लखनऊ में 'गौ माता' के लिए महासंग्राम: अविमुक्तेश्वरानंद के मंच पर विपक्ष की हुंकार!

आज लखनऊ की धरती से एक ऐसी खबर आ रही है जिसने उत्तर प्रदेश के सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। आस्था, राजनीति और प्रशासन के टकराव का एक ऐसा त्रिकोण आज कांशीराम प्रेरणा स्थल पर देखने को मिला, जहाँ स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की एक आवाज पर विपक्ष के दिग्गज और पूर्व अधिकारी एक मंच पर आ गए। क्या गौ माता को मिलेगा 'राज्य माता' का दर्जा? आखिर क्यों प्रशासन की शर्तों पर भड़के पूर्व PCS अधिकारी? और क्या 2027 के चुनाव का एजेंडा आज लखनऊ में सेट हो गया है? आइए जानते हैं...

लखनऊ का कांशीराम प्रेरणा स्थल आज सिर्फ एक मैदान नहीं, बल्कि एक वैचारिक कुरुक्षेत्र बन गया! स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की एक पुकार पर आज राजधानी की सड़कों पर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। लेकिन कहानी सिर्फ धर्म की नहीं है, कहानी में सियासत का तड़का है, प्रशासन की सख्ती है और 2027 का चुनावी शंखनाद है! आखिर क्यों एक पूर्व PCS अधिकारी ने प्रशासन को सरेआम ललकारा? और क्यों सपा-कांग्रेस ने थाम लिया शंकराचार्य का हाथ?

बुधवार को आयोजित इस गौ रक्षा कार्यक्रम ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के इस अभियान को समर्थन देने के लिए विपक्षी दलों के दिग्गजों ने मंच साझा किया और साफ कर दिया कि अब 'गौ सेवा' के मुद्दे पर भाजपा का एकाधिकार नहीं रहने वाला। समाजवादी पार्टी के फायरब्रांड विधायक रविदास मेहरोत्रा ने मंच से सीधा हमला बोलते हुए कहा कि भाजपा सरकार सिर्फ बातों की सरकार है। उन्होंने एक ऐतिहासिक एलान करते हुए कहा कि "लिख लीजिए, 2027 में जैसे ही समाजवादी पार्टी की सत्ता आएगी, हम गौ माता को 'राज्य माता' का आधिकारिक दर्जा देंगे।" उन्होंने साफ किया कि यह मुद्दा सपा के चुनावी घोषणा पत्र का हिस्सा होगा। वहीं, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने अपनी उपस्थिति से यह संदेश दिया कि कांग्रेस इस पुनीत कार्य में पूज्य शंकराचार्य जी के साथ चट्टान की तरह खड़ी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि गौ रक्षा के नाम पर राजनीति करने वालों को अब जवाब देने का वक्त आ गया है।

इस पूरे आयोजन में सबसे ज्यादा सुर्खियां पूर्व PCS अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री ने बटोरीं। उन्होंने प्रशासन के उन 26 नियमों और शर्तों की धज्जियां उड़ा दीं, जिन्हें आयोजन के लिए थोपा गया था। अग्निहोत्री ने कड़ा ऐतराज जताया कि पुलिस बल की सुरक्षा का खर्च आयोजकों से क्यों वसूला जा रहा है? उन्होंने सीधे पूछा "क्या जनता की सुरक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी नहीं है?" उन्होंने प्रशासन को कटघरे में खड़ा करते हुए सवाल दागा कि क्या हिंदू देवी-देवताओं का अपमान करने वाले गैर-सनातनी कार्यक्रमों पर भी ऐसी ही सख्त शर्तें लगाई जाती हैं? अग्निहोत्री ने आरोप लगाया कि एक हिस्ट्रीशीटर की शिकायत को आधार बनाकर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ झूठी FIR दर्ज की गई है, जो संतों को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने की एक सोची-समझी साजिश है।

लखनऊ के इस कार्यक्रम ने यह साफ कर दिया है कि विपक्षी दल अब 'सॉफ्ट हिंदुत्व' और 'गौ रक्षा' के मुद्दे पर फ्रंट फुट पर खेल रहे हैं। प्रशासन की सख्ती और संतों की नाराजगी ने सरकार के लिए एक नई चुनौती खड़ी कर दी है। एक तरफ आस्था की लौ है, तो दूसरी तरफ 2027 की सत्ता का रास्ता। प्रशासन की 26 शर्तें और विपक्ष का 'राज्य माता' वाला दांव... उत्तर प्रदेश की राजनीति अब एक नए मोड़ पर है। क्या वाकई 2027 में गौ माता को न्याय मिलेगा या ये सब सियासी बिसात के मोहरे हैं? 

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