अध्यक्ष पद रिक्त होने से नगर परिषद सुसनेर के कार्य प्रभावित, जनता हो रही परेशान
सुसनेर : नगर परिषद सुसनेर में अध्यक्ष पद रिक्त होने के कारण परिषद के कई जरूरी कार्य प्रभावित हो रहे हैं। परिषद की बैठक लंबे समय से नहीं होने के कारण नामांतरण सहित अन्य प्रशासनिक प्रकरण लंबित पड़े हुए हैं, जिससे नगरवासियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। नागरिकों को अपने जरूरी कार्यों के लिए बार-बार परिषद कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, लेकिन बैठक नहीं होने के कारण मामलों का निराकरण नहीं हो पा रहा है। क्योंकि वर्तमान में नगर परिषद के सीएमओ को बिना परिषद एवं अध्यक्ष की सहमति के एक लाख रुपए तक के भुगतान का अधिकार है। इसके चलते अधिकारियों एवं कर्मचारियों की तानाशाही एवं मनमानी के चलते नगर परिषद सुसनेर में बिना अध्यक्ष के चलते एक माह होने को आया है। ऐसे में प्रतिदिन मनमाना भुगतान निकाय के अधिकारी एवं कर्मचारी जिले के आला अधिकारियों को खुश करके कर रहे है। ऐसी परिस्थितियों में ना जिले के अधिकारी चाहते हे ओर परिषद के अधिकारी एवं कर्मचारी चाहते हे कि उनकी मनमर्जी के भुगतानो के आड़े कोई आए। इसीलिए 19 फरवरी को अध्यक्ष का पद रिक्त होते ही उपाध्यक्ष को अध्यक्ष का चार्ज प्रक्रिया के चलते तत्काल मिल जाना था ओर उसी दिन बैंक में हस्ताक्षर पहुंच जाने थे। परन्तु वर्तमान में भाजपा की गुटबाजी चरम पर होने के कारण आलाकमान भी इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा हे जिसका खामियाजा सुसनेर की जनता को उठाना पड़ रहा है।
क्या नियम कहता हे नियम
मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 (एमपी नगर पालिका एक्ट 1961): धारा 43, 55 और 71 के तहत अध्यक्ष के रिक्त होने पर उपाध्यक्ष या नामांकित व्यक्ति के चार्ज लेने का प्रावधान है।
मध्य प्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 43, 55, और 71 के तहत, अध्यक्ष का पद रिक्त होने, इस्तीफा देने या कार्य करने में असमर्थ होने पर उपाध्यक्ष कार्यभार संभालते हैं। यदि उपाध्यक्ष का पद भी रिक्त हो, तो राज्य सरकार द्वारा नामित पार्षदों में से कोई व्यक्ति या प्रशासनिक अधिकारी अध्यक्ष के कर्तव्यों का निर्वहन करता है। वो किसी भी वर्ग का हो सकता है। फिर कार्यकारी अध्यक्ष के कार्यकाल में कलेक्टर जो जिला निर्वाचन अधिकारी भी होता हे 6 माह के भीतर अध्यक्ष का चुनाव की तिथि की घोषणा करता हे। इस चुनाव में आरक्षित वर्ग का उम्मीदवार ही भाग ले सकता हे। वर्तमान में भाजपा के पास तीन उम्मीदवार ओबीसी वर्ग के हे। जिसमें पार्षद प्रदीप सोनी सहित दो ओबीसी वर्ग की महिला पार्षद स्नेहा युगल किशोर परमार एवं प्रेम बेन कांवल हे। इसमें जिसको पार्षदों का बहुमत होगा वो अध्यक्ष की कुर्सी पर विराजमान होगा। वैसे इस बार पार्षदों से ही अध्यक्ष का चुनाव हुआ था। तो 2027 तक यही नियम लागू रहने की प्रबल संभावना हे क्योंकि अन्य जगह डायरेक्ट जनता के माध्यम से अध्यक्ष का चुनाव करवाया गया था जिसको जनता द्वारा 2027 तक पार्षदों के माध्यम से अध्यक्ष के चुनाव का जनादेश दिया था। इस कारण डायरेक्ट चुनाव अध्यक्ष के जहां हुए थे वो हाल ही में शून्य धोषित किए गए हे। ऐसे में सुसनेर में उपाध्यक्ष को अध्यक्ष का चार्ज मिलने के बाद अध्यक्ष के चुनाव की प्रकिया पार्षदों के माध्यम से ही होने की पूर्ण संभावना हे।
अध्यक्ष के रिक्त होने पर कार्यवाही: धारा 43(2) और 55 के तहत, जब तक नया अध्यक्ष नहीं चुना जाता, तब तक उपाध्यक्ष अध्यक्ष की शक्तियां और कर्तव्यों का पालन करते हैं।
उपाध्यक्ष के असमर्थ होने पर: यदि उपाध्यक्ष भी उपलब्ध न हों, तो पार्षद-इन-काउंसिल या राज्य सरकार द्वारा नियुक्त व्यक्ति (अक्सर पार्षद या मुख्य नगर पालिका अधिकारी) कार्यभार ग्रहण करता है।
बैठकें आयोजित करना: यदि अध्यक्ष कार्य करने में असमर्थ है, तो उपाध्यक्ष बैठकों की अध्यक्षता और अन्य कार्य करते हैं।
जानकारी के अनुसार नगर परिषद में वर्तमान में लगभग 40 के आसपास नामांतरण के प्रकरण लंबित हैं। इन प्रकरणों पर निर्णय परिषद की बैठक में ही लिया जाता है, लेकिन कई महीनों से बैठक आयोजित नहीं होने के कारण इन मामलों में कार्रवाई आगे नहीं बढ़ पा रही है। इससे संबंधित परिवारों को संपत्ति के दस्तावेजी कार्यों में भी दिक्कतें आ रही हैं।
सुसनेर निवासी महेश शर्मा ने बताया कि उनके परिवार के सदस्य बजरंग पिता राधेश्याम शर्मा के नामांतरण के लिए नगर परिषद में आवेदन किया गया था। परिषद द्वारा 16 फरवरी 2026 को नामांतरण के लिए 2250 रुपये की रसीद भी जारी कर दी गई थी, लेकिन इसके बावजूद अब तक नामांतरण की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है। उन्होंने बताया कि परिषद की बैठक नहीं होने के कारण उनका ही नहीं बल्कि अन्य कई लोगों का कार्य भी अटका हुआ है।
सूत्रों के अनुसार नगर परिषद सुसनेर की अंतिम बैठक 24 अक्टूबर 2025 को आयोजित की गई थी। इसके बाद से अब तक परिषद की बैठक आयोजित नहीं हो पाई है। परिषद की बैठक में ही नामांतरण, निर्माण अनुमति, कर संबंधी प्रकरण तथा अन्य प्रशासनिक प्रस्तावों पर निर्णय लिया जाता है। बैठक नहीं होने से कई प्रस्ताव लंबित पड़े हुए हैं और आम नागरिकों के कार्यों पर भी इसका सीधा असर पड़ रहा है।
जानकारी के अनुसार नगर परिषद अध्यक्ष लक्ष्मी राहुल सिसोदिया ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। उनका इस्तीफा 19 फरवरी 2026 को नगरीय विकास एवं आवास विभाग, भोपाल द्वारा स्वीकार कर लिया गया। इसके बाद से नगर परिषद सुसनेर में अध्यक्ष का पद रिक्त घोषित है। अध्यक्ष पद रिक्त होने के कारण परिषद की बैठक बुलाने और कई प्रशासनिक निर्णयों में देरी हो रही है।
नगरवासियों का कहना है कलेक्टर प्रीति यादव जल्द उपाध्यक्ष को अध्यक्ष का नियमानुसार चार्ज देने के आदेश दे ताकि परिषद में जल्द बैठक आयोजित कर लंबित नामांतरण सहित अन्य आवश्यक प्रकरणों का निराकरण किया जा सके। लोगों का कहना है कि यदि समय पर बैठक हो जाए तो कई महीनों से अटके कार्य पूरे हो सकते हैं और नागरिकों को राहत मिल सकती है।
स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि नगर परिषद की बैठक शीघ्र आयोजित कर नागरिकों के लंबित कार्यों का निराकरण कराया जाए, ताकि लोगों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।
इनका कहना:-
"मेरे द्वारा शासन को अवगत करा दिया गया है, मामला शासन स्तर से लंबित है।" -ओपी नागर
सीएमओ नगर परिषद सुसनेर
रिपोर्टर : इमरान

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