गर्मियों में मूंग उगाएँ: बीज, सिंचाई, उर्वरक और कटाई की जानकारी

मूंग (Vigna radiata) एक महत्वपूर्ण दलहन फसल है, जो भारत में गर्मियों के मौसम में आसानी से उगाई जा सकती है। यह पौष्टिक और लाभकारी फसल किसानों के लिए आय का अच्छा स्रोत है। मूंग की खेती से मिट्टी की उर्वरता भी बनी रहती है क्योंकि यह नाइट्रोजन फिक्सिंग क्षमता रखती है।

1. जलवायु और मिट्टी की आवश्यकता

जलवायु: मूंग की फसल गर्म और शुष्क मौसम पसंद करती है। तापमान 25-35°C में सबसे अच्छा होता है।

मिट्टी: मूंग अधिकतर दोमट (loamy) या बलुई दोमट मिट्टी में अच्छी तरह उगती है। मिट्टी का pH 6-7 होना चाहिए।

जल निकासी: जलजमाव वाली मिट्टी में मूंग की फसल खराब हो सकती है। इसलिए अच्छी ड्रेनेज वाली भूमि चुनें।

2. फसल तैयारी और बीज

भूमि तैयार करना: खेत को 2–3 बार हल करके अच्छी तरह जुताई करें। जमीन को समतल करें और छोटे-छोटे बेड बनाएं।

बीज का चयन: उच्च उपज देने वाली मूंग की किस्मों का चयन करें जैसे - PDM-54, Samrat, ML-2056, SML-668।

बीज की मात्रा: लगभग 8-10 किलो बीज प्रति हेक्टेयर।

बीज उपचार: फसल रोगों से बचाने के लिए बीज को थोडा टीएलसी या थायरम पाउडर से उपचारित करें।

3. बुवाई का समय और तरीका

समय: मार्च से जून के बीच मूंग की बुवाई सबसे उपयुक्त होती है।

बुवाई विधि:

सिंचाई वाली भूमि: लाइन बुवाई करें। बीज की गहराई 2-3 सेमी रखकर 30-40 सेमी की दूरी पर बोएं।
सिर्फ वर्षा पर निर्भर भूमि: बीजों की बुवाई थोड़ी गहरी (3-4 सेमी) करें ताकि सूखने पर अंकुरण बाधित न हो।

4. सिंचाई और पोषण

सिंचाई: मूंग कम पानी में उगने वाली फसल है। बुवाई के 5–6 दिन बाद पहली सिंचाई दें। फूल आने के समय और फली बनने के दौरान सिंचाई सबसे महत्वपूर्ण है।

उर्वरक:

जैविक खाद (गोबर या कंपोस्ट) 5-6 टन/हेक्टेयर।
रासायनिक उर्वरक: NPK अनुपात 20:60:20 kg/हेक्टेयर।
मूंग मिट्टी में नाइट्रोजन फिक्स करता है, इसलिए अधिक N की आवश्यकता नहीं होती।

5. फसल प्रबंधन और रोग नियंत्रण

खरपतवार नियंत्रण: बुवाई के 20-25 दिन बाद एक बार हल्की जुताई या हाथ से निराई करें।

मुख्य रोग:

रूट रोग (Root Rot): फफूंदी रोकने के लिए बीज को थायरम या फर्निल से उपचारित करें।
पत्ती झुलस रोग: नीम के अर्क या हल्के फफूंदनाशक का छिड़काव।

मुख्य कीट:

मोली बीन बोरर: पत्तियों और फली में छेद कर नुकसान पहुंचाता है।
नियंत्रण: जैविक कीट नियंत्रण या नीम तेल का छिड़काव।

6. फसल कटाई और उपज

कटाई समय: फसल बुवाई के 70-80 दिन बाद तैयार होती है। जब 80% फली पीली हो जाए तो कटाई करें।

उपज:

औसतन 8-10 क्विंटल प्रति हेक्टेयर।
अच्छी किस्मों में 12-15 क्विंटल तक उपज संभव है।
संग्रहण: कटाई के बाद फसल को सुखाकर बीज निकालें। नमी 10-12% तक रखें ताकि लंबे समय तक संग्रहण संभव हो।

7. लाभ और महत्व

मूंग एक पोषक और प्रोटीनयुक्त फसल है।
यह मिट्टी की उर्वरता बढ़ाती है और अगले फसल चक्र में लाभ देती है।
गर्मियों में कम पानी में भी उपज देती है, इसलिए सूखे इलाकों के लिए आदर्श।
स्थानीय और राष्ट्रीय बाजार में इसकी मांग हमेशा बनी रहती है, जिससे किसानों को अच्छा आर्थिक लाभ मिलता है।

8. टिप्स और सुझाव

बीज की गुणवत्ता और उन्नत किस्मों का चयन करें।
समय पर सिंचाई और निराई करें।
फसल में रोग और कीटों की निगरानी नियमित रखें।
कटाई और संग्रहण के समय नमी नियंत्रित रखें।
मार्केट रेट पर ध्यान दें और मंडी या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का लाभ उठाएं।

गर्मियों में मूंग की खेती कम निवेश, कम पानी की आवश्यकता और अच्छे लाभ की वजह से किसानों के लिए उपयुक्त है। उचित तैयारी, समय पर बुवाई और नियमित फसल प्रबंधन से किसान उच्च उपज और लाभ सुनिश्चित कर सकते हैं।

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