शुभेंदु ने चुनी भवानीपुर की राह, नंदीग्राम से दिया इस्तीफा
पश्चिम बंगाल की राजनीति में जायंट किलर के नाम से मशहूर और नवनियुक्त मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने अपनी भविष्य की सियासी राह चुन ली है। नंदीग्राम और भवानीपुर, दोनों ही हाई-प्रोफाइल सीटों पर प्रचंड जीत दर्ज करने के बाद शुभेंदु ने अब भवानीपुर को अपना विधायी क्षेत्र चुना है। बुधवार को विधानसभा में उन्होंने भवानीपुर के विधायक के रूप में शपथ ली और संवैधानिक नियमों का पालन करते हुए अपनी पारंपरिक सीट नंदीग्राम से इस्तीफे का ऐलान कर दिया।
यह फैसला बंगाल की राजनीति में एक बड़े संदेश के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि भवानीपुर वही सीट है जिसे पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का अभेद्य किला माना जाता था, जिसे शुभेंदु ने इस बार ढहा दिया है। शुभेंदु अधिकारी और ममता बनर्जी के बीच की सियासी जंग अब इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गई है। साल 2021 में शुभेंदु ने ममता को नंदीग्राम में हराया था, और 2026 के इस चुनाव में उन्होंने इतिहास दोहराते हुए ममता को उनके अपने घर भवानीपुर में भी धूल चटा दी। शुभेंदु अधिकारी को 73,917 वोट मिले, जबकि ममता बनर्जी को 58,812 वोटों पर संतोष करना पड़ा। शुभेंदु ने करीब 15,105 वोटों के अंतर से यह ऐतिहासिक जीत दर्ज की।
नंदीग्राम में भी शुभेंदु ने अपनी पकड़ साबित की और टीएमसी के पबित्र कर को 9,665 वोटों के अंतर से पराजित किया। दरअसल, नंदीग्राम शुभेंदु अधिकारी के राजनीतिक करियर की जननी रही है। 2007 के भूमि आंदोलन का चेहरा रहे शुभेंदु ने इस सीट को छोड़ते वक्त वहां की जनता को भावुक भरोसा दिलाया। शुभेंदु ने साफ किया कि नंदीग्राम उपचुनाव में पार्टी किसी समर्पित कार्यकर्ता को मैदान में उतारेगी, लेकिन विकास के वादे वह खुद मुख्यमंत्री के तौर पर पूरे करेंगे।
आपको बता दें शुभेंदु अधिकारी का भवानीपुर को चुनना और नंदीग्राम को एक संरक्षक की तरह संभालने का वादा करना, उनकी सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। वह भवानीपुर के जरिए कोलकाता और शहरी मतदाताओं के बीच अपनी पैठ मजबूत करना चाहते हैं, जबकि नंदीग्राम के जरिए ग्रामीण बंगाल की नब्ज पर अपना हाथ रखना चाहते हैं। ऐसे में अब देखना यह होगा कि बतौर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी भवानीपुर के इस ऐतिहासिक किले से बंगाल के विकास की कौन सी नई गाथा लिखते हैं!


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