स्वाइन फ्लू को हल्के में लेना पड़ सकता है भारी, इन लक्षणों पर तुरंत दें ध्यान

मौसम बदलने के साथ फ्लू और सांस से जुड़ी बीमारियों का असर बढ़ सकता है। ऐसे समय में अचानक तबीयत बिगड़ने, तेज बुखार आने या लगातार खांसी रहने को सिर्फ मौसम का असर मानकर टालना ठीक नहीं है। इन्फ्लूएंजा A (H1N1) में भी शुरुआत में कुछ सामान्य फ्लू जैसे संकेत दिखाई दे सकते हैं।

H1N1 की पहचान में बुखार, खांसी, गले में दर्द, नाक से पानी आना, सिरदर्द, बदन दर्द और ज्यादा थकान जैसे लक्षण शामिल हो सकते हैं। हर व्यक्ति में इनकी तीव्रता एक जैसी नहीं होती। अगर तबीयत लगातार खराब हो रही है, तो खुद से बीमारी का अनुमान लगाने के बजाय डॉक्टर से जांच और सलाह लेना ज्यादा सुरक्षित है।

बीमारी के दौरान दूसरों का भी रखें ध्यान

फ्लू जैसे लक्षण होने पर स्कूल, काम या भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचना संक्रमण को आगे फैलने से रोकने में मदद कर सकता है। जरूरत पड़ने पर मास्क पहनें और घर में रहने वाले लोगों, खासकर बुजुर्गों और छोटे बच्चों के साथ नजदीकी संपर्क कम रखें।

खांसी या छींक के समय हाथ की बजाय टिश्यू या कोहनी के अंदरूनी हिस्से का इस्तेमाल करें। इस्तेमाल के बाद टिश्यू को उचित तरीके से फेंक दें। इसके साथ ही बार-बार छुई जाने वाली चीजों की सफाई का भी ध्यान रखना उपयोगी हो सकता है।

हाथों की सफाई है जरूरी

संक्रमण से बचने के लिए हाथों की स्वच्छता को नजरअंदाज न करें। खाने से पहले, बाहर से आने के बाद और खांसने-छींकने के बाद साबुन और पानी से हाथ धोएं। जरूरत पड़ने पर अल्कोहल-बेस्ड हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल किया जा सकता है।

कब डॉक्टर से संपर्क करें?

अगर लक्षण लगातार बने हुए हैं, हालत बिगड़ रही है या सांस लेने में परेशानी जैसी चिंता वाली स्थिति पैदा हो रही है, तो चिकित्सकीय मदद लेने में देरी न करें। H1N1 का इलाज और आगे की देखभाल व्यक्ति की स्थिति के अनुसार तय की जाती है, इसलिए डॉक्टर की सलाह को प्राथमिकता देना जरूरी है।

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