महिला थाना अम्बिकापुर की काउंसलिंग से टूटा नहीं, जुड़ गया रिश्ता
सरगुजा : तीन वर्षों से अलग-अलग ज़िंदगी जी रहे पति-पत्नी के रिश्ते में आखिरकार फिर से उम्मीद की लौ जल उठी। महिला थाना अम्बिकापुर अंतर्गत पुलिस परिवार परामर्श केंद्र की संवेदनशील और सतत काउंसलिंग के चलते एक टूटता हुआ दाम्पत्य रिश्ता दोबारा जुड़ गया।
लंबे समय से चला आ रहा तनाव, गीले-शिकवे और मनमुटाव को संवाद और समझाइश से खत्म कर पति-पत्नी ने आपसी सहमति से साथ रहने का निर्णय लिया।
महिला थाना प्रभारी की काउंसलिंग का दिखा असर
महिला थाना प्रभारी उप निरीक्षक सुनीता भारद्वाज के नेतृत्व में हुई काउंसलिंग ने वह कर दिखाया, जो तीन साल में संभव नहीं हो पाया था। छोटे-छोटे विवाद, गलतफहमियां और संवादहीनता को बातचीत के जरिए सुलझाया गया और रिश्ते को नया जीवन मिला।
मामले का संक्षिप्त विवरण
आवेदिका रेनु गुप्ता, निवासी सीतापुर जिला सरगुजा का विवाह दिनांक 25/11/2022 को राहुल गुप्ता, निवासी ग्राम झलमला, जिला बालोद के साथ सामाजिक रीति-रिवाज से संपन्न हुआ था।
वर्तमान में राहुल गुप्ता तहसीलदार पद पर जगदलपुर में पदस्थ हैं।
विवाह के बाद रेनु गुप्ता लगभग 50 दिनों तक ससुराल में रही, इसके पश्चात पति-पत्नी के बीच आपसी संबंध खराब हो गए। दिनांक 14/01/2023 से रेनु गुप्ता अपने मायके सीतापुर में रह रही थी।
पति द्वारा साथ रखने से इंकार किए जाने पर आवेदिका ने कुटुम्ब न्यायालय अंबिकापुर में वाद दायर किया, जो बाद में खारिज हो गया।
अंततः दिनांक 01/10/2025 को रेनु गुप्ता ने महिला थाना अंबिकापुर में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशानुसार मामले को पुलिस परिवार परामर्श केंद्र में काउंसलिंग हेतु लिया गया।
लगातार प्रयासों से बदली कहानी
प्रथम काउंसलिंग में ही पति राहुल गुप्ता द्वारा पत्नी को साथ रखने से स्पष्ट इंकार कर दिया गया था, जिससे रिश्ता पूरी तरह टूटने की कगार पर पहुंच गया था।
लेकिन महिला थाना प्रभारी एवं काउंसलिंग टीम ने हार नहीं मानी।
लगातार प्रयासों के बाद दिनांक 31/01/2026 को दोनों पक्षों एवं परिजनों की उपस्थिति में पुनः काउंसलिंग की गई, जहां समझाइश के बाद राहुल गुप्ता ने अपनी पत्नी को साथ रखने पर सहमति जताई।
रिश्तों की जीत, संवाद की ताकत
पढ़े-लिखे शिक्षित परिवार का यह रिश्ता, जो लगभग समाप्त हो चुका था, महिला थाना अंबिकापुर की काउंसलिंग से फिर से जुड़ गया।
समझौते के पश्चात उसी दिन रेनु गुप्ता अपने पति के साथ परिजनों की मौजूदगी में जगदलपुर के लिए रवाना हुई।
इनकी रही अहम भूमिका, इस सराहनीय कार्यवाही में महिला थाना प्रभारी उप निरीक्षक सुनीता भारद्वाज काउंसलर मीरा शुक्ला, प्रधान आरक्षक संतोष गुप्ता की सक्रिय और संवेदनशील भूमिका रही।
निष्कर्ष
यह मामला साबित करता है कि कानून के साथ संवेदना और संवाद हो, तो टूटते रिश्तों को भी बचाया जा सकता है।
महिला थाना अंबिकापुर ने एक बार फिर यह दिखा दिया कि पुलिस सिर्फ कानून नहीं, परिवारों की उम्मीद भी है।
रिपोर्टर : रिंकू सोनी
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