बतौली में आंगनवाड़ी सेमिनार पर उठे सवाल, जमीनी हकीकत से दूर दिखा “नवाचार” का दावा
सरगुजा : विकासखंड बतौली में आयोजित आंगनवाड़ी शिक्षिका सेमिनार को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं। जहां मंच से खेल और गतिविधि आधारित शिक्षा, प्रिंट-रिच केंद्र, फ्री प्ले और नवाचारों के बड़े-बड़े दावे किए गए, वहीं कई आंगनवाड़ी केंद्रों की वास्तविक स्थिति इन दावों से बिल्कुल अलग नजर आती है।
करीब 150 आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की मौजूदगी में आयोजित इस कार्यक्रम में अधिकारियों ने योजनाओं और गतिविधियों की सराहना तो की, लेकिन जमीनी समस्याओं पर कोई ठोस चर्चा नहीं हुई। कई केंद्रों में आज भी बच्चों के बैठने की समुचित व्यवस्था, शैक्षणिक सामग्री, साफ-सफाई और नियमित गतिविधियों की कमी बनी हुई है।
सेमिनार में 11 शिक्षिकाओं ने अपने “नवाचार” प्रस्तुत किए, लेकिन सवाल यह है कि यदि व्यवस्थाएं इतनी प्रभावी हैं तो कई आंगनवाड़ी केंद्रों में बच्चों की उपस्थिति लगातार प्रभावित क्यों हो रही है? ग्रामीण क्षेत्रों के पालकों का कहना है कि कई जगह गतिविधियां केवल निरीक्षण और कार्यक्रमों तक सीमित रह जाती हैं।
कार्यक्रम में अधिकारियों ने खूब प्रशंसा की, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया गया कि जिन केंद्रों में मूलभूत सुविधाएं नहीं हैं, वहां सुधार के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे। कई कार्यकर्ताओं के बीच यह चर्चा भी रही कि मंच पर केवल चुनिंदा लोगों को बोलने का अवसर दिया गया, जबकि अधिकांश जमीनी समस्याएं दबाकर रख दी गईं।
हालांकि अंत में शिक्षिकाओं ने अगली बार 40 से अधिक लोगों द्वारा अपने अनुभव साझा करने की बात कही, लेकिन सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या भविष्य में केवल प्रस्तुतियां होंगी या वास्तव में आंगनवाड़ी केंद्रों की स्थिति सुधारने पर गंभीर पहल भी होगी।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बच्चों के भविष्य से जुड़े इस महत्वपूर्ण विभाग में केवल सेमिनार और भाषण नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर वास्तविक सुधार दिखाई देना चाहिए।
रिपोर्टर : रिंकू सोनी

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