Glock पिस्टल और फर्जी नंबर प्लेट: शुभेंदु अधिकारी के पीए की हत्या में प्रोफेशनल गैंग का हाथ?

बंगाल की सत्ता बदल गई... ममता का 15 साल का किला ढह गया...लेकिन नहीं बदली तो वो है बंगाल की रक्तरंजित राजनीति! वो हिंसा जिसने कल रात उत्तर 24 परगना के मध्यमग्राम को गोलियों की तड़तड़ाहट से दहला दिया। ये हमला किसी आम आदमी पर नहीं, बल्कि बंगाल की सियासत के सबसे बड़े चेहरे और भावी मुख्यमंत्री माने जा रहे शुभेंदु अधिकारी के दाहिने हाथ चंद्रनाथ रथ पर हुआ है। एक ऐसी साजिश, जिसे सुनकर आपकी रूह कांप जाएगी! वहीं इस घटना के बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या ये भवानीपुर में ममता बनर्जी की हार का बदला है? क्या बंगाल की जीत का जश्न अब मातम में बदला जाएगा? आइए जानते हैं इस घटना की पूरी कहानी...

बुधवार की वो काली रात, मध्यमग्राम का दोहरिया इलाका और वक्त करीब आधी रात का। भाजपा के कद्दावर नेता और भावी मुख्यमंत्री माने जा रहे शुभेंदु अधिकारी के पीए चंद्रनाथ रथ अपनी स्कॉर्पियो से गुजर रहे थे। वो बेखबर थे कि मौत उनका पीछा कर रही है। अचानक एक सफेद कार ने उनकी गाड़ी को ओवरटेक कर रास्ता रोका और तभी अंधेरे को चीरती हुई बिना नंबर प्लेट वाली एक मोटरसाइकिल पास आकर रुकी। हेलमेट पहने हमलावरों ने बिना एक पल गंवाए Glock 47X जैसी अत्याधुनिक पिस्टल से तड़ातड़ गोलियां बरसानी शुरू कर दीं। करीब 10 राउंड फायरिंग हुई। सन्नाटे को चीरती गोलियां सीधे चंद्रनाथ के सीने, पेट और सिर में जा धंसीं। हमलावर इतने पेशेवर थे कि उन्हें पता था कहां वार करना है। चंद्रनाथ के शरीर से 5 गोलियां निकाली गई हैं, जो इस हमले की भयावहता बताने के लिए काफी हैं। ड्राइवर भी लहूलुहान होकर अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहा है। आपको बता दें वायुसेना के पूर्व अधिकारी रहे चंद्रनाथ, जो शुभेंदु के हर सियासी दांव-पेच के सूत्रधार थे, अस्पताल पहुंचने से पहले ही दम तोड़ चुके थे।

वहीं अब पुलिस की तफ्तीश जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। जिस गाड़ी से रास्ता रोका गया, उसकी नंबर प्लेट फर्जी निकली। असली नंबर प्लेट सिलीगुड़ी की एक गाड़ी की थी, जिसे उसके मालिक ने ऑनलाइन बेचने के लिए डाला था। वहां से नंबर चुराकर इस कॉन्ट्रैक्ट किलिंग को अंजाम दिया गया। वहीं चश्मदीदों का दावा रोंगटे खड़े कर देने वाला है। वारदात के बाद हत्यारे सीधे बांग्लादेश बॉर्डर की तरफ भागे। ऐसे में सवाल है कि क्या यह सुपारी किलर्स का काम था? क्या इसमें सरहद पार के कनेक्शन शामिल हैं? घटनास्थल से मिले खाली कारतूस और Glock जैसे विदेशी हथियारों का इस्तेमाल इशारा कर रहा है कि यह कोई गली-मोहल्ले की रंजिश नहीं, बल्कि एक सोची-समझी पॉलिटिकल हिट थी।

वहीं दूसरी तरफ इस हत्याकांड ने बंगाल की राजनीति में ज्वालामुखी फोड़ दिया है। भाजपा का आरोप सीधा और तल्ख है कि 'यह हार की खीझ है।' भाजपा नेता अग्निमित्रा पॉल और अर्जुन सिंह ने सीधे तौर पर टीएमसी के शीर्ष नेतृत्व पर उंगली उठाई है। उनका कहना है कि शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को उनके घर यानी भवानीपुर में मात दी, और इसी हार का बदला चंद्रनाथ की जान लेकर लिया गया है। वहीं शुभेंदु अधिकारी इस वक्त गहरे सदमे में हैं। उनके भाई दिव्येंदु अधिकारी ने सीधे CBI जांच की मांग ठोक दी है। वहीं, टीएमसी इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे शांति भंग करने की साजिश बता रही है। लेकिन सवाल वही है कि अगर पुलिस अलर्ट थी, तो एक हाई-प्रोफाइल शख्सियत के सहयोगी की सरेआम हत्या कैसे हो गई? जाहिर है 4 मई को आए नतीजों के बाद से बंगाल के कोने-कोने से चीखें सुनाई दे रही हैं। अब तक 5 लोग राजनीतिक हिंसा की भेंट चढ़ चुके हैं।

न्यू टाउन: विजय जुलूस के दौरान भाजपा कार्यकर्ता मधु मंडल की पीट-पीटकर हत्या।
बीरभूम: टीएमसी कार्यकर्ता अबीर शेख का धारदार हथियारों से कत्ल।
बशीरहाट: भाजपा कार्यकर्ता रोहित रॉय पर जानलेवा फायरिंग।
कैनिंग और संदेशखाली: पुलिस और केंद्रीय बलों पर हमला।

आपको बता दें कोलकाता से लेकर हावड़ा तक, टीएमसी और भाजपा के दफ्तरों में आगजनी और तोड़फोड़ की तस्वीरें डरा देने वाली हैं। कहीं झंडा फहराने को लेकर युद्ध छिड़ा है, तो कहीं दफ्तरों को खंडहर बनाया जा रहा है। हालात को देखते हुए चुनाव आयोग ने हंटर चला दिया है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने साफ कर दिया है कि किसी भी उपद्रवी को बख्शा नहीं जाएगा। डीजीपी सिद्धार्थ नाथ गुप्ता के मुताबिक, अब तक 200 से ज्यादा FIR दर्ज हो चुकी हैं और 433 दंगाइयों को सलाखों के पीछे भेजा जा चुका है। 1100 से ज्यादा लोग हिरासत में हैं। लेकिन असल सवाल अब भी हवा में तैर रहा है कि क्या बंगाल में सत्ता बदल जाने से वहां की हिंसक संस्कृति बदलेगी? शुभेंदु अधिकारी ने अपने कार्यकर्ताओं से शांति की अपील तो की है, लेकिन साथ ही गुंडों की सफाई का अल्टीमेटम भी दे दिया है। चंद्रनाथ रथ का सपना था अपने नेता को मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठते देखना, लेकिन शपथ ग्रहण से पहले ही उनका खून मध्यमग्राम की सड़कों पर बह गया। यह हत्या आने वाले दिनों में बंगाल की राजनीति को और कितना हिंसक बनाएगी, यह सोचकर ही रूह कांप जाती है। 

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