प्रेमचंद जयंती पर बोदा स्कूल बना साहित्य का केंद्र, विद्यार्थियों ने सीखे सामाजिक चेतना और मानवीय मूल्यों के पाठ"
सरगुजा : हिंदी साहित्य के अमर कथाकार, उपन्यास सम्राट एवं यथार्थवादी साहित्य के प्रणेता मुंशी प्रेमचंद की जयंती पर शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बोदा में भव्य साहित्यिक आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने प्रेमचंद के साहित्य, सामाजिक विचारों और मानवीय मूल्यों को आत्मसात करते हुए उनकी रचनाओं से प्रेरणा लेने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती एवं मुंशी प्रेमचंद के चित्र पर माल्यार्पण तथा सरस्वती वंदना के साथ हुआ। इसके बाद विद्यार्थियों द्वारा तैयार की गई पोस्टर प्रदर्शनी का अवलोकन किया गया, जिसमें प्रेमचंद की कालजयी रचनाओं के प्रेरक संदेशों को आकर्षक ढंग से प्रस्तुत किया गया।
नवीन महाविद्यालय बतौली के शिक्षकों, विद्यालय परिवार तथा लगभग 62 विद्यार्थियों की सहभागिता से कार्यक्रम ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायी बन गया। प्रत्येक कक्षा के विद्यार्थियों ने मंच से प्रेमचंद के जीवन, साहित्यिक योगदान और उनकी प्रसिद्ध कहानियों पर प्रभावशाली वक्तव्य दिए। वक्ताओं ने बताया कि प्रेमचंद का साहित्य केवल कहानी नहीं, बल्कि समाज को जागरूक करने और मानवीय संवेदनाओं को सशक्त बनाने का माध्यम है।
शिक्षकों ने अपने संबोधन में कहा कि प्रेमचंद की रचनाएँ आज भी किसानों, गरीबों, महिलाओं, शिक्षा, सामाजिक न्याय और नैतिक मूल्यों जैसे विषयों पर नई पीढ़ी का मार्गदर्शन करती हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से पुस्तकों को अपना सच्चा मित्र बनाने, नियमित अध्ययन करने तथा पुस्तकालय का अधिक से अधिक उपयोग करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के अंत में सभी विद्यार्थियों एवं शिक्षकों ने मुंशी प्रेमचंद के आदर्शों को जीवन में अपनाने तथा साहित्य के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का संकल्प लिया। पूरे आयोजन ने विद्यालय परिसर को साहित्य, संस्कृति और ज्ञान के रंगों से सराबोर कर दिया।
रिपोर्टर : रिंकु सोनी
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