रेप आरोपी जेल से छूटा तो हुआ 'हीरो' जैसा स्वागत, गाजियाबाद की घटना से देश में आक्रोश
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा के बड़े-बड़े दावे उस वक्त ताश के पत्तों की तरह ढह गए, जब डासना जेल से बाहर निकले रेप के आरोपी का स्वागत ऐसे किया गया जैसे वो कोई जंग जीतकर लौटा हो! जी हां कानून की एक बेबस छात्रा की अस्मत लूटने का आरोपी जब 8-9 महीने जेल की सलाखों के पीछे गुजारकर जमानत पर बाहर आता है, तो समाज उसे धिक्कारने के बजाय पलकों पर बिठा लेता है। सड़कों पर गाड़ियों का हुजूम, गगनभेदी नारेबाजी, गले में गेंदे के फूलों के भारी-भरकम हार और कंधों पर उठाकर जुलूस! ये नजारा देखकर किसी का भी कलेजा कांप जाए। जिस देश में बेटियों की सुरक्षा के लिए कड़े कानून और 'एंटी रोमियो स्क्वाड' जैसी बातें होती हों, वहां एक रसूखदार आरोपी के लिए इस कदर शक्ति प्रदर्शन सभ्य समाज के मुंह पर एक करारा तमाचा है। गाजियाबाद की इस हिलाकर रख देने वाली वारदात ने अब लखनऊ से लेकर दिल्ली तक की सियासत में भूचाल ला दिया है। विपक्ष ने सीधे योगी सरकार के रामराज्य की साख पर सवाल दाग दिए हैं। आइए, आपको बताते हैं कि आखिर कौन है ये आरोपी और जेल के बाहर वफादारी का ये कैसा तमाशा देखने को मिला!
दरअसल, इस पूरे सियासी बवाल के पीछे सुशील प्रजापति है। जी हां सुशील प्रजापति कोई आम आदमी नहीं, बल्कि गाजियाबाद में 'हिंदू युवा वाहिनी' का पूर्व नगर अध्यक्ष रह चुका है और करीब डेढ़ साल पहले वो 'किसान यूनियन' से भी जुड़ गया था। यानी रसूख और रूतबे की कोई कमी नहीं थी। वहीं मामला ये है कि नवंबर 2021 में मोदीनगर की रहने वाली एक पीड़िता, जो LLB की छात्रा थी और मेरठ कोर्ट में एक सीनियर वकील के नीचे वकालत की बारीकियां सीख रही थी, उसकी मुलाकात सुशील प्रजापति से हुई।
सुशील ने छात्रा को अपने रसूख का झांसा दिया। उसने भरोसा दिलाया कि वो उसे गाजियाबाद कोर्ट में चैंबर दिलवा देगा और वकालत की प्रैक्टिस सेट करवा देगा। कोर्ट के बहाने वो लगातार छात्रा के संपर्क में रहने लगा। पीड़िता का आरोप है कि गाजियाबाद कोर्ट में व्यवस्था कराने के बहाने सुशील उसे अपनी काले रंग की थार गाड़ी में बिठाकर एक फ्लैट पर ले गया। वहां उसने छात्रा को कोल्ड ड्रिंक में कोई नशीली दवा मिलाकर पिला दी। जब छात्रा बेसुध हो गई, तो सुशील ने उसके साथ दरिंदगी की वारदात को अंजाम दिया।
इतना ही नहीं हैवानियत करने के बाद आरोपी ने पीड़िता को धमकी दी कि अगर मुंह खोला तो जान से मार देगा और फिर उसे लावारिस हालत में सड़क किनारे फेंककर फरार हो गया। कहते हैं जब हौसले बुलंद हों तो कानून भी अपना रास्ता खोज ही लेता है। छात्रा ने हिम्मत दिखाई और 8 अगस्त 2025 को मुरादनगर थाने में मुकदमा दर्ज करा दिया। मामला एक बड़े हिंदू संगठन के पूर्व पदाधिकारी से जुड़ा था, इसलिए पुलिस पर भी दबाव था। सुशील फरार हो गया, जिसके बाद पुलिस ने उस पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित कर दिया। दबाव बढ़ता देख आरोपी सुशील प्रजापति ने 21 अगस्त 2025 को कोर्ट में सरेंडर कर दिया, जिसके बाद पुलिस ने उसे जेल भेज दिया था। चौंकाने वाली बात ये है कि जब उसकी गिरफ्तारी हुई थी, तब भी कुछ संगठनों के कार्यकर्ताओं ने मुरादनगर थाने पहुंचकर भारी हंगामा और विरोध प्रदर्शन किया था। यानी रसूखदारों की फौज पहले दिन से उसके साथ खड़ी थी।
वहीं लगभग 9 महीने जेल में काटने के बाद 17 मई को कोर्ट से सुशील प्रजापति को जमानत मिल गई। लेकिन असली तमाशा तब शुरू हुआ जब वो डासना जेल के गेट से बाहर आया। जेल के बाहर का नजारा देखकर ऐसा लग रहा था मानो कोई खिलाड़ी देश के लिए गोल्ड मेडल जीतकर लौटा हो। जी हां जैसे ही सुशील बाहर आया, उसके सैकड़ों समर्थकों और दोस्तों ने उसे घेर लिया। गगनभेदी नारे लगाए गए, उसे फूलों की मालाओं से लाद दिया गया और समर्थकों ने उसे अपने कंधों पर उठा लिया। आरोपी को ले जाने के लिए लग्जरी गाड़ियों का एक बड़ा काफिला आया था। इसका वीडियो जैसे ही सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, वैसे ही लोगों का गुस्सा फूट पड़ा।
इस शर्मनाक वीडियो के सामने आते ही समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव बुरी तरह भड़क गए। उन्होंने सोशल मीडिया पर लंबा-चौड़ा पोस्ट लिखकर बीजेपी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सीधे कटघरे में खड़ा कर दिया। अखिलेश यादव ने लिखा: "जिस अपनी वाहिनी की भूरी-भूरी प्रशंसा प्रदेश के मुख्यमंत्री जी ने अभी हाल में ही की थी, उस वाहिनी के बलात्कार के आरोपी एक बड़े पदाधिकारी की जमानत होने पर, जिस तरह उसका पुष्प वर्षा व माल्यार्पण से स्वागत हुआ है, उससे निंदनीय और कुछ नहीं हो सकता। लगता है माननीय अगला चुनाव स्वतंत्र रूप से लड़ने के लिए अपने पक्के समर्थकों को बाहर निकाल रहे हैं। अब कल को जमानत पर रिहा ये बलात्कार का आरोपी महिला आरक्षण के समर्थन में नारे लगाते दिखेगा।
आपको बता दें सिर्फ अखिलेश ही नहीं, बल्कि कांग्रेस और आजाद समाज पार्टी ने भी इस मुद्दे पर सरकार को आड़े हाथों लिया। कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव शाहनवाज आलम ने कहा कि....रेप के आरोपी का इस तरह 'हीरो' जैसा स्वागत करना न सिर्फ शर्मनाक है, बल्कि यह देश के लिए एक बेहद खतरनाक ट्रेंड है। सत्ता के संरक्षण में ऐसे उग्र तत्व खुलेआम उत्सव मना रहे हैं। आजाद समाज पार्टी नेता आजाद फिरोज मंसूरी ने पूरी वारदात को याद दिलाते हुए कहा कि जेल से रिहा होते ही एक रेपिस्ट का सौ-सौ गाड़ियों के काफिले से घर ले जाना बेहद निंदनीय है।
हालांकि हुड़दंग मचाना और कानून को ठेंगे पर रखना सुशील प्रजापति के समर्थकों को भारी पड़ गया है। जेल से छूटते ही सुशील के लिए दोबारा जेल जाने का संयोग बन गया है। गाजियाबाद के मसूरी थाने के चौकी प्रभारी प्रदीप कुमार ने खुद संज्ञान लेते हुए सुशील प्रजापति और उसके 12 अन्य साथियों के खिलाफ एक नया मुकदमा दर्ज कर लिया है। अब जो नए आरोप लगाए गए हैं, उनमें...
सार्वजनिक रास्तों को जाम करना और आम जनता के लिए मुसीबत खड़ी करना।
सड़कों पर लापरवाही और खतरनाक तरीके से गाड़ियां चलाना।
बिना अनुमति के जुलूस निकालना और कानून-व्यवस्था को चुनौती देना शामिल है।
जाहिर है गाजियाबाद की ये घटना सिर्फ एक आपराधिक मामले की कहानी नहीं है, बल्कि ये समाज की उस सड़ी-गली मानसिकता का आईना है जहां अपराधी की जाति और उसका संगठन देखकर उसके पापों को धो दिया जाता है। एक तरफ वो पीड़िता है जो अपनी अस्मत की लड़ाई कोर्ट और कचहरी में लड़ रही है, और दूसरी तरफ वो ताकतवर तंत्र है जो जेल से छूटे आरोपी के स्वागत में कालीन बिछा रहा है। अखिलेश यादव, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के तीखे हमलों के बाद अब गेंद पूरी तरह से योगी सरकार और यूपी पुलिस के पाले में है। क्या पुलिस इन हुड़दंगियों पर ऐसा हंटर चलाएगी कि दोबारा किसी रेप आरोपी के स्वागत में फूल उठाने से पहले हाथ कांप जाएं? या फिर ये मामला भी सियासी बयानों की भेंट चढ़कर ठंडे बस्ते में चला जाएगा? इस पूरे शर्मनाक घटनाक्रम पर देश की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि लड़ाई देश की एक बेटी के सम्मान की है!

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