सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला: गोद लेने वाली मां को भी मिलेगी मैटरनिटी लीव
सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए कहा है कि गोद लिए गए बच्चे की उम्र के आधार पर मैटरनिटी लीव से इनकार नहीं किया जा सकता। अदालत के मुताबिक, हर दत्तक मां को 12 हफ्तों का मातृत्व अवकाश मिलना ही चाहिए, चाहे बच्चा किसी भी उम्र का हो।
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3 महीने की शर्त को कोर्ट ने बताया गलत
अब तक नियम यह था कि केवल वही महिलाएं मैटरनिटी लीव की हकदार थीं, जिन्होंने 3 महीने से कम उम्र के बच्चे को गोद लिया हो। यह प्रावधान मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961 की धारा 5(4) में था।सुप्रीम कोर्ट ने इस नियम को असंवैधानिक बताते हुए कहा कि इससे बड़ी उम्र के बच्चों को गोद लेने वाली महिलाओं के साथ भेदभाव होता है।
हर मां को मिलेगा 12 हफ्ते का अवकाश
अदालत ने साफ किया कि अब किसी भी उम्र के बच्चे को गोद लेने पर महिला को 12 हफ्तों की मैटरनिटी लीव दी जाएगी। यह छुट्टी बच्चे को गोद लेने की तारीख से लागू होगी।
सामाजिक सुरक्षा संहिता के नियम पर भी उठाए सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के उस प्रावधान को भी गलत ठहराया, जिसमें केवल 3 महीने से कम उम्र के बच्चे को गोद लेने पर ही मातृत्व लाभ देने की बात कही गई थी।
कोर्ट ने क्या कहा?
- अदालत के अनुसार,
- जो महिला कानूनी रूप से बच्चे को गोद लेती है
- या जिसे जन्म देने वाली मां बच्चा सौंपती है
- दोनों ही स्थितियों में महिला को 12 हफ्तों का मातृत्व लाभ मिलना चाहिए।

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