Teachers’ Day Special : आचार्य श्री से मिली वो सीख, जो किताबों में नहीं मिलती
Teachers’ Day केवल उन शिक्षकों को याद करने का दिन नहीं है, जिन्होंने हमें किताबों का ज्ञान दिया, बल्कि उन गुरुओं और मार्गदर्शकों के प्रति कृतज्ञ होने का अवसर भी है, जिन्होंने हमें जीवन को एक अलग दृष्टि से देखना सिखाया।
कुछ ऐसा ही व्यक्तित्व है आचार्य श्री शुभम कांत गोसाईं जी का, जो कि अपने आप में एक सीख है—सरलता, उदारता, विनम्रता और सेवा के प्रति निरंतर उत्साह की। उन्हें देखकर समझ आता है कि भक्ति केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं, बल्कि हमारे व्यवहार और हमारे आचरण में भी दिखाई देनी चाहिए।
सबसे बड़ी सीख उनकी सरलता से मिलती है। इतने बड़े दायित्वों के बीच भी सहज रहना, हर किसी से प्रेम और आत्मीयता से मिलना और बिना किसी भेदभाव के सबको अपनेपन का भाव देना—यह अपने आप में भक्ति का एक सुंदर स्वरूप है।

उनकी उदारता भी बहुत कुछ सिखाती है। अपने पास जो है, उसे खुले मन से बाँटना और दूसरों के लिए सदैव कुछ करने की तत्परता रखना—यह भाव मन में यह विचार जगाता है कि सच्ची सम्पन्नता संग्रह में नहीं, बाँटने में है।
और सेवा के प्रति उनका उत्साह—शायद सबसे प्रेरणादायक सीखों में से एक है। सेवा का अवसर मिले तो सबसे आगे रहना, किसी कार्य को छोटा न समझना और हर सेवा को पूरे उत्साह से करना।

विग्रह सेवा के अलावा आचार्य श्री की सेवा के अनेक रूप देखने को मिलते हैं। कभी कैमरा हाथ में लेकर लाल जू के मनोहर स्वरूप को भक्तों तक पहुँचाने की उत्सुकता, तो कभी किसी आयोजन, व्यवस्था या अन्य सेवा में अपना योगदान देना। लेकिन हर सेवा के पीछे एक ही भाव होना चाहिए—यह मेरा सौभाग्य है कि लाल जू ने मुझे अपनी सेवा में लगाया।

आचार्य श्री से यह भी सीखने को मिलता है कि सेवा में आगे रहना केवल काम में आगे रहना नहीं, बल्कि भाव में आगे रहना है—निस्वार्थ होकर, सरल होकर और बिना किसी अपेक्षा के।
शायद यही कारण है कि उनके व्यक्तित्व से मिलने वाली सीख किसी एक दिन तक सीमित नहीं रहती। उनकी सरलता मन को सरल होना सिखाती है, उनकी उदारता मन को बड़ा करना सिखाती है और सेवा के प्रति उनका उत्साह हमें याद दिलाता है कि श्री राधारमण लाल जू की सेवा में उत्साह कभी कम नहीं होना चाहिए।
इस Teachers’ Day पर आचार्य श्री के चरणों में यही कृतज्ञता—
उन्होंने केवल सेवा करना नहीं सिखाया, सेवा को प्रेम, सरलता, उदारता और उत्साह के साथ जीना सिखाया।
इस Teachers’ Day पर आचार्य श्री के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए शब्द शायद कम पड़ जाएँ। उनके व्यक्तित्व से मिली सीखों को जीवन में उतार पाना ही उनके प्रति सच्ची कृतज्ञता होगी—सेवा में सदैव आगे रहना, हर किसी से सरलता और प्रेम से मिलना, अपनी सामर्थ्य के अनुसार उदार बने रहना और श्री राधारमण लाल जू की सेवा के प्रति उत्साह को कभी कम न होने देना। लाल जू की कृपा से यह भाव जीवनभर बना रहे, यही प्रार्थना है।
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