80 हजार का आरोप, आवास अधूरा! पहाड़ी कोरवा वृद्धा की शिकायत से मचा हड़कंप—‘आवास मित्र’ की भूमिका पर सवाल, तत्काल हटाने की मांग

बतौली/सरगुजा : जनपद बतौली में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) का उद्देश्य गरीब और जरूरतमंद परिवारों को पक्का मकान उपलब्ध कराना है, लेकिन ग्राम पंचायत चिपरकाया की एक पहाड़ी कोरवा वृद्धा की शिकायत ने योजना के जमीनी क्रियान्वयन और निगरानी व्यवस्था पर ही गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वृद्धा केदली बाई ने आरोप लगाया है कि आवास में ढलाई कराने के नाम पर उससे 80 हजार लिए गए, लेकिन रकम लेने के बाद भी काम पूरा नहीं कराया गया और आवास आज भी अधूरा पड़ा है।

वृद्धा ने मामले को लेकर थाना बतौली में आवेदन देकर शिकायत की है। शिकायत में रकम वापस मांगने पर कथित दुर्व्यवहार और धमकी दिए जाने का भी आरोप लगाया गया है। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही होगी, लेकिन सवाल यह है कि यदि योजना के हितग्राही से इतनी बड़ी रकम ली गई और इसके बावजूद आवास अधूरा है, तो निगरानी और सत्यापन करने वाले जिम्मेदार अधिकारी आखिर कहां थे?

आवास मित्र की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल
मामले में सबसे बड़ा सवाल संबंधित आवास मित्र की भूमिका को लेकर उठ रहा है। हितग्राही का आरोप है कि निर्माण कार्य के नाम पर रकम ली गई, लेकिन काम नहीं कराया गया। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो यह केवल एक हितग्राही के साथ कथित आर्थिक अनियमितता का मामला नहीं रहेगा, बल्कि प्रधानमंत्री आवास योजना की निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करेगा।

ऐसे मामलों में यह जांच जरूरी है कि हितग्राही से किस आधार पर राशि ली गई, किसके कहने पर ली गई, निर्माण की वास्तविक स्थिति क्या थी और जिम्मेदार कर्मचारियों ने मौके पर जाकर कितनी बार सत्यापन किया।

‘अधिकारियों की आंखों के सामने कैसे अधूरा रहा आवास?’

सरकार गरीबों को घर देने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है। योजना में निर्माण की प्रत्येक अवस्था की निगरानी और सत्यापन की व्यवस्था होने के बावजूद यदि एक वृद्ध महिला का आवास अधूरा पड़ा है और वह रकम लेने का आरोप लगा रही है, तो 

जिम्मेदार अधिकारियों की निगरानी व्यवस्था भी सवालों के घेरे में आना स्वाभाविक है।
सवाल यह भी है कि आवास मित्रों की गतिविधियों पर विभागीय स्तर पर कितनी निगरानी की जाती है? क्या हितग्राहियों से किसी प्रकार की राशि लेने की शिकायतों की जांच होती है? और यदि कोई आवास मित्र हितग्राही के साथ कथित रूप से अनियमितता करता है तो उसके खिलाफ तत्काल कार्रवाई क्यों नहीं होती?

वृद्धा अकेली, आवास अधूरा और जिम्मेदारी तय करने की मांग
बताया गया है कि केदली बाई अकेली रहती हैं। उनका कोई बेटा नहीं है और बेटियों की शादी हो चुकी है। ऐसे में अधूरा मकान उनके लिए महज निर्माणाधीन भवन नहीं, बल्कि सुरक्षित जीवन की सबसे बड़ी जरूरत है। इसके बावजूद यदि वह दूसरे लोगों के घर में रहने को मजबूर हैं तो यह प्रशासन के लिए गंभीर चिंता का विषय होना चाहिए।

आरोप सही निकले तो ‘आवास मित्र’ को तत्काल हटाने की मांग
मामले में स्थानीय स्तर पर मांग उठ रही है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। जांच पूरी होने तक संबंधित आवास मित्र की भूमिका और उसके द्वारा कराए गए अन्य आवासों की भी जांच की जाए। यदि 80 हजार लेने और आवास अधूरा छोड़ने का आरोप जांच में सही पाया जाता है तो संबंधित आवास मित्र को तत्काल जिम्मेदारी से हटाने के साथ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाए।

साथ ही यह भी जांच हो कि संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों ने आवास निर्माण की निगरानी में कहीं लापरवाही तो नहीं बरती। यदि अधिकारियों की लापरवाही सामने आती है तो उनकी भी जवाबदेही तय की जानी चाहिए।

अब प्रशासन के सामने सीधी चुनौती—जांच होगी या मामला दब जाएगा?

मामले में कलेक्टर सरगुजा, जिला पंचायत सीईओ, एसडीएम और जनपद पंचायत प्रशासन से मांग है कि शिकायत को गंभीरता से लेते हुए मौके का भौतिक सत्यापन, आवास की पूरी फाइल, जारी किस्तों, निर्माण की फोटो/जियो-टैगिंग और संबंधित आवास मित्र की भूमिका की जांच कराई जाए।

वृद्धा के आरोप सही हैं या नहीं, इसका अंतिम फैसला जांच से ही होगा। लेकिन शिकायत के बाद अब प्रशासन की जिम्मेदारी और बढ़ गई है। गरीब और विशेष पिछड़ी जनजाति की वृद्ध महिला को न्याय मिलेगा या फिर सरकारी योजना के नाम पर कथित वसूली के आरोप लगाने वाला मामला फाइलों में दब जाएगा—इस पर अब सबकी नजर है।

रिपोर्टर : रिंकू सोनी

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