शीर्षक -मेरा बिहार प्रवास ज्वलंत मुद्दों पर विचार

गुजरात : मैं कुछ दिनों पहले मैं बिहार प्रवास पर था ।मैं एक मित्र क्या आमंत्रण पर उनसे मिलने बिहार के शहर गया हुआ था, वहां पर मैंने एक फ्लाईओवर के नीचे लिखा ,देखा
'राष्ट्रीय जनता दल गरीबों को बल'
यह मैंने फ्लाईओवर के दिवार पर ही नहीं और भी कई जगहों पर भी देखा कई मकानों के बानड्री पर यह स्लोगन पेंटर लिख भी रहे थे।
मन मैंने बड़े गौर से देखा 'राष्ट्रीय जनता दल गरीबों को बंल'
ये पढ़ने के बाद मेरे दिमाग में सबसे पहला प्रश्न आया कि, क्या सही में राष्ट्रीय जनता दल गरीबो के बल है ?
गरीबों को बल प्रदान करने और गरीबों का जीवन स्तर ऊपर उठाने के लिए क्या सचमुच जनता दल की सरकार ने कार्य किया है?
बिहार में राष्ट्रीय दल जनता दल की सरकार 15 वर्षों तक बिहार की सत्ता में रही और अभी भी गठबंधन में सरकार में शामिल हैं
अगर यह बात सही है कि, राष्ट्रीय जनता दल गरीबों को बल
तो बिहार को एक विकसित राज्य होना चाहिए जबकि ऐसा बिल्कुल भी नहीं है।
2020 के करोना संकट ने बिहार की असलियत की पोल खोल दी थी ,सड़कों पर हजारों की संख्या में पैदल चलते मजदूर अपने घर की ओर बिहार लौट रहे थे, यह बिहारी मजदूर थे जो गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करते हैं ? वास्तव में बिहार में गरीबों को बल मिलता तो उन्हें रोजगार और सहारा मिलता तो वे इतनी दूर दिल्ली, पंजाब, राजस्थान से लेकर गुजरात, महाराष्ट्र मजदूरी करने नहीं जाते ,
बिहार से लगभग सभी राज्यों में लोग मजदूरी करने बिहार से बाहर जाते हैं अगर बिहार सरकार या राष्ट्रीय जनता दल दल की सरकार गरीबों को स्थिति सुधारने की कोशिश की होती और बिहार में ही रोजगार की व्यवस्था करती तो तो लोग इतनी संख्या में बिहार से बाहर क्यों जाते?
'राष्ट्रीय जनता दल और गरीबों को बल' यह स्लोगन उन पर लिखा जाना चाहिए जहां
सड़कों के किनारे ,छोटे-छोटे घरों में तंबू में बिहारी सब्जी बेचते हुए ,वह पानी पुरी बेचते हुए
फुटपाथ पर फटेहाल दिखाई देते हैं।
राष्ट्रीय जनता दल की सरकार न तो गरीबों को बल दे रही है और न ही गरीबी रेखा से ऊपर उठने की कोशिश करने वाले छात्रों का ही
बल है ।
बिहारी छात्रों को भी पढ़ाई-लिखाई के लिए भी बाहर निकलना पड़ता है, बिहार में जो लोग जागरुक शिक्षित हैं एवं अच्छी शिक्षा
बच्चों को देना चाहते हैं
उन लोगों की मजबूरी हो जाती है कि, अपने बच्चों को बाहर दूसरे राज्यों में भेजकर शिक्षा प्रदान करवाएं ?
क्योंकि बिहार में वैसे कोई भी शिक्षण संस्थान नहीं है जो उच्च प्रदान करें।
बिहार की हालत ऐसी है कि,चाहे पढ़े लिखे लोग छात्र हो या अनपढ़ मजदूर सबको राज्य से बाहर जाना मजबूरी हो चुकी है
अब सोचने वाले बात हैं कि, राष्ट्रीय जनता दल किन गरीबों को बल दे रही है कौन से गरीब लाभान्वित हो रहे हैं??
क्या कागजों पर गरीबों को बल मिल रहा है?
क्योंकि प्रत्यक्ष में तो ऐसा कुछ भी नहीं दिख रहा है
बिहार सरकार न तो गरीबों को बल दे रही है और ना ही पढ़े लिखों को बल दे रही है तो फिर आखिर बल किसको दे रही है सोचने वाली बात?
शायद नेतागण अपने आप को बल दे रहे हैं? क्योंकि जैसे घोटाले बिहार में हुए हैं,जिस तरह की राजनीति बिहार में देखने को मिल रही है वह निश्चित ही लोकतंत्र के मर्यादाओं को खण्डित कर रही है,विपक्ष के साथ गठबंधन की सरकार लोकतंत्र के सारे नियमों की धज्जियां उड़ा रही है
इससे तो यही स्पष्ट होता है कि, बिहार में बिहार वासियों का विकास होना हों नेताओं का विकास खूब होता है,
दूसरे शब्दों में कहा जाए कि राष्ट्रीय जनता दल और नेताओं को बल, ज्यादा सटीक स्लोगन है क्योंकि यहां पक्ष और विपक्ष दोनों साथ खड़े हैं जय हिन्द
लेखक - चंद्रकांत पुजारी
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