रामा बसों की मनमानी पर फूटा लोगों का गुस्सा! साइकिल से स्कूल जा रही 12वीं की छात्रा को मारी टक्कर

सुल्तानपुर : दोस्तपुर के छावनी मोहल्ले में रामा बस की टक्कर से 17 वर्षीय छात्रा के गंभीर रूप से घायल होने के बाद बस संचालन को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ गई है। लोगों का आरोप है कि रामा बसों की तेज रफ्तार और मनमाने संचालन की शिकायतें पहले भी की जाती रही हैं, लेकिन इसके बावजूद कोई ठोस सुधार दिखाई नहीं दे रहा है। लोगों ने सवाल उठाया है कि आखिर रामा बसों की रफ्तार पर नियंत्रण कौन करेगा और स्कूली बच्चों तथा आम राहगीरों की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा?
साइकिल से स्कूल जा रही छात्रा को रामा बस ने मारी टक्कर
जानकारी के अनुसार, कैथवा निवासी शिवानी पुत्री राज बहादुर हमाद अहमद मेमोरियल गर्ल्स इंटर कॉलेज, दोस्तपुर में कक्षा 12 की 17 वर्षीय छात्रा है। बुधवार सुबह करीब 9 बजे वह साइकिल से स्कूल जा रही थी। इसी दौरान छावनी मोहल्ले में रामा बस संख्या UP 44 T 8788 ने उसे जोरदार टक्कर मार दी।
हादसे में छात्रा का एक हाथ फ्रैक्चर हो गया और सिर पर भी काफी चोटें आईं। शरीर के अन्य हिस्सों में भी चोटें बताई गई हैं। घटना के बाद छात्रा की हालत को लेकर परिजनों और स्थानीय लोगों में चिंता बनी हुई है।
स्थानीय लोगों ने बैटरी रिक्शा से पहुंचाया सीएचसी
हादसे के बाद छावनी मोहल्ले के स्थानीय लोगों ने तत्परता दिखाते हुए घायल छात्रा को तत्काल बैटरी रिक्शा के माध्यम से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र दोस्तपुर पहुंचाया। जहां डॉ. आज्ञाराम यादव ने छात्रा का उपचार किया। स्थानीय लोगों की मदद से घायल छात्रा को तत्काल चिकित्सा सुविधा मिल सकी।
कई बार समझाया, फिर भी नहीं सुधरी रामा बसों की रफ्तार!
स्थानीय लोगों का आरोप है कि रामा बस चालकों को कई बार आबादी वाले इलाकों में धीमी गति से बस चलाने के लिए समझाया गया और अवगत कराया गया कि यहां स्कूली बच्चे, साइकिल सवार, बुजुर्ग और पैदल राहगीर आते-जाते हैं। इसके बावजूद बसों की गति पर नियंत्रण नहीं दिखाई दे रहा है।
लोगों का कहना है कि रामा की अन्य बसें भी क्षेत्र में चलती हैं और उनके संचालन को लेकर भी गति तथा सावधानी के सवाल उठते रहे हैं। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि केवल दुर्घटनाग्रस्त बस ही नहीं, बल्कि रामा के बेड़े में चलने वाली सभी बसों की गति, फिटनेस, परमिट और चालकों की कार्यशैली की जांच कराई जाए।
खलासी के कथित बयान ने बढ़ाया विवाद
घटना के बाद बस के खलासी द्वारा कही गई एक बात भी चर्चा में है। स्थानीय लोगों के अनुसार, खलासी ने कहा, "मेरी बस तेज रफ्तार में होती तो चकनाचूर हो जाती।" इस कथित बयान को लेकर लोगों ने नाराजगी जताई है। सवाल उठ रहा है कि क्या किसी दुर्घटना की गंभीरता को इस तरह के बयान से कम करके देखा जा सकता है? किसी छात्रा के घायल होने के बाद ऐसी टिप्पणी करना संवेदनशीलता और जिम्मेदारी पर सवाल खड़े करता है।
हादसे के बाद बस बीच सड़क पर छोड़कर चालक फरार
स्थानीय लोगों के अनुसार, दुर्घटना के बाद चालक बस को बीच सड़क पर खड़ा करके उसकी चाबी लेकर मौके से फरार हो गया। बस बीच सड़क पर खड़ी रहने से आवागमन भी प्रभावित हुआ और राहगीरों तथा वाहन चालकों को परेशानियों का सामना करना पड़ा।
लोगों का सवाल है कि दुर्घटना के बाद चालक ने घायल छात्रा की मदद करने के बजाय मौके से जाना क्यों उचित समझा? दुर्घटना के बाद घायल की सहायता करना और पुलिस को सूचना देना बेहद जरूरी है।
थाना प्रभारी नारद मुनि सिंह ने तत्काल भेजी पुलिस टीम
घटना की सूचना मिलते ही दोस्तपुर थाना प्रभारी नारद मुनि सिंह ने तत्काल पुलिस टीम भेजी। उपनिरीक्षक अनूप सिंह पुलिस बल के साथ छावनी मोहल्ले स्थित घटनास्थल पर पहुंचे और मौके का जायजा लिया। इसके बाद वह पुलिस बल के साथ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र दोस्तपुर पहुंचे और घायल छात्रा के उपचार की जानकारी ली।
पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त रामा बस संख्या UP 44 T 8788 को कब्जे में लेकर थाने पहुंचाया। मामले में आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।
रामा की सभी बसों की जांच की मांग, परिवहन विभाग से जवाबदेही तय करने की अपील
स्थानीय लोगों ने मांग की है कि रामा की सभी संचालित बसों की जांच कराई जाए। यह देखा जाए कि बसों की फिटनेस, परमिट, बीमा और अन्य जरूरी दस्तावेज पूरे हैं या नहीं। साथ ही चालकों की गति और यातायात नियमों के पालन की भी जांच हो।
लोगों का कहना है कि अगर पहले भी बस चालकों को धीमी गति से चलने के लिए समझाया गया था, तो इस शिकायत को गंभीरता से क्यों नहीं लिया गया? परिवहन विभाग को ऐसी शिकायतों पर कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि भविष्य में कोई और बच्चा सड़क हादसे का शिकार न हो।
बड़ा सवाल: क्या रामा बस संचालक लेंगे जिम्मेदारी?
आज शिवानी साइकिल से स्कूल जा रही थी, लेकिन एक सड़क हादसे ने उसे अस्पताल पहुंचा दिया। उसके हाथ में फ्रैक्चर और सिर में चोट आई है। इस घटना ने पूरे क्षेत्र में बच्चों की सड़क सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
स्थानीय लोगों की मांग है कि दोषी चालक के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई हो, रामा बस संचालक अपनी जिम्मेदारी स्पष्ट करें और उनकी सभी बसों की जांच कराई जाए। प्रशासन को भी आबादी वाले इलाकों में तेज रफ्तार वाहनों पर प्रभावी नियंत्रण करना चाहिए।
अब सवाल रामा बस संचालकों और परिवहन विभाग से है—जब स्थानीय लोग कई बार धीमी गति से बस चलाने की अपील कर चुके हैं, तो आखिर उनकी बात क्यों नहीं सुनी गई? क्या किसी बड़े हादसे के बाद ही व्यवस्था जागेगी?

रिपोर्टर : दिनेश सिंह अग्निवंशी

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