सुप्रीम कोर्ट का फैसला: धर्म बदलने पर अनुसूचित जाति का लाभ नहीं मिलेगा
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक अहम निर्णय में स्पष्ट किया है कि यदि कोई व्यक्ति अपना धर्म बदलता है तो उसका अनुसूचित जाति (SC) का दर्जा समाप्त हो जाता है। यह आदेश आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले की पुष्टि करता है।

हाईकोर्ट ने पहले कहा था कि यदि कोई व्यक्ति ईसाई धर्म अपनाता है और उसी धर्म के अनुसार जीवन जीता है, तो उसे अनुसूचित जाति का सदस्य नहीं माना जा सकता। अदालत ने कहा कि केवल हिंदू, सिख और बौद्ध धर्म के अनुयायी ही अनुसूचित जाति के सदस्य हो सकते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने संविधान (1950) के प्रावधानों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि जिन धर्मों के अलावा कोई भी धर्म अपनाएगा, उसका SC दर्जा तुरंत समाप्त हो जाएगा।
यह आदेश एक ऐसे मामले में आया, जिसमें व्यक्ति ने ईसाई धर्म अपनाकर पादरी (पेस्टर) के रूप में काम करना शुरू कर दिया था। इसके बाद उसने कुछ लोगों के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट के तहत शिकायत दर्ज करवाई। लेकिन मुकदमे के प्रतिवादियों ने दावा किया कि शिकायतकर्ता अब ईसाई धर्म का अनुयायी है, इसलिए एससी-एसटी कानून के तहत उसका संरक्षण नहीं लिया जा सकता।

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने 30 अप्रैल 2025 को कहा कि ईसाई धर्म में जाति व्यवस्था नहीं है, इसलिए ऐसे व्यक्ति को एससी-एसटी एक्ट के तहत कोई अधिकार नहीं है। अदालत ने संबंधित धाराओं को रद्द कर दिया। इसके खिलाफ पेस्टर ने सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पिटीशन दाखिल की थी, जिसे अब सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया।

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