खाते समय पसीना आना: सामान्य है या चेतावनी का संकेत?
खाते समय पसीना आना यानी “सीओरिंग डाइएफ़रेसिस” (gustatory sweating) एक आम लेकिन कभी-कभी चिंता का कारण बन सकता है। कई लोग केवल मसालेदार भोजन खाने पर पसीना आने की शिकायत करते हैं, जबकि कुछ में यह रोजमर्रा के खाने पर भी होता है। आइए जानें इसके कारण और संभावित स्वास्थ्य संकेत।
1. खाते समय पसीने का सामान्य कारण
मसालेदार या तीखा भोजन:
मिर्च, काली मिर्च, अदरक, लहसुन जैसे मसाले शरीर का तापमान बढ़ाते हैं। शरीर पसीने के माध्यम से खुद को ठंडा करता है।
गर्म पेय या भोजन:
गर्म खाना या चाय पीने पर भी शरीर की तापमान नियंत्रण प्रणाली सक्रिय हो जाती है, जिससे पसीना आता है।
भोजन के दौरान तनाव या उत्तेजना:
खाने के समय अगर आप मानसिक रूप से उत्तेजित या तनावग्रस्त हैं, तो भी पसीना आ सकता है।
2. स्वास्थ्य से जुड़े कारण
कुछ मामलों में खाते समय पसीना किसी स्वास्थ्य समस्या का संकेत हो सकता है:
हाइपरहाइड्रोसिस (Hyperhidrosis):
यह एक स्थिति है जिसमें शरीर सामान्य से ज्यादा पसीना बनाने लगता है।
शुगर या डायबिटीज़:
ब्लड शुगर का असंतुलन, विशेषकर हाइपोग्लाइसीमिया (कम ब्लड शुगर), खाने के समय पसीना ला सकता है।
थायरॉइड की समस्या:
थायरॉइड हार्मोन अधिक होने (हाइपरथायरॉइडिज्म) पर शरीर जल्दी पसीना बनाने लगता है।
हृदय रोग या उच्च रक्तचाप:
कभी-कभी खाने के समय अत्यधिक पसीना दिल या रक्तचाप से जुड़ी समस्या का संकेत हो सकता है।
फ्रेडरिक्स/स्नायु रोग:
न्यूरोलॉजिकल या तंत्रिका संबंधी कारण भी पसीने का कारण बन सकते हैं।
3. कब डॉक्टर से संपर्क करें?
अगर पसीना अत्यधिक, खाने के प्रकार से असंबंधित या बार-बार आता है।
अगर इसके साथ दर्द, धड़कन बढ़ना, चक्कर आना, या वजन कम होना जैसे लक्षण हैं।
अगर मसालेदार या गर्म खाना छोड़ने के बाद भी पसीना नहीं रुकता।
4. निवारक उपाय
तीखे मसाले, अत्यधिक गर्म भोजन या अत्यधिक तैलीय भोजन से बचें।
खाने के समय आरामदायक और शांत माहौल रखें।
हल्का, संतुलित और ठंडा पेय लें।
नीम, पुदीना, या हल्दी वाले पेय शरीर को ठंडा करने में मदद कर सकते हैं।
नियमित व्यायाम और हाइड्रेशन बनाए रखें।
खाते समय पसीना आना अक्सर सामान्य शारीरिक प्रतिक्रिया हो सकती है, खासकर मसालेदार या गर्म भोजन पर। लेकिन अगर यह लगातार, अत्यधिक या अन्य लक्षणों के साथ होता है, तो यह किसी अंतर्निहित बीमारी का संकेत भी हो सकता है। ऐसे में एंडोक्रिनोलॉजिस्ट या सामान्य चिकित्सक से सलाह लेना जरूरी है।


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