चावल उत्सव” पर ग्रहण, 85 राशन दुकानें खाली… हजारों गरीब परिवारों के चूल्हे ठंडे

सूरजपुर : शासन के स्पष्ट आदेश, तय तारीख, और पूरे प्रदेश में “चावल उत्सव” की तैयारियां… लेकिन सूरजपुर में हालात बिल्कुल उलट। फरवरी 2026 का खाद्यान्न अब तक जिले की 85 राशन दुकानों तक नहीं पहुंचा।
20 फरवरी को हितग्राहियों को सम्मानपूर्वक चावल वितरण होना था। लेकिन यहां गोदाम खाली हैं… दुकानें सूनी हैं… और हजारों गरीब परिवार इंतजार में खड़े हैं।
याद रखिए —
इन गरीब परिवारों के घर चावल से ही चलते हैं।
दैनिक मजदूरी करने वाले, बुजुर्ग, विधवा माताएं, दिव्यांग और जरूरतमंद परिवार — जिनका पूरा भरोसा सार्वजनिक वितरण प्रणाली पर है — आज वही परिवार चिंता में हैं।
कई घरों में चूल्हा इस उम्मीद पर जलता है कि राशन दुकान से मिलने वाला चावल ही सहारा बनेगा।
लेकिन जब दुकानें ही खाली हों… तो जिम्मेदार कौन?
दुकानदारों में आक्रोश
राशन विक्रेताओं का कहना है —
खाद्यान्न समय पर नहीं पहुंचता, लेकिन जनता के सवालों का सामना उन्हें करना पड़ता है।
हर दिन सैकड़ों हितग्राही लौटाए जा रहे हैं।
कई दुकानों के गोदाम पूरी तरह खाली पड़े हैं।
बड़ा सवाल
जब शासन का आदेश पहले से था —
तो भंडारण में इतनी देरी क्यों?
क्या यह सीधी प्रशासनिक लापरवाही है?
या जिम्मेदार अधिकारियों की घोर उदासीनता?
गरीबों के हक से खिलवाड़?
क्या “चावल उत्सव” सिर्फ कागजों तक सीमित रहेगा?
क्या गरीबों के सम्मान और अधिकार का यह खुला मजाक नहीं?
यदि जल्द खाद्यान्न नहीं पहुंचा —
तो हालात गंभीर हो सकते हैं।
गरीब परिवारों के सामने भुखमरी जैसी स्थिति खड़ी हो सकती है।
अब कार्रवाई जरूरी
जिले में बैठे लापरवाह अधिकारियों पर कड़ी और उदाहरणात्मक कार्रवाई होनी चाहिए।
क्योंकि यह सिर्फ अनाज का मामला नहीं…
यह गरीबों की थाली, उनके सम्मान और उनके जीवन से जुड़ा सवाल है।
अब निगाहें प्रशासन पर हैं —
क्या जिम्मेदारी तय होगी?
क्या दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी?
या फिर हर बार की तरह यह मामला भी फाइलों में दब जाएगा?
सूरजपुर की जनता जवाब चाहती है…
और जवाब अब चाहिए।

रिपोर्टर : रिंकु सोनी

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