकर सड़क किनारे गड्ढे में जा गिरी। गनीमत रही कि वह इस घटना में सुरक्षित बच गए।
अब उपभोक्ता ने रॉयल एनफील्ड कंपनी और सौरभ ऑटोमोबाइल्स के खिलाफ उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया है। उनका आरोप है कि कंपनी और डीलरशिप की ओर से लगातार शिकायतों के बावजूद उनकी समस्या को गंभीरता से नहीं लिया गया।
नई बुलेट खरीदने के बाद से ही शुरू हुई परेशानी
दिनेश कुमार सिंह का कहना है कि उन्होंने रॉयल एनफील्ड की नई बुलेट इस भरोसे के साथ खरीदी थी कि उन्हें बेहतर गुणवत्ता और सुरक्षित सफर मिलेगा। लेकिन खरीदने के तुरंत बाद ही ब्रेक में समस्या सामने आने लगी।
ब्रेक दबाने पर तेज आवाज आने लगी। उन्होंने इस समस्या की जानकारी सौरभ ऑटोमोबाइल्स और कंपनी को दी। इसके बाद कई बार मोटरसाइकिल को सर्विस सेंटर ले जाया गया, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका।
उनका सवाल है कि जब नई मोटरसाइकिल में खरीदने के समय से ही खराबी सामने आ रही थी, तो डीलरशिप ने वाहन की पूरी तकनीकी जांच कराकर समस्या का समाधान क्यों नहीं किया? आखिर ग्राहक नई गाड़ी खरीदता है या बार-बार सर्विस सेंटर के चक्कर लगाने के लिए?
सुलतानपुर और अकबरपुर के सर्विस सेंटरों के चक्कर, पार्ट बदलने के बाद भी नहीं सुधरी बुलेट
शिकायतकर्ता के मुताबिक, ब्रेक की खराबी को लेकर उनकी मोटरसाइकिल कई बार सुलतानपुर और अकबरपुर स्थित सर्विस सेंटरों पर पहुंची। वहां वाहन की जांच की गई और ब्रेक शू सहित ब्रेक से जुड़े अन्य पार्ट भी बदले गए।
इसके बावजूद ब्रेक लगाने पर तेज आवाज आने की समस्या बनी रही। दिनेश कुमार सिंह का आरोप है कि कई बार मरम्मत कराने और पार्ट बदलवाने के बाद भी उन्हें संतोषजनक समाधान नहीं दिया गया।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब सर्विस सेंटरों पर बार-बार वाहन की जांच की गई और पार्ट बदले गए, तो फिर समस्या क्यों बनी रही? क्या सर्विस सेंटर की जिम्मेदारी केवल पार्ट बदलकर मोटरसाइकिल ग्राहक को वापस कर देना है? वाहन की सुरक्षा और उसकी तकनीकी खराबी को पूरी तरह दूर करना किसकी जिम्मेदारी है?
कंपनी के टोल-फ्री नंबर पर 29 बार शिकायत, फिर भी नहीं मिला स्थायी समाधान
दिनेश कुमार सिंह के मुताबिक, उन्होंने रॉयल एनफील्ड कंपनी के टोल-फ्री नंबर पर कुल 29 बार शिकायत दर्ज कराई। हर बार ब्रेक की खराबी और तेज आवाज की समस्या बताकर समाधान की मांग की गई।
उनके पास उपलब्ध प्रमुख शिकायत संदेशों में निम्न शिकायत संख्याएं दर्ज हैं—
4 जुलाई 2025 — CAS-89802980-B8K1Z6
16 अगस्त 2025 — CAS-92135193-N5M4L2
28 अक्टूबर 2025 — CAS-96339469-S5D3Q0
29 अक्टूबर 2025 — CAS-96427566-Y5K3P2
20 नवंबर 2025 — CAS-97634537-M5Q7Z3
28 नवंबर 2025 — CAS-98057620-X6K0V9
शिकायतकर्ता का कहना है कि ये उपलब्ध शिकायत संदेशों में दर्ज प्रमुख शिकायतें हैं। कुल 29 बार शिकायत करने के बाद भी उन्हें ब्रेक की खराबी से राहत नहीं मिली।
ब्रेक जाम होने से गड्ढे में जा गिरी मोटरसाइकिल, बाल-बाल बची जान
दिनेश कुमार सिंह के अनुसार, 13 तारीख की शाम करीब 6:30 बजे वह अपनी दुकान की ओर जा रहे थे। इसी दौरान अचानक सड़क पर एक जानवर आ गया। उससे बचने और मोटरसाइकिल रोकने के लिए जैसे ही उन्होंने ब्रेक लगाया, ब्रेक जाम हो गई। इसके चलते मोटरसाइकिल अनियंत्रित होकर सड़क किनारे गड्ढे में जा गिरी।
इस घटना में वह बाल-बाल बच गए, जबकि मोटरसाइकिल को नुकसान पहुंचा। उनका कहना है कि यदि उस समय सड़क पर अधिक यातायात होता, तो गंभीर दुर्घटना भी हो सकती थी।
उन्होंने सवाल उठाया कि ब्रेक किसी भी मोटरसाइकिल का सबसे महत्वपूर्ण सुरक्षा उपकरण है। यदि उसमें लगातार खराबी आ रही थी और इसकी जानकारी कंपनी तथा डीलरशिप को पहले से थी, तो समय रहते इसका स्थायी समाधान क्यों नहीं किया गया?
ट्विटर पर शिकायत के बाद 15 दिन का आश्वासन, 25 दिन बाद भी कार्रवाई नहीं
टोल-फ्री नंबर पर लगातार शिकायतों के बावजूद राहत नहीं मिलने पर दिनेश कुमार सिंह ने सोशल मीडिया मंच ट्विटर (एक्स) पर भी रॉयल एनफील्ड कंपनी के सामने अपनी समस्या उठाई।
उनके अनुसार, सोशल मीडिया पर शिकायत के बाद कंपनी की ओर से 15 दिन के भीतर समस्या का समाधान करने का आश्वासन दिया गया था। लेकिन शिकायतकर्ता का आरोप है कि 25 दिन बीत जाने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
न तो ब्रेक की खराबी का स्थायी समाधान किया गया और न ही उन्हें कोई संतोषजनक जवाब मिला। उनका कहना है कि कंपनी की ओर से समय-सीमा निर्धारित करके आश्वासन दिया गया, लेकिन निर्धारित समय बीतने के बाद भी समस्या जस की तस बनी रही।
कंपनी के एरिया मैनेजर का भी आया फोन, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल अनुशासन की बात
दिनेश कुमार सिंह का आरोप है कि ट्विटर और अन्य सोशल मीडिया मंचों पर कई बार शिकायत उठाने के बाद रॉयल एनफील्ड कंपनी की ओर से फोन आया। इस दौरान कंपनी के एरिया मैनेजर ने भी उनसे संपर्क किया।
शिकायतकर्ता के मुताबिक, उन्होंने एरिया मैनेजर को मोटरसाइकिल खरीदने के बाद से आ रही ब्रेक की समस्या, 29 बार की गई शिकायतों, सर्विस सेंटरों के चक्कर और ब्रेक जाम होने से हुई दुर्घटना की पूरी जानकारी दी।
लेकिन उनका आरोप है कि एरिया मैनेजर से बातचीत होने के बावजूद उनकी मूल समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया। कार्रवाई के नाम पर केवल अनुशासन बनाए रखने की बात कही गई, जबकि ब्रेक की खराबी और उपभोक्ता की सुरक्षा से जुड़े गंभीर मुद्दे पर कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया।
दिनेश कुमार सिंह ने सवाल उठाया कि जब शिकायत कंपनी के एरिया मैनेजर तक पहुंच चुकी थी, तब भी समस्या का समाधान क्यों नहीं हुआ? क्या कंपनी के जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका केवल फोन करके बातचीत करना और अनुशासन की बात कहना है, या उपभोक्ता की शिकायत का समाधान कराना भी उनकी जिम्मेदारी है?
उनका कहना है कि ग्राहक अपनी मेहनत की कमाई से नई मोटरसाइकिल खरीदता है। ऐसे में उसकी सुरक्षा से जुड़ी शिकायत को केवल बातचीत और आश्वासन तक सीमित रखना उचित नहीं है। कंपनी को यह बताना चाहिए कि शिकायत के बाद वास्तव में क्या तकनीकी कार्रवाई की गई और समस्या का स्थायी समाधान कब होगा।
27 फरवरी 2026 को उपभोक्ता आयोग में दाखिल किया मुकदमा
कंपनी और डीलरशिप से राहत नहीं मिलने का आरोप लगाते हुए दिनेश कुमार सिंह ने अधिवक्ता रोहित शर्मा के माध्यम से कानूनी कार्रवाई की।
उपलब्ध प्राप्ति-पत्र के अनुसार, 27 फरवरी 2026 को सुलतानपुर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में मुकदमा दाखिल किया गया। उपलब्ध दस्तावेज में विपक्षी पक्ष के रूप में सौरभ ऑटोमोबाइल्स दर्ज है।
शिकायतकर्ता के अनुसार, विपक्षी पक्ष को आयोग की ओर से नोटिस का तामिला हो चुका है। वर्तमान में पत्रावली जवाब-दावा के लिए नियत है। उनका कहना है कि अभी तक उन्हें कंपनी की ओर से कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला है।
अब मामला उपभोक्ता आयोग में विचाराधीन है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विपक्षी पक्ष अपनी ओर से क्या जवाब प्रस्तुत करता है और आयोग आगे क्या कार्रवाई करता है।
सौरभ ऑटोमोबाइल्स और रॉयल एनफील्ड कंपनी से उपभोक्ता के सीधे सवाल
दिनेश कुमार सिंह ने सौरभ ऑटोमोबाइल्स, अकबरपुर और रॉयल एनफील्ड कंपनी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए जवाब मांगा है।
नई मोटरसाइकिल खरीदने के तुरंत बाद से ही ब्रेक में खराबी क्यों सामने आई?
29 बार शिकायत करने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान क्यों नहीं किया गया?
सुलतानपुर और अकबरपुर के सर्विस सेंटरों पर बार-बार जांच और पार्ट बदलने के बाद भी समस्या क्यों बनी रही?
ब्रेक जाम होने से दुर्घटना की स्थिति बनने के बाद भी प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
ट्विटर पर 15 दिन में समाधान का आश्वासन देने के बाद 25 दिन बीतने पर भी कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
कंपनी के एरिया मैनेजर से बातचीत होने के बाद भी ब्रेक की खराबी दूर करने के लिए क्या कदम उठाए गए?
उपभोक्ता आयोग में मुकदमा दाखिल होने के बाद विपक्षी पक्ष अपनी जिम्मेदारी और शिकायतों पर क्या जवाब देगा?
उपभोक्ता ने की तकनीकी जांच, स्थायी समाधान और मुआवजे की मांग
दिनेश कुमार सिंह का कहना है कि उन्होंने रॉयल एनफील्ड की मोटरसाइकिल पर भरोसा करके अपनी मेहनत की कमाई खर्च की थी। लेकिन नई गाड़ी खरीदने के बाद से ही उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ा।
उनकी मांग है कि मोटरसाइकिल के ब्रेक सिस्टम की निष्पक्ष तकनीकी जांच कराई जाए। खराबी का स्थायी समाधान किया जाए, बार-बार सर्विस सेंटर के चक्कर लगाने से हुई परेशानी और आर्थिक नुकसान के लिए उचित राहत तथा मुआवजा दिया जाए। साथ ही इस मामले में जिम्मेदार पक्षों की जवाबदेही भी तय की जाए।
यह मामला केवल एक मोटरसाइकिल का नहीं, उपभोक्ता की सुरक्षा और अधिकारों का सवाल
रॉयल एनफील्ड बुलेट की ब्रेक खराबी को लेकर सामने आया यह मामला अब केवल एक ग्राहक की शिकायत तक सीमित नहीं रह गया है। यह वाहन की गुणवत्ता, बिक्री के बाद मिलने वाली सेवा, उपभोक्ता की सुरक्षा और कंपनी तथा डीलरशिप की जवाबदेही से जुड़े कई सवाल खड़े करता है।
एक तरफ उपभोक्ता का दावा है कि उसने 29 बार शिकायत की, कई बार सर्विस सेंटर के चक्कर लगाए, सोशल मीडिया पर आवाज उठाई और कंपनी के एरिया मैनेजर से भी बातचीत की। दूसरी तरफ मामला अब जिला उपभोक्ता आयोग तक पहुंच चुका है।
अब देखना होगा कि रॉयल एनफील्ड कंपनी और सौरभ ऑटोमोबाइल्स, अकबरपुर इस मामले में क्या जवाब देते हैं और उपभोक्ता को उसकी शिकायत का स्थायी समाधान कब मिलता है
रिपोर्टर : दिनेश सिंह अग्निवंशी

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