“उत्तिष्ठ जाग्रत वरान्निबोध” : स्वामी विवेकानंद का प्रेरणादायी संदेश

आज स्वामी विवेकानंद जी की जयंती है, जो प्रतिवर्ष हमें उनके महान विचारों, ओजस्वी व्यक्तित्व और राष्ट्रनिर्माण के संदेशों को स्मरण करने का अवसर प्रदान करती है। इस विशेष अवसर पर उनका दिया गया प्रेरणादायक संदेश —
“उत्तिष्ठ जाग्रत वरान्निबोध” — हमारे जीवन को दिशा देने वाला अमूल्य मंत्र है, जो आज भी युवाओं को जागरूक, आत्मविश्वासी और कर्मशील बनने की प्रेरणा देता है।

यह महान वाक्य कठोपनिषद से लिया गया है, जिसका अर्थ है —
उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य की प्राप्ति न हो जाए।

स्वामी विवेकानंद और यह संदेश

स्वामी विवेकानंद जी भारत के महान संत, दार्शनिक और युवाओं के प्रेरणास्रोत थे। वे देश में फैली अज्ञानता, निराशा और आत्महीनता को दूर करना चाहते थे। उनका मानना था कि जब तक व्यक्ति अपनी आंतरिक शक्ति को नहीं पहचानता, तब तक सच्ची उन्नति संभव नहीं है।

इसी कारण उन्होंने कहा —

  • उत्तिष्ठ : आलस्य छोड़कर उठो
  • जाग्रत : अज्ञान की नींद से जागो
  • वरान्निबोध : श्रेष्ठ लक्ष्य को समझो और उसे प्राप्त करो

युवाओं के लिए संदेश

स्वामी विवेकानंद जी युवाओं को राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति मानते थे। उनका यह संदेश युवाओं में साहस, आत्मविश्वास और निरंतर प्रयास की भावना जाग्रत करता है।

 

आज उनकी जयंती पर “उत्तिष्ठ जाग्रत वरान्निबोध” का संदेश हमें आत्मबल, कर्म और राष्ट्रसेवा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। यदि हम इस संदेश को अपने जीवन में उतार लें, तो व्यक्तिगत विकास के साथ-साथ देश की प्रगति भी सुनिश्चित हो सकती है।

Leave a Reply



comments

Loading.....
  • No Previous Comments found.